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Tuesday, 24 February, 2026
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उन्नाव रेप सर्वाइवर अब वकील बनकर, दूसरी पीड़िताओं को दिलाना चाहती हैं न्याय

जिन दिनों कोर्ट में सुनवाई नहीं होती, उनका घर ही उनका क्लासरूम बन जाता है. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में बीए प्रोग्राम कोर्स में एडमिशन लिया है.

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नई दिल्ली: अपना हल्का गुलाबी दुपट्टा ठीक करते हुए, 25 साल की एस ने अपना चेहरा ढकने से इनकार कर दिया. उन्नाव रेप केस की सर्वाइवर होने के नाते, अब प्राइवेसी उनकी प्राथमिकता में सबसे पीछे है.

एस ने दिल्ली के निजामुद्दीन ईस्ट में अपने वकील के ऑफिस में कुर्सी पर बैठते हुए दिप्रिंट से थकान भरे अंदाज़ में कहा, “अब बचा ही क्या है? बस मेरा चेहरा ब्लर कर दीजिए. मेरे साथ जो कुछ हुआ, उसके बाद? मैंने अपने पिता को खो दिया, मैंने अपनी इज्जत खो दी. चेहरा दिखाने या न दिखाने से अब कुछ नहीं बदलेगा.”

उन्होंने कहा कि वह आठ साल में 100 से ज्यादा बार कोर्ट जा चुकी हैं.

एस की थकान साफ दिखती है, लेकिन साथ ही यह भी दिखता है कि वह गायब होने से इनकार कर रही हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थकों की तरफ से लगातार उनका अपमान किया जा रहा है और उन पर आरोप लगाए जाते रहे हैं. सेंगर वही व्यक्ति है जिसने उनका तब रेप किया था जब वह किशोरी थीं. आरोप से लेकर सेंगर को सज़ा होने तक के वर्षों में इस केस ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी.

हमला, धमकियां, कोर्ट की तारीखें, बहिष्कार, विरोध प्रदर्शन, बचाव, टीवी न्यूज़ इंटरव्यू, कोर्ट रूम, वकील और जज—पिछला एक दशक पूरी तरह अफरातफरी से भरा रहा. आज एस एक मां हैं, दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रही हैं और कानून पढ़ने का सपना रखती हैं, ताकि अपने केस को आखिरी अपील तक खुद देख सकें और उन दूसरे रेप केसों के लिए भी लड़ सकें जो टीवी कैमरे हटने के बाद भुला दिए जाते हैं. उन्होंने सीखा है कि न्याय सिर्फ फैसले से नहीं मिलता और यह लड़ाई सिर्फ कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होती.

मनोवैज्ञानिक नीतू सरीन ने कहा, “ट्रॉमा सिर्फ शरीर के साथ जो हुआ, वही नहीं होता. यह इंसान की पहचान को तोड़ देता है. यह व्यक्ति को भावनात्मक और शारीरिक रूप से थका देता है और उसे समझ नहीं आता कि क्या महसूस करें और कब. वे जानते हैं कि यह शर्म उनकी नहीं है, लेकिन उन्हें जीते रहना पड़ता है.”

सुनवाई वाले दिन, एस सुबह 4 बजे उठती हैं. खाना बनाती हैं, सफाई करती हैं, अपने चार लोगों के परिवार के लिए खाना तैयार करती हैं और फिर सीआरपीएफ एस्कॉर्ट को फोन करती हैं. सुबह के बीच तक, वह कोर्ट जाने के लिए कार में होती हैं, आमतौर पर दो या तीन वकीलों के साथ. सरकार ने उन्हें कार और सुरक्षा दी है.

कोर्ट और घर के बीच

एस साल 2019 में दिल्ली आ गईं थीं. सुरक्षा कारणों से सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में एक घर दिया. उन्नाव के खुले खेतों से दूर, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के घिटोरनी की तंग गलियां उनका नया मोहल्ला बन गईं. उनकी आवाजाही सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवानों की निगरानी में होती है. यह छोटा-सा घर अब उनके दो छोटे बच्चों के कारण व्यस्त रहता है.

दिल्ली आने के बाद से, एस के दो तरह के दिन होते हैं—कोर्ट जाने वाले दिन और बिना कोर्ट वाले दिन.

दिसंबर 2019 में, दिल्ली की एक कोर्ट ने सेंगर को रेप का दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई. इस केस में ताज़ा घटनाक्रम 23 दिसंबर 2025 को हुआ, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक बेंच ने सेंगर की उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगा दी और उसे शर्तों के साथ जमानत दे दी. सज़ा के खिलाफ उसकी अपील कोर्ट में लंबित है. दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश ने सज़ा को अस्थायी रूप से रोका है, लेकिन दोषसिद्धि को खत्म नहीं किया है. कोर्ट ने जमानत पर सख्त शर्तें लगाई हैं.

कोर्ट ने रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में हत्या में भूमिका के लिए सेंगर के भाई को भी 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी.

सुनवाई वाले दिन, एस सुबह 4 बजे उठती हैं. खाना बनाती हैं, सफाई करती हैं, अपने चार लोगों के परिवार के लिए खाना तैयार करती हैं, और फिर सीआरपीएफ एस्कॉर्ट को फोन करती हैं. सुबह के बीच तक, वह कोर्ट जाने के लिए कार में होती हैं, आमतौर पर दो या तीन वकीलों के साथ. सरकार ने उन्हें कार और सुरक्षा दी है.

उनका महीने का कैलेंडर पूरी तरह भरा रहता है. एक तारीख हाई कोर्ट में, फिर साकेत कोर्ट में, फिर सुप्रीम कोर्ट में और फिर सीबीआई कोर्ट में एक मामला. कुछ दिन सुनवाई कुछ ही मिनट चलती है. दूसरे दिनों में, वह घंटों इंतज़ार करती हैं, कोर्ट रूम के बाहर बेंच पर बैठकर और कभी-कभी दिल्ली हाई कोर्ट परिसर के अंदर एक पेड़ के नीचे बैठकर. वह पूरे दिन को गुज़रते हुए देखती रहती हैं.

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान, सेंगर के 10-12 वकील मौजूद थे. वहीं, सर्वाइवर अपने वकील महमूद प्राचा के दो जूनियर साथियों के साथ थीं.

उन्होंने मजबूती से कहा, “पहले यह डराने वाला लगता था. अब यह सिर्फ रोज़मर्रा जैसा लगता है. मैं वहां डरने के लिए नहीं हूं. मैं लड़ने के लिए हूं. मैं यहां से जाने वाली नहीं हूं.”

शाम तक, वह सीधे अपने वकील महमूद प्राचा के पास जाती हैं, जो उन्हें कोर्ट की कानूनी भाषा को आसान तरीके से समझाते हैं.

उन्होंने कहा, “ज्यादातर चीज़ें अंग्रेज़ी में होती हैं. जब वह मुझे समझाते हैं, तब मुझे समझ आता है कि मेरे केस में क्या हो रहा है. मुझे ज्यादा जागरूक महसूस होता है.”

जिन दिनों कोर्ट नहीं होता, घर ही उनका क्लासरूम बन जाता है. साल 2022 में, उन्होंने 89 प्रतिशत अंक के साथ इंटरमीडिएट पूरा किया. एक साल बाद, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में बीए प्रोग्राम कोर्स में एडमिशन लिया. उनके सब्जेक्ट्स में इतिहास, साहित्य, पर्यावरण विज्ञान और अर्थशास्त्र शामिल हैं. जब किताबें मुश्किल लगती हैं, तो वह हिंदी में यूट्यूब ट्यूटोरियल देखती हैं.

उन्होंने हल्की और थकी हुई मुस्कान के साथ कहा, “मुझे यह पढ़ाई 18 साल की उम्र में करनी चाहिए थी. जो हुआ, उसकी वजह से नहीं कर पाई, लेकिन मुझे लगता है कि मैं देर से नहीं हूं. कहीं तो शुरुआत हुई.”

पढ़ाई फिर से शुरू करना आसान नहीं रहा. वह अक्सर अपने सबक भूल जाती हैं. कभी-कभी वह छोटी-छोटी बातें भी भूल जाती हैं, जैसे बच्चों को खाना खिलाया या नहीं, या अपना काम पूरा किया या नहीं.

सरीन ने कहा, “ट्रॉमा से गुज़र चुके लोगों में थकान एक बड़ा कारण होती है. यह सही समय पर सही भावनाएं महसूस करने की क्षमता को प्रभावित करता है. याददाश्त में कमी भी होती है.”

कोर्ट की तारीखों, पढ़ाई और बच्चों की देखभाल के बीच, एस अपने केस से जुड़े व्हाट्सएप मैसेज पढ़ती हैं और रिश्तेदारों को कोर्ट की ताज़ा जानकारी देती हैं.

वे चाहती हैं कि उन्हें कविता, किताबें, कहानियां पढ़ने या अपने पसंदीदा बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म देखने के लिए ज्यादा टाइम मिले.

‘हमें सब याद रहेगा’

हर सुबह, जब एस अखबार उठाती हैं, तो हेडलाइन उन्हें जानी-पहचानी लगती हैं. उनमें छोटे बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के साथ यौन हिंसा की खबरें भरी होती हैं. कई को मार भी दिया जाता है और जो बच जाती हैं, उन्हें सालों तक केस लड़ना पड़ता है, जिसमें न्याय मिलने का कोई संकेत नहीं होता.

उन्होंने कहा, “2017 से अब तक, कुछ भी नहीं बदला है.”

उन्नाव गैंगरेप की सर्वाइवर होना, डर, धमकियों और चुप्पी के साए में जीना है. एस ने डराने-धमकाने, अपनों को खोने और एक लगभग जानलेवा हादसे का सामना किया है.

उन्होंने कहा, इस तरह बच जाना ही उन्हें आज जो वह हैं, वह बनने के लिए मजबूर कर गया.

जब उन्होंने पहली बार टीवी कैमरों का सामना किया, तो वह बहुत डरी हुई थीं. सवालों से, बयान देने से और सच बोलने से.

एस ने कहा, “लेकिन मुझे बोलना पड़ा क्योंकि मेरी इज्जत चली गई थी.” वे तुरंत नीचे देखने लगीं.

एस बार-बार “मेरी इज्जत चली गई” शब्द का इस्तेमाल करती रहीं. उनके आसपास के लोग कहते हैं कि ऐसा नहीं है. “मैं सिर्फ उन्नाव की बेटी नहीं हूं, बल्कि भारत की भी बेटी हूं, लेकिन मुझे ऐसा महसूस नहीं कराया गया.”

उन्होंने कहा कि नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया, महिला वकीलों ने उनके बारे में गलत बातें कही, पुलिस अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की और उन्नाव के लोगों ने उन पर सवाल उठाए, उनसे सबूत मांगे—सेंगर से नहीं.

सर्वाइवर की मां रेप केस से जुड़े कागज़ों से भरे बैग पकड़े हुए | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट
सर्वाइवर की मां रेप केस से जुड़े कागज़ों से भरे बैग पकड़े हुए | फोटो: समृद्धि तिवारी/दिप्रिंट

एक महिला जो पूरी कानूनी लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहीं, वह उनकी 72 साल की मां हैं. हर दूसरे दिन, जब सुनवाई होती है, वे नांगलोई से दिल्ली की अलग-अलग अदालतों में अपनी बेटी के साथ खड़ी होने के लिए जाती हैं. वे कुछ साल पहले सर्वाइवर का साथ देने के लिए दिल्ली आ गई थीं.

मां एक मुड़ी-तुड़ी पॉलिथीन बैग पकड़े रहती हैं, जिसमें आठ साल के कागज़ भरे हैं. इसमें एफआईआर की कॉपी, मेडिकल रिकॉर्ड, कोर्ट रिकॉर्ड और फोटोकॉपी शामिल हैं.

जब टीवी कैमरे सामने आते हैं, तो उनकी मां चुपचाप एक फेस मास्क निकाल लेती हैं.

हर बार जब मां कैमरे के सामने बोलना शुरू करती हैं और कहती हैं, “सेंगर को सज़ा हो,” तो एस अपनी मां को रोकते हुए कहती हैं, “फांसी.”

उन्होंने कहा, “मेरी बेटी अपने पिता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही है.”

परिवार ने अभी तक उनके पिता का अंतिम संस्कार नहीं किया.

मां ने साफ शब्दो में कहा, “हमें न्याय मिलने के बाद ही हम यह करेंगे.”

“जिस तरह वे मेरी बेटी के बारे में बात करते हैं, जैसे-जैसे कमेंट करते हैं, जिस तरह उन्होंने रेप को गलत साबित करने की कोशिश की. हमें यह सब याद रहेगा.”

एस के परिवार में, सभी छोटी लड़कियां उन्हें आदर्श मानती हैं. एस वे बड़ी बहन बन गईं, जो कोर्ट गईं, अपना केस लड़ा और किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हुईं.

उन्होंने कहा, “हम अपने परिवार के लगातार संपर्क में नहीं रहते; यह एक कुर्बानी है जो हमें देनी पड़ी, लेकिन हमारे परिवार की सभी महिलाएं उन पर बहुत गर्व करती हैं.”


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नफरत, ऑनलाइन और ऑफलाइन

यह लड़ाई सिर्फ कोर्टरूम तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे चौंकाने वाले दावे किए जाते हैं जो सर्वाइवर की बात को झूठा साबित करने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी में दखल होता है. एस ने कहा कि ऑनलाइन, उन्हें सर्वाइवर की तरह नहीं माना जाता. हर दिन उनका ट्रायल होता है.

उनके केस को “फर्जी” कहा गया है और यह भी कहा गया कि वह अपने ट्रॉमा की “झूठी कहानी बना रही है.” लोकल पत्रकार और एक्टिविस्ट एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उन्हें बदनाम करते हैं.

फेसबुक पर, सेंगर के समर्थक लगातार पोस्ट करते हैं. हरिओम सिंह चंदेल ने एक पोस्ट में सर्वाइवर को बदनाम करते हुए लिखा, “गजब का शातिर खेल गई.”

मॉर्फ की हुई फोटो भी फैल रही हैं—जिनमें सर्वाइवर का चेहरा साफ दिखता है और वह सीआरपीएफ जवान के कंधे पर हाथ रखे हुए दिखाई देती है.

उन्नाव की वकील नंदिनी दीक्षित ने यह फोटो शेयर करते हुए कैप्शन लिखा, “सीआरपीएप को इससे डरना चाहिए.” कई सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता को “मास्टरमाइंड” कहा गया.

सर्वाइवर और उनके चाचा के बीच फोन कॉल की एक कथित रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर फैलाई गई. इस ऑडियो में चाचा को सर्वाइवर से सेंगर को फंसाने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है.

उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग लोकल मीडिया ने भी खूब शेयर की हैं. उनका चेहरा कई बार दिखाया गया, कैप्शन के साथ—“यह उन्नाव गैंगरेप की पीड़िता है.”

उन्होंने कहा, “मेरे केस को लेकर लगातार सवाल (मीडिया और कोर्ट से) पूछे जाने से मैं अपने ट्रॉमा की बातें भूलने लगी हूं. कभी-कभी मुझे याद नहीं रहता कि मैंने मीडिया से क्या कहा था.”

उन्नाव और दिल्ली के वकीलों ने इस केस पर वीडियो पोस्ट किए हैं, जिसमें उनके हर बयान का “विश्लेषण” किया गया है. फेसबुक पेज जैसे Humara Kuldeep Nirdosh Hai ने उनकी, उसकी मां और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की फोटो शेयर की हैं. इन अकाउंट्स ने उन्हें “नकली रेप पीड़िता” बताया, जो “मीडिया, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को गुमराह करती है.” फेसबुक पर एक कमेंट में लिखा था, “यह हिंदुस्तान के अंधा कानून का नतीजा है.”

लोकल पत्रकारों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में सर्वाइवर की फोटो लगातार शेयर की जाती हैं. ग्रुप के सदस्य उन्हें शर्मिंदा करते हैं और दोष देते हैं. इस ग्रुप में कई पोस्ट एक ही बात पर खत्म होती हैं: ‘लेकिन, वही उन लोगों के साथ बाहर गई थी.’

एस का एंड्रॉयड फोन उनकी कहानी बताता है.

उन्होंने अपना मोबाइल फोन पकड़ते हुए कहा, “मेरी जान बसती है इसमें.” उन्होंने गाली-गलौज, कमेंट और पोस्ट के 200 से ज्यादा स्क्रीनशॉट सेव कर रखे हैं. वह कुछ भी डिलीट नहीं करतीं. यह उनकी रोज की बेइज्जती का एक डिजिटल रिकॉर्ड बन गया है.

इस बीच, उन्नाव में लोगों ने सेंगर के लिए “हवन” और “सार्वजनिक प्रार्थना” का आयोजन किया.

रोते हुए एस ने कहा, “मेरा रेप लोगों के लिए कंटेंट बन गया है.”

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद, जिसमें सेंगर को सशर्त जमानत दी गई, सर्वाइवर ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर उतरने का फैसला किया, जहां 2012 के निर्भया गैंगरेप केस में समर्थन में प्रदर्शन हुए थे.

दिसंबर में, सर्वाइवर, उनकी मां, एक्टिविस्ट योगिता भयाना और कुछ अन्य एक्टिविस्ट अपने वकील महमूद प्राचा के ऑफिस से A4 साइज के पेपर और काले मार्कर लेकर, शाम को इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने पहुंच गए. उन्होंने नारे लिखे और इंडिया गेट के लॉन में बैठ गए.

योगिता ने कहा, “हम वहां सिर्फ बैठे क्योंकि हमें अपनी आवाज़ सुनानी थी. वकील ने केस अच्छी तरह से नहीं लड़ा. वह बहुत कैजुअल थे. हम सिर्फ प्रदर्शन ही कर सकते थे.”

योगिता पहली बार 2018 में सर्वाइवर से मिली थीं, जब अपराध के बाद एस को एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

योगिता ने कहा, “मैं उनसे मिलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था. मैं कई बार उनकी खबर लेती रही. आखिरकार, 2022 में उन्होंने एक अनजान नंबर से मुझसे संपर्क किया और कहा कि उन्हें आर्थिक मदद की ज़रूरत है, क्योंकि वह गर्भवती थीं और केस चल रहा था. फिर हमने मदद की.”

योगिता के लिए, एस किसी दूसरी पीड़िता जैसी नहीं थी.

उन्होंने कहा, “वह मजबूत हैं. अच्छी तरह बोलती हैं. ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगती हैं. एस ऐसे परिवार से आती हैं जिसने नेतागिरी को करीब से देखा है. मैंने रेप का ट्रॉमा उतना नहीं देखा, लेकिन सड़क हादसे ने उन्हें बहुत हिला दिया था.”

केस रिकॉर्ड के अनुसार, 2019 में एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी थी, जिसमें रेप सर्वाइवर, उनका वकील और उनके परिवार के दो लोग यात्रा कर रहे थे. इस हादसे में उनके परिवार के दोनों लोगों की मौत हो गई, जबकि महिला और उनका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए.

23 दिसंबर को, जिस दिन दिल्ली हाई कोर्ट से सेंगर को रेप केस में जमानत मिली, एस ने योगिता को मिलने के लिए फोन किया.

योगिता ने कहा, “उन्होंने मुझे गले लगाया और रोने लगी. पहली बार मैंने एस को टूटते हुए देखा.”

2017 से पहले एस की ज़िंदगी बहुत अलग थी. उस घटना से पहले, जब उन्हें खुद पुलिस शिकायत लिखनी पड़ी.

एस छोटी उम्र से अपने चाचा के साथ रायबरेली में रहती थीं. 2013 में वह उन्नाव आ गईं.

एस ने कहा, “यह नया शहर था. मैं अपनी नई ज़िंदगी के लिए उत्साहित थी. मैं स्कूल नहीं जा पाई, लेकिन मैं जाना चाहती थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि सिर्फ चार साल में, उसी शहर में जहां मैं नई ज़िंदगी शुरू करना चाहती थी, मेरी पूरी ज़िंदगी बदल जाएगी.”

अब उनकी ज़िंदगी का अगला अध्याय दिल्ली में लिखा जा रहा है और वे पहले से ज्यादा मजबूत इरादे के साथ खड़ी हैं.

उन्होंने कहा, “मैं गायब होने से इनकार करती हूं. मैं पीछे हटने से इनकार करती हूं.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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