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Friday, 14 August, 2026
होमफीचर40 मिनट का सफर, सड़क की जगह-जगह मरम्मत जारी: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर आखिर क्या गड़बड़ हुई?

40 मिनट का सफर, सड़क की जगह-जगह मरम्मत जारी: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर आखिर क्या गड़बड़ हुई?

उत्तर प्रदेश में नए इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के प्रतीक के तौर पर राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और योगी आदित्यनाथ ने 63 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का उद्घाटन किया. इसके तीन हफ़्ते से भी कम समय बाद, NHAI ने टोल वसूली रोक दी और सड़क को हुए नुकसान के लिए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी.

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लखनऊ/कानपुर: उत्तर प्रदेश के तीन सबसे ताकतवर नेताओं ने एक ही मंच से बार-बार वादा किया था. लखनऊ से कानपुर सिर्फ 35 से 45 मिनट में पहुंचा जा सकेगा. पुराने हाईवे पर लगने वाले दो से तीन घंटे के समय के मुकाबले यह सफर नई, बिना रुकावट वाली सड़क से होगा, जिस पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां चल सकेंगी. लेकिन 13 जुलाई को उद्घाटन के सिर्फ तीन हफ्ते बाद ही यात्री सड़क पर रोड रोलर, खुदाई करने वाली मशीनें, सावधानी वाली टेप और सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाने वाले मजदूरों के बीच से गुजर रहे थे.

उत्तर प्रदेश के सबसे नए एक्सप्रेसवे के 64वें किलोमीटर पर रफ्तार का वादा अब मरम्मत के काम में फंस गया है.

छह लेन वाली सड़क के 300 मीटर हिस्से को खुलने के सिर्फ 12 दिन बाद दोबारा बनाया जा रहा था. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI इसे “स्थानीय स्तर पर सड़क की ऊपरी सतह खिसकने” का मामला बता रहा है. एक्सप्रेसवे के 63 किलोमीटर लंबे हिस्से में दूसरी जगहों पर भी ताजा डामर के छोटे-छोटे हिस्से मरम्मत के निशान दिखा रहे थे.

इस सड़क का मकसद लखनऊ-कानपुर के सफर को आसान बनाना था. लेकिन यातायात के लिए खुलने के सिर्फ दो हफ्ते बाद ही सवाल उठने लगा कि नई सड़क के कितने हिस्से को ठीक करने की जरूरत पड़ गई है और क्यों.

भारत अब इंफ्रास्ट्रक्चर की घोषणा करने में काफी अच्छा हो गया है. प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं, उनका उद्घाटन किया जा रहा है और उन्हें एक नए, जुड़े हुए राज्य के प्रतीक के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है. लेकिन क्या यह पहली बारिश को झेल सकता है, सुरक्षित तरीके से ट्रैफिक संभाल सकता है और कैमरों के हटने के बाद भी ठीक से काम करता रह सकता है, यह पूरी तरह अलग सवाल है.

उत्तर प्रदेश इतनी बड़ी संख्या में सड़कें और एक्सप्रेसवे बना रहा है कि राज्य में आने-जाने का तरीका बदलने की उम्मीद है. लेकिन निर्माण के काम में ये खामियां इंफ्रास्ट्रक्चर के इस तेजी से बढ़ते काम का कम अच्छा पक्ष दिखाती हैं. उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली एक लिंक रोड इस सीजन की पहली बारिश में बह गई. इसका उद्घाटन सिर्फ दो महीने पहले हुआ था. हमीरपुर में मई में निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा गिरने से छह मजदूरों की मौत हो गई. वहीं हरदोई में एक महीने बाद निर्माण के दौरान पुल का एक बीम गिर गया, जिसमें दो मजदूर घायल हो गए.

A worker manually clears a damaged section of the expressway, removing broken chunks of asphalt and debris with his hands. Saman Husain | ThePrint
एक मजदूर एक्सप्रेसवे के खराब हिस्से को हाथों से साफ कर रहा है. वह टूटे हुए डामर के टुकड़े और मलबे को अपने हाथों से हटा रहा है. समन हुसैन| दिप्रिंट

भारत इस समय अपने सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण अभियानों में से एक के बीच में है. हाईवे, एक्सप्रेसवे, पुल, एयरपोर्ट और शहरी परिवहन पर सरकारी पैसा खर्च किया जा रहा है. मई में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव की समीक्षा की थी. यह समीक्षा मीडिया और सोशल मीडिया से मिली जानकारी के बाद की गई थी. मंत्रालय ने खास तौर पर गुणवत्ता मानकों का पालन, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर और मानसून की तैयारी पर जोर दिया था.

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बिल्कुल इसी तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर पेश किया गया था. यह एक ऐसा एक्सेस-कंट्रोल वाला कॉरिडोर है, जिसे तेज रफ्तार के लिए बनाया गया है. इसमें ऑटोमेटेड कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग और कैमरों और घटना का पता लगाने वाले सिस्टम का नेटवर्क लगाया गया है.

स्वाभाविक तौर पर, इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था. इसे राज्य की नई इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया गया था. सिंह ने कहा था कि लखनऊ और कानपुर के बीच लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक की समस्या खत्म हो गई है. नेताओं ने उस हाईवे का उद्घाटन किया था, जिसे 4,700 करोड़ रुपये की लागत से पीएनसी इंफ्राटेक से जुड़ी कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है.

आदित्यनाथ ने इस प्रोजेक्ट को “न्यू उत्तर प्रदेश” का हिस्सा बताया था.

उन्होंने कहा था, “‘न्यू उत्तर प्रदेश’ बेहतर शासन, बेहतरीन सुरक्षा और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के एक बेहतरीन मॉडल के तौर पर स्थापित हुआ है.”

दो हफ्ते से भी कम समय बाद, 26 जुलाई को उन्नाव के कोरारी इलाके में 64वें किलोमीटर के पास बारिश के बाद सड़क की ऊपरी सतह खिसक गई. NHAI ने शुरुआत में कहा था कि प्रभावित हिस्से में सड़क की ऊपरी परत खराब हुई है, नीचे की सड़क की संरचना में कोई समस्या नहीं है और इसे ठीक कर दिया गया है. लेकिन बाद की जांच और मरम्मत के काम से कई और सवाल सामने आए हैं.

जिस सड़क का मकसद यात्रियों का समय बचाना और लखनऊ-कानपुर के सफर को आसान बनाना था, वही अब उनमें से कई लोगों को सड़क पर चल रहे मरम्मत के काम के बीच सफर करने पर मजबूर कर रही है.

At the 64 km mark towards Lucknow, where the biggest cave-in was reported, a worker lays a fresh road line at the repatched stretch. Saman Husain | ThePrint
लखनऊ की ओर 64 किलोमीटर के निशान पर, जहां सबसे बड़ा गड्ढा हुआ था, एक मजदूर दोबारा ठीक किए गए हिस्से पर सड़क की नई लाइन बना रहा है. समन हुसैन | दिप्रिंट

एक शोकेस एक्सप्रेसवे

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, जिसे राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-6 के तौर पर अधिसूचित किया गया है, इसमें लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ इलाकों से गुजरने वाले ऊंचे हिस्से शामिल हैं. इसके अलावा इसमें तीन बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास और छह फ्लाईओवर हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त शहरी कॉरिडोर में से एक पर ट्रैफिक को आसानी से चलाने के लिए बनाया गया है.

इस प्रोजेक्ट को कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी के परफॉरमेंस के तौर पर भी पेश किया गया था. NHAI ने इस कॉरिडोर के लिए 3D ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस चुना था. इसमें डिजिटल इंजीनियरिंग मॉडल और सैटेलाइट लोकेशन का इस्तेमाल करके निर्माण मशीनों को ज्यादा सटीक तरीके से चलाया जाता है. इस सिस्टम को मिट्टी का काम और सड़क बनाने के दौरान रफ्तार और सटीकता दोनों बढ़ाने के तरीके के तौर पर पेश किया गया था.

बनी हुई सड़क पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम भी लगाया गया था. इससे गाड़ियां FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन के जरिए बिना सामान्य टोल बूथ पर रुके गुजर सकती हैं. उद्घाटन के समय की रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे कॉरिडोर में 80 से ज्यादा हाई-डेफिनिशन कैमरे, 16 वीडियो घटना पहचानने वाले सिस्टम और स्पीड रडार लगाए गए थे.

A worker waits for high-speed traffic to pass before dumping construction debris he has manually pulled from the road onto the other side of the expressway. Saman Husain | ThePrint
एक मजदूर एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से गुजरते ट्रैफिक के रुकने का इंतिजार कर रहा है, ताकि सड़क से हाथों से हटाए गए निर्माण के मलबे को एक्सप्रेसवे के दूसरी तरफ डाल सके. समन हुसैन | दिप्रिंट

इसे तभी खोला गया जब इंजीनियरों ने पुलों के लोड टेस्ट, ऊपरी और निचली संरचना की जांच और सुरक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच पूरी कर ली थी. इसके बाद कंपनी को फरवरी 2026 में प्रोविजनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट और करीब 11 जून को फाइनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिला था. यह सड़क खुलने से एक महीने से भी कम समय पहले हुआ था.

कागजों पर यह एक ऐसी तकनीकी रूप से आधुनिक सड़क होनी थी, जिसे लखनऊ-कानपुर के सफर को तेज, सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद बनाने के लिए तैयार किया गया था. लेकिन हाल में सबसे ज्यादा दिखाई देने वाली तकनीक इससे काफी सामान्य थी.

64वें किलोमीटर पर एक मिट्टी दबाने वाली मशीन और हाइड्रोलिक खुदाई मशीन खराब हुए हिस्से पर काम कर रही थीं. मिट्टी को दबाने के लिए एक पानी का टैंकर जमीन को गीला रख रहा था. एक कोल्ड-मिलिंग मशीन खराब डामर की ऊपरी सतह हटा रही थी. पास में मजदूर नया मटेरियल बिछाने और सड़क की लाइनों को दोबारा बनाने की तैयारी कर रहे थे.

64 से 65 किलोमीटर के हिस्से में करीब 10 मजदूर काम कर रहे थे. इनमें कुछ महिलाएं भी थीं, जो फुटपाथ के किनारे जमा बारिश का पानी साफ कर रही थीं. एक मजदूर हाथ से चलने वाली थर्मोप्लास्टिक रोड-मार्किंग मशीन चला रहा था और ठीक किए गए हिस्से पर सड़क के किनारे नई सफेद लाइन बना रहा था.

एक्सप्रेसवे को पीएनसी इंफ्राटेक की बनाई गई अलग-अलग कंपनियों के जरिए दो पैकेज में बनाया गया था. पैकेज 1 को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है. यह लखनऊ एयरपोर्ट के पास शहीद पथ से साहिब नदी के पुल तक 17.52 किलोमीटर लंबा है. पैकेज 2 को अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है. यह 45.24 किलोमीटर लंबा है और अभी एक्सप्रेसवे पर दिखाई दे रहे ज्यादातर मरम्मत के काम इसी हिस्से में हो रहे हैं.

NHAI के अधिकारियों ने कहा कि पैकेज 1 छोटा है, लेकिन इसमें करीब 10 किलोमीटर का ऊंचा हिस्सा शामिल है और प्रोजेक्ट की कुल लागत में इसका हिस्सा करीब 2,000 करोड़ रुपये है. उन्होंने कहा कि इस हिस्से में मरम्मत की जरूरत वाली कोई खराबी सामने नहीं आई है. समस्याएं ज्यादातर पैकेज 2 में हैं.

A woman collects pooled rainwater from an elevated highway stretch, using her slipper to splash the water into a plastic bucket. Saman Husain | ThePrint
एक महिला ऊंचे हाईवे के एक हिस्से से जमा बारिश का पानी निकाल रही है. वह अपनी चप्पल की मदद से पानी को उछालकर प्लास्टिक की बाल्टी में डाल रही है. समन हुसैन | दिप्रिंट

पहली चेतावनी

पहली बड़ी सार्वजनिक चिंता 26 जुलाई को सामने आई, जब उन्नाव के कोरारी इलाके के पास सड़क की खराब सतह के वीडियो ऑनलाइन फैलने लगे. समाजवादी पार्टी के बांदा जिला अध्यक्ष मधुसूदन कुशवाहा ने खराब हिस्से का वीडियो पोस्ट किया और बाद में मरम्मत के काम का एक और वीडियो भी पोस्ट किया.

SP प्रमुख अखिलेश यादव ने मरम्मत के काम वाले दूसरे वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “चल कम, धंस ज्यादा: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे! लागत: 4,700 करोड़ रुपये!”

NHAI ने इस बात का विरोध किया.

उसका शुरुआती जवाब था कि सड़क “धंसी” नहीं है. NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि प्रभावित हिस्सा करीब 40 मीटर तक सिर्फ सड़क की ऊपरी परत का था और तकनीकी तौर पर इसे सड़क का धंसना नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि लंबी बिटुमिन वाली सड़कों पर इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.

Loose asphalt and debris scattered along the edges of the expressway. Saman Husain | ThePrint
एक्सप्रेसवे के किनारों पर डामर और मलबा बिखरा हुआ था. समन हुसैन | दिप्रिंट

लेकिन पहली मरम्मत के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ.

अगस्त की शुरुआत तक NHAI ने 63 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की व्यापक जांच के आदेश दे दिए थे और प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी थी. प्राधिकरण ने कहा कि उसके इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को सड़क की बेस या संरचनात्मक परतों में कोई खराबी नहीं मिली है. वहीं, सड़क की स्थिरता की जांच के लिए सड़क विशेषज्ञ प्रोफेसर केएस रेड्डी की अध्यक्षता में IIT खड़गपुर की अगुवाई वाली एक तकनीकी समिति बनाई गई.

Old construction mesh, pulled out during repairs on the Kanpur-Lucknow expressway, lies tangled beneath the bucket of an excavator. Saman Husain | ThePrint
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मरम्मत के दौरान निकाली गई पुरानी निर्माण जाली खुदाई वाली मशीन की बाल्टी के नीचे उलझी पड़ी है. समन हुसैन | दिप्रिंट

64वां किलोमीटर ही अकेली नई मरम्मत वाली जगह नहीं

इस कॉरिडोर से गुजरने पर साफ पता चलता है कि 64वें किलोमीटर पर हुआ नुकसान अकेली ऐसी जगह नहीं है, जहां मरम्मत का काम दिखाई दे रहा है.

सड़क के पुराने, धूल से ढके हिस्सों के मुकाबले ताजा डामर साफ नजर आता है. इस हिस्से में 58वें किलोमीटर के आसपास मरम्मत दिखाई दी. 53वें किलोमीटर के आसपास चार जगहों पर मरम्मत की गई थी. 52वें किलोमीटर के आसपास दो छोटी जगहों पर मरम्मत थी. इसके अलावा 49वें, 48वें, 37वें और 28वें किलोमीटर के पास भी मरम्मत के दूसरे हिस्से दिखाई दिए.

39वें किलोमीटर पर नुकसान वाले हिस्से में अभी भी काम चल रहा था. दो मजदूर टूटे हुए डामर से भरी प्लास्टिक की टोकरियां सड़क से दूर ले जा रहे थे और गुजरते ट्रैफिक के हिसाब से सड़क पार कर रहे थे. खराब हिस्सा लेन को अलग करने वाली पट्टी के पास था और गाड़ियां बगल वाली लेन से गुजर रही थीं.

काम वाली जगह पर रिफ्लेक्टिव कोन और सावधानी वाली टेप लगी थी. एक चेतावनी वाले बोर्ड पर खोपड़ी और हड्डियों के निशान के साथ “Men at Work — Khatra” (आदमी काम पर हैं —खतरा ) लिखा था.

A warning tape mentions 'Men at work' at the expressway. Saman Husain | ThePrint
एक्सप्रेसवे पर “Men at work” लिखी चेतावनी वाली टेप लगी है. समन हुसैन | दिप्रिंट

एक दूसरी जगह करीब 10 मीटर लंबे खराब हिस्से की मरम्मत की जा रही थी.

रास्ते के कुछ हिस्सों में सड़क के किनारे फेंका हुआ निर्माण का सामान पड़ा था. मजदूरों ने बताया कि कुछ जगहों से पुरानी मजबूत करने वाली जाली हटाकर नई जाली लगाई गई है.

कुछ नई मरम्मत वाली जगहों पर सतह को जल्दी सुखाने के लिए इंडस्ट्रियल पंखे भी लगाए गए थे. NHAI के एक अधिकारी ने कहा कि यह किसी तय मरम्मत के तरीके का हिस्सा नहीं है.

अधिकारी ने कहा, “हाईवे की साइट पर मशीन ऑपरेटर, टोल बूथ कर्मचारी और मजदूरों समेत करीब 400 लोग काम कर रहे हैं. हर कोई अपने तरीके से समाधान निकाल रहा है. इसलिए हो सकता है कि किसी को लगा हो कि इंडस्ट्रियल पंखे लगाना अच्छा तरीका है.”

NHAI के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि पूरे एक्सप्रेसवे में करीब 80 जगहों पर मरम्मत की जरूरत पड़ी है. इनमें से करीब 20 जगहों पर ज्यादा बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत थी, जबकि बाकी जगहों पर छोटे गड्ढे थे, जिन्हें सामान्य तरीके से पैचिंग करके ठीक किया जा सकता था.

NHAI ने मरम्मत की पूरी जगहवार सूची साझा नहीं की है. उसका कहना है कि ज्यादातर काम सामान्य रखरखाव के तहत आता है. सड़क की सतह खिसकने की सही वजह अभी तक सामने नहीं आई है.

The newly constructed toll booth sits empty after NHAI halted toll collection on August 5. Collection had begun on 13 July, leaving toll booth workers now sitting idle. Saman Husain | ThePrint
5 अगस्त को NHAI ने टोल वसूली रोक दी थी. इसके बाद नया बनाया गया टोल बूथ खाली पड़ा है. टोल वसूली 13 जुलाई से शुरू हुई थी और अब टोल बूथ के कर्मचारी खाली बैठे हैं. समन हुसैन | दिप्रिंट

जिस सड़क की अभी मरम्मत चल रही है, उसकी कीमत

खाली टोल प्लाजा अपनी अलग कहानी बता रहे हैं. बूथ साफ-सुथरे और नए रंगे हुए हैं, लेकिन पूरी तरह खाली हैं. नुकसान के बाद NHAI की कार्रवाई के तहत टोल वसूली तब तक रोक दी गई है, जब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता. NHAI ने कहा है कि टोल से होने वाले नुकसान की भरपाई कंपनी से की जाएगी.

एक कर्मचारी कुछ दिन पहले ही अमृतसर के एक एक्सप्रेसवे के टोल पोस्ट से यहां ट्रांसफर होकर आया था. अब वह अपनी शिफ्ट में ज्यादातर खाली बैठा रहता है.

उसने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मैं 13 जुलाई से यहां टोल वसूल रहा हूं, लेकिन कुल मिलाकर पिछले 10 साल से टोल वसूल रहा हूं. मैंने कभी किसी एक्सप्रेसवे को उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद खराब होते नहीं देखा. मरम्मत होती है, लेकिन आमतौर पर एक साल तक इस्तेमाल और टूट-फूट के बाद.”

उद्घाटन के कुछ ही दिनों के अंदर टोल में भी बदलाव हो गया था. रास्ते पर ट्रैफिक कम है. एक सफेद सेडान वहां रुकती है. ड्राइवर गंगा एक्सप्रेसवे का रास्ता पूछता है. टोल कर्मचारी उसे रास्ता बताता है और फिर खाली बूथ के पास उसके आराम के लिए बनाए गए सफेद रंग के भवन में वापस चला जाता है.

Several other sites remain in the initial stages of repatching. Saman Husain | ThePrint
कई दूसरी जगहों पर अभी मरम्मत का काम शुरुआती चरण में है. समन हुसैन | दिप्रिंट

NHAI अधिकारियों के मुताबिक, नुकसान की जानकारी सामने आने से कुछ दिन पहले टोल की दरों में भी बदलाव किया गया था. लेकिन यह बढ़ोतरी हर साल होने वाले सामान्य बदलाव का हिस्सा थी और घटना से इसका कोई संबंध नहीं था.

जब एक्सप्रेसवे खुला था, तब कार, जीप और SUV से एक तरफ के सफर के लिए 275 रुपये और उसी दिन आने-जाने के लिए 415 रुपये लिए जा रहे थे. 22 जुलाई तक, यानी उद्घाटन के मुश्किल से एक हफ्ते बाद और 64वें किलोमीटर पर सड़क की सतह खिसकने से कुछ दिन पहले, NHAI ने दरें बढ़ा दीं. कार का एक तरफ का टोल 285 रुपये और आने-जाने का टोल 425 रुपये हो गया.

50 ट्रिप वाले मासिक पास की कीमत 9,220 रुपये से बढ़कर 9,450 रुपये हो गई. कमर्शियल वाहनों पर ज्यादा बढ़ोतरी हुई. बस और दो-एक्सल वाले ट्रकों का टोल 935 रुपये से बढ़कर 960 रुपये हो गया. चार से छह एक्सल वाले भारी वाहनों का टोल 1,470 रुपये से बढ़कर 1,505 रुपये हो गया.

पुराने लखनऊ-कानपुर हाईवे, NH-27 को भी इससे राहत नहीं मिली. उसी बदलाव में उसके नवाबगंज टोल प्लाजा पर भी दरें बढ़ीं. कारों के लिए एक तरफ का टोल 95 रुपये से बढ़कर 100 रुपये और बसों और दो-एक्सल ट्रकों का टोल 325 रुपये से बढ़कर 340 रुपये हो गया.

इसका समय यात्रियों की परेशानी बढ़ाने वाला था. एक्सप्रेसवे शुरू होने से पहले ही इसे महंगा बताया जा रहा था. लोग ज्यादा टोल और सफर का समय कम होने के वादे के बीच तुलना कर रहे थे.

A worker stands near a damaged stretch on the Lucknow-Kanpur Expressway. Saman Husain | ThePrint
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के खराब हिस्से के पास एक मजदूर खड़ा है. समन हुसैन | दिप्रिंट

NHAI ने ठेकेदार पर कार्रवाई की

विवाद ने इस बात पर भी ध्यान खींचा कि सड़क किसने बनाई. एक्सप्रेसवे के पीछे मौजूद सूचीबद्ध निर्माण कंपनी PNC Infratech का नियंत्रण चार भाइयों के पास है. इनके नाम प्रदीप, चक्रेश, योगेश और नवीन कुमार जैन हैं.

नवीन जैन कंपनी के पूर्व पूर्णकालिक निदेशक हैं और अभी भी कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी रखते हैं. वह उत्तर प्रदेश से BJP के मौजूदा राज्यसभा सांसद और आगरा के पूर्व मेयर भी हैं.

PNC Infratech के पास हाईवे प्रोजेक्ट का बड़ा पोर्टफोलियो है. उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में कंपनी को 6,731.8 करोड़ रुपये से ज्यादा के हाईवे और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट दिए गए हैं. इनमें अलीगढ़ से कानपुर तक के प्रोजेक्ट शामिल हैं.

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की समस्याएं सामने आने से कुछ दिन पहले तक भी कंपनी को NHAI के काम मिलते रहे. विवाद से पहले कंपनी को करीब 3,483 करोड़ रुपये के तीन हाईवे प्रोजेक्ट दिए गए थे. इनमें एक बाराबंकी में और दो गुजरात में दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से थे.

Smell of fresh asphalt hangs over the freshly laid-down road stretches that gleam against the dust-covered road around them. Saman Husain | ThePrint
नई सड़क पर ताजा डामर की गंध फैली हुई है. यह आसपास की धूल से ढकी सड़क के मुकाबले चमक रही है. समन हुसैन | दिप्रिंट

NHAI लगातार कह रहा है कि सड़क “पूरी तरह सुरक्षित” है और इसे “सभी तय गुणवत्ता मानकों के मुताबिक” बनाया गया है. इसके बावजूद प्रोजेक्ट के निर्माण और निगरानी से जुड़े लगभग हर स्तर पर काफी सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया गया है.

प्राधिकरण ने अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड को “नॉन-परफ़ॉर्मर” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस टैग के लगने के बाद कंपनी NHAI के भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए बोली नहीं लगा सकेगी. प्राधिकरण ने कंपनी पर जुर्माने का प्रस्ताव भी दिया है. इसके साथ ही प्रोजेक्ट के निर्माण और निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है.

इसके तहत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की 2 प्रतिशत राशि के बराबर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. कंपनी के फुटपाथ और हाईवे प्रमुख और दूसरे जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ तीन साल तक की पाबंदी की कार्रवाई शुरू की गई है. इसके अलावा उसके फुटपाथ कंडीशन इंडेक्स की रेटिंग भी कम की जाएगी, जिससे भविष्य के टेंडर में उसकी स्थिति प्रभावित होगी। कंपनी को पूरी मरम्मत का खर्च खुद उठाने का भी आदेश दिया गया है. एनएचएआई के मुताबिक, अब तक यह खर्च करीब 3 करोड़ रुपये है.

इस एक्सप्रेसवे की डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड 15 साल है. इसके तहत कंपनी को अपने खर्च पर खराबियों को ठीक करने की जिम्मेदारी है.

At multiple spots, the highway’s edge is also under construction with men and machines digging out a drainage channel. Saman Husain | ThePrint
कई जगहों पर हाईवे के किनारे भी निर्माण का काम चल रहा है. वहां लोग और मशीनें नाली बनाने के लिए खुदाई कर रहे हैं. समन हुसैन | दिप्रिंट

जमीन पर निगरानी से जुड़े तीन अधिकारियों को हटाया गया है. इनमें निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम के लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार शामिल हैं. इन तीनों को दो साल के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI या NHIDCL के प्रोजेक्ट में काम करने से भी रोक दिया गया है. प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है. उनके और उनके पूर्ववर्ती सौरभ चौरसिया के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जा रही है.

नए एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम अभी भी जारी है. फिलहाल 40 मिनट में पहुंचने का वादा उद्घाटन और सड़क पर चल रहे काम के बीच कहीं अटका हुआ है.

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