शाहजहांपुर: उन्नीस वर्षीय S और इक्कीस वर्षीय विशाल अपने शहर से 40 किलोमीटर दूर आउटिंग पर गए थे. शाहजहांपुर के बरेली मोड़ स्थित ‘पिज़्ज़ा 99’ नाम के रेस्तरां में गरम नूडल्स की प्लेटों के बीच S ने फरवरी में होने वाली एसएससी परीक्षा की फिजिकल टेस्ट में शामिल होने के अपने प्लान के बारे में बताया.
उनकी दोपहर की यह आउटिंग उस वक्त एक डरावने पल में बदल गई, जब 8–10 लोगों का एक ग्रुप, जो कथित तौर पर एक हिंदुत्व संगठन से जुड़ा था, रेस्तरां में जबरन घुस आया और उनसे उनके धर्म के बारे में पूछताछ करने लगा. उन्हें शक था कि यह कपल हिंदू और मुसलमान हो सकता है. लेकिन जब एस और विशाल ने कहा कि वे दोनों हिंदू हैं, तो उन लोगों ने उनकी जाति पूछनी शुरू कर दी. उन्होंने मोबाइल फोन के कैमरे ऑन कर लिए और धमकी दी कि उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर देंगे. ग्रुप के कुछ लोग उनसे पहचान पत्र दिखाने की मांग करने लगे, जबकि कुछ ने उनके साथ गाली-गलोच और मारपीट शुरू कर दी.
रेस्तरां से बाहर निकलने का कोई रास्ता न देखकर S ने दूसरी मंज़िल की खिड़की से छलांग लगा दी. जिसके बाद विशाल ने भी उसके पीछे छलांग लगा दी.

यह घटना 24 जनवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे हुई. आज दोनों अस्पताल में हैं—विशाल की पीठ में गंभीर चोट है, जबकि S की टांग में फ्रैक्चर हुआ है. विशाल अनुसूचित जाति समुदाय से है और S ब्राह्मण है.
“पिछले 24 घंटों में जितनी बार हमने एक-दूसरे की जाति के बारे में बात की है, उतनी शायद कभी नहीं की,’ S ने कहा. “हर कोई हमारी जाति की ही बात कर रहा है. भीड़ ने हमसे जाति पूछी, मीडिया हमसे जाति पूछ रहा है, यहां तक कि आसपास के मरीज भी दवाइयों के बजाय हमारी जाति पर चर्चा कर रहे हैं.”
यह उत्तर प्रदेश या शाहजहांपुर ज़िले में ऐसी पहली घटना नहीं है. पूरे प्रदेश में तेजी से फैलते स्वयंभू हिंदू विजिलांटे समूहों ने युवाओं के बीच डर का माहौल बना दिया है. विश्वविद्यालयों के बाहर छात्रों को रोका जाता है और पार्कों-रेस्तरां में बैठे कपल्स से पूछताछ की जाती है. निगरानी, वीडियो बनाने और सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किए जाने के डर के बीच ही उनकी सामाजिक गतिविधियां होती हैं, क्योंकि वे तथाकथित ‘मोरल पुलिस’ की ताक में लगी नज़रों से बचने की कोशिश करते रहते हैं.
पुलिस के मुताबिक इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है.
“यह इस तरह की पहली घटना है जो हमारे संज्ञान में आई है, और मामले की गहन जांच की जा रही है,” शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने कहा.
हालांकि पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि बाकी आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन S को ज़्यादा उम्मीद नहीं है.
“मुझे पता है सिस्टम कैसे काम करता है—जब तक ऐसी कोई और घटना सामने नहीं आती, सब कुछ फिर से सामान्य हो जाएगा,” उन्होने कहा.
फुसफुसाहट से घिरा एक अस्पताल
सिंह नर्सिंग होम, शाहजहांंपुर के आमतौर पर शांत गलियारे—जो कभी परेशान रिश्तेदारों और मरीजों की हलचल से भरे रहते थे, जो एक वार्ड से दूसरे वार्ड में दवाइयों और मेडिकल रिपोर्ट्स लेकर जाते थे—अब एक युवा कपल, जाति, वर्ग और धर्म की बातें सुनाई देती हैं. अस्पताल के परिसर में लगे छोटे चाय वाले ठेले पर, अब लोग दो नामों के आसपास की चर्चा सुनने की संभावना ज्यादा होती है.
“लड़की तो सिर्फ उन्नीस साल की है, वह किसी लड़के के साथ कैसे बाहर जा सकती है?” एक ने फुसफुसाते हुए कहा. “ज़रूर पुलिस की मिलीभगत होगी, तभी तो रेस्तरां चल रहा था. इसमें नया क्या है, ऐसी चीज़ें तो रोज़ होती हैं. कुछ दिनों में अपराधी खुलेआम घूमते दिखेंगे.”
इन्हीं तानों और फैसलों के घेरे में फंसे हैं एस और विशाल—जो कुछ समय पहले अपने भविष्य की योजनाएं बना रहे थे और अब इस चिंता में डूबे हैं कि लोग उनके बारे में क्या-क्या कह रहे होंगे.
“अस्पताल में लोगों को अपनी ज़िंदगी और दवाइयों की बात करनी चाहिए. लेकिन हर फुसफुसाहट में अब मेरा ही नाम है. मैं गॉसिप का हिस्सा बन गई हूं और एसएससी की परीक्षा पास करने का अपना सपना खो चुकी हूं,” S ने कहा.
रेस्तरां के अंदर मौजूद लोगों द्वारा बनाया गया मारपीट का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, S के परिवार ने उससे संपर्क तोड़ लिया.
“कुछ तथाकथित संस्कृति और धर्म के ठेकेदारों की वजह से मैंने अपना परिवार खो दिया,” उसने कहा. उसने यह भी बताया कि उनके पिता दिल के मरीज़ हैं और इस घटना के बाद उनकी हालत को लेकर खतरा बढ़ गया है.
“मैं मानती थी कि हम सब हिंदू हैं और सनातन हमारा धर्म है. लेकिन एक लोकतांत्रिक देश में जाति के नाम पर हिंदुओं का हिंदुओं पर हमला करना ही मेरा भविष्य छीन ले गया,” S ने आगे कहा.
हिंदू, जाति और भविष्य
अस्पताल के बिस्तर पर लेटी एस बार-बार अपनी घायल टांग को देखती रहती है, जिसे वह हिला भी नहीं सकती. वॉशरूम जाने के लिए भी उन्हें मदद की ज़रूरत पड़ती है. पास वाले बेड पर लेटे विशाल दर्द से राहत पाने के लिए गरम पानी की थैली को अपनी पीठ और छाती के बीच घुमाते रहते हैं.
“मेरे इलाज का खर्च कौन उठाएगा, और जो सपना मैंने इस सब में खो दिया—उनका जवाब कौन देगा?’ एस ने पूछा. खिड़की की ओर देखते हुए उन्होने फिर विशाल की तरफ नज़र डाली. जहां एक रिपोर्टर के बयान मांगने के लिए किए गए एक और फोन कॉल को विशाल ने नज़रअंदाज़ कर दिया.
जहां उनकी मां दिन में दो बार उससे मिलने आती हैं, वहीं एस के परिवार ने उनसे या मीडिया से बात करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है. एस को सिर्फ अपने करियर की ही चिंता नहीं है, बल्कि इस बात की भी फिक्र है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह कहां जाएगी.

“अगर कल विशाल के साथ हालात बदल गए, तो घायल टांग के साथ मुझसे कौन शादी करेगा?”, S ने पूछा. “मुझे यह भी नहीं पता कि मैं फिर से ठीक से कब चल पाऊंगी, या कोई नौकरी कैसे कर पाऊंगी.”
विशाल ने बताया कि उनके परिवार को उनके रिश्ते के बारे में पहले से पता था और उन्होंने कभी सवाल नहीं उठाया. “लेकिन बाहर के लोगों ने हमारे बारे में कुछ भी जाने बिना हम पर हमला कर दिया,” उस ने कहा.
इतनी सब मुश्किलों के बावजूद, दोनों का कहना है कि अब वे अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे और उन्होंने एक-दूसरे से शादी करने का वादा किया है—चाहे आगे जो भी हो.

रेस्तरां और उससे जुड़ी बातें
तीस वर्षीय सोन पाल बैंक ऑफ इंडिया की इमारत के बगल में एक जनरल स्टोर चलाते हैं, जिसकी दूसरी मंज़िल पर वह रेस्तरां था—बिना किसी साइनबोर्ड या नाम के. वह एक सामान्य दोपहर थी, जब अचानक चीख-पुकार सुनाई दी और भीड़ जमा हो गई. थोड़ी ही देर में एक एंबुलेंस पहुंची, उसके बाद पुलिस की गाड़ियां भी आ गईं.
तब से पाल की दुकान के सामने का खुला स्थान जिज्ञासु स्थानीय लोगों, मीडिया कर्मियों और पुलिस की आवाजाही का अड्डा बन गया है.

पाल और आसपास के सब्ज़ी विक्रेताओं के मुताबिक, उस रेस्तरां में ज़्यादातर कपल्स आया करते थे और वहां कमरे घंटे के हिसाब से बुक किए जाते थे.
“ऐसी घटनाएं पहली बार नहीं हुई थीं जब ये समूह रेस्तरां में घुसकर लोगों को परेशान करते,” पाल ने कहा. “वे कपल्स को निशाना बनाते थे क्योंकि उन्हें पता था यह किस तरह की जगह है.”
45 वर्षीय अमर कुमार ने पूरे मामले को लेरक पुलिस पर भी सवाल उठाए.
“पुलिस को भी पता था कि अंदर क्या हो रहा है. अब यह रेस्तरां कुछ समय के लिए बंद हो जाएगा और फिर हालात शांत होने पर फिर से खुल जाएगा,” कुमार ने कहा.
कांत थाने के वरिष्ठ अधिकारियों ने रेस्तरां के खिलाफ कोई शिकायत मिलने से इनकार किया.
मोरल पुलिसिंग, सामान्य होती जा रही
शाहजहांपुर हमला एक बढ़ते हुए पैटर्न का हिस्सा है. अब मोरल पुलिसिंग सार्वजनिक और निजी जगहों पर आम हो गई है, और आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई बहुत कम ही होती है, भले ही वीडियो सबूत मौजूद हों.
फरवरी 2025 में कई वीडियो वायरल हुए जिसमें कुछ पुरुष खुद को बजरंग दल का सदस्य बताते हुए पार्कों में कपल्स को परेशान करते दिखे. अक्टूबर में, बिहार के कटिहार जिले का एक और वीडियो सामने आया जिसमें पुलिस अधिकारी रेस्तरां में एक भाई और बहन से पूछताछ करते दिखे. एक और क्लिप में महिला पुलिस इंस्पेक्टर को पार्क में युवाओं से उनके माता-पिता को फोन कराने और बिना बड़े के बाहर होने पर फटकार लगाने के लिए देखा गया.
दिसंबर में, करीब 25 हिंदू पुरुषों का एक समूह, जिन्होंने खुद को बजरंग दल का सदस्य बताया, बरेली के एक कैफे में निजी जन्मदिन की पार्टी पर टूट पड़ा. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में उन्हें समूह पर हमला करते और दो मुस्लिम छात्रों की मौजूदगी पर आपत्ति जताते हुए “लव जिहाद” के नारे लगाते देखा गया. सोशल मीडिया पर व्यापक नाराज़गी के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.
इस महीने की शुरुआत में, शाहजहांपुर में एक अंतर-धार्मिक कपल की वलिमा (रिसेप्शन) स्थानीय हिंदू समूहों के विरोध के कारण बाधित हो गई, जिन्होंने धार्मिक धर्मांतरण का आरोप लगाया. तनाव बढ़ने के बाद परिवार ने अंततः यह आयोजन रद्द कर दिया.
“ये तथाकथित धर्म और संस्कृति के रक्षक बड़ी संख्या में उभर रहे हैं, और समाज में अपराध बढ़ रहा है. कोई नहीं जानता ये कहां से आते हैं और कहां जाते हैं,” कृष्णा राज, पूर्व राज्य मंत्री, कृषि और किसान कल्याण ने कहा. “ये किसकी रक्षा कर रहे हैं, और किससे?”
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्य राजेश अवस्थी, जिन्होंने रिसेप्शन को बाधित किया, ने दावा किया कि समूह ने शिकायत पर कार्रवाई की थी और एस और विशाल पर हुए हमले से उनका कोई संबंध नहीं है.
“हम कभी किसी को परेशान करने के लिए नहीं जाते. अगर हमें धर्मांतरण की जानकारी मिलती है, तो हम इसे पुलिस को रिपोर्ट करते हैं और उनके साथ मौके पर जाते हैं,” अवस्थी ने कहा.

‘जिंदगी अब कभी पहले जैसी नहीं रहेगी’
सिंह नर्सिंग होम में, विशाल न्याय के साथ-साथ अपनी और S की बचे रहने की चिंता भी करते है. वह पहले एक फल की दुकान चलाता था, लेकिन अब उसने अपने और S के इलाज पर अपनी अधिकांश बचत खर्च कर दी है.
“मैंने इलाज पर 70,000 रुपये से अधिक खर्च किए हैं. हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिली,” विशाल ने कहा.
जब यह कपल विजिटर्स से बात करता है, तो मरीजों, परिचारकों और यहां तक कि अस्पताल के स्टाफ की नज़रे उन पर टिक जाती हैं. बाहर, चाय की दुकानों पर उनकी बचे रहने की कहानी पर नहीं, बल्कि S के चरित्र पर गॉसिप होती है.
“कोई भी सभ्य लड़की ऐसे स्थान पर किसी लड़के के साथ नहीं जाती,” कोई कहता है और बाकी लोग सिर हिलाते हैं. कुछ फुसफुसाते हैं कि उसने अपने परिवार की इज्जत खराब कर दी, “इसी वजह से कोई उससे मिलने नहीं आया.”
“मेरी जिंदगी अब कभी पहले जैसी नहीं रहेगी,” S ने कहा. “लोग हमेशा मुझे जज करेंगे. अगर मैं मंदिर भी जाऊंगी, लोग मुझे सवाल भरी निगाहों से देखेंगे और सोचेंगे कि अब भी शायद किसी लड़के से ही मिलने जा रही हूं.”
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