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Friday, 3 July, 2026
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ब्यूटी पार्लर, जिम और क्लिनिक की शिकायतों से परेशान NCR की RWAs

रिहायशी सोसाइटियों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण RWAs लगातार विवादों और शिकायतों में फंस रही हैं. सवाल यह है कि ऐसे कारोबार चलने दिए जाएं या बंद कराए जाएं?

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80-वर्षीय रिटायर्ड कर्नल सुरिंदर पाल सैनी के लिए अब अपने ही मोहल्ले में सुबह की सैर करना ट्रैफिक, शोर और अनजान लोगों के बीच से गुज़रने जैसा हो गया है. इसकी वजह रिहायशी इलाके में तेज़ी से बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियां हैं. गुरुग्राम के सनसिटी सेक्टर-54 में अपने ग्राउंड फ्लोर वाले घर में कई दशक बिताने के बाद सैनी कहते हैं कि जिस सोसाइटी को वह पहले जानते थे, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है.

पिछले साल उनके घर के बगल में एक जिम खुल गया, जहां तेज़ आवाज़ में संगीत बजता है. वहीं, जिन सड़कों पर पहले सिर्फ सोसाइटी के लोग चलते थे, अब वहां पास के पीजी (पेइंग गेस्ट) में रहने वाले लोगों की कारों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों की भीड़ लगी रहती है.

सैनी ने कहा, “आप जैसे ही घर से बाहर निकलते हैं, पूरे दिन सोसाइटी में नए वाहन और नए लोग आते-जाते दिखाई देते हैं. मेरे घर के बगल में जिम है, सामने एक होम ऑफिस है और पास में पीजी हैं. मैं ठीक से टहल भी नहीं पाता, क्योंकि गाड़ियों की तेज आवाजाही पूरे समय बनी रहती है.”

बढ़ती परेशानी के बीच कई निवासी मदद के लिए अपनी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पास पहुंच रहे हैं.

इनकी शिकायतें RWA के पदाधिकारियों तक पहुंचती हैं, लेकिन वे खुद ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं, जहां उनके पास समस्या का समाधान करने के लिए बहुत कम अधिकार होते हैं. सीमित अधिकार होने के कारण RWAs या तो दोनों पक्षों की बैठक कराकर विवाद सुलझाने की कोशिश करती हैं या फिर शिकायत संबंधित सरकारी विभागों को भेज देती हैं.

सनसिटी RWA के संयुक्त सचिव चित्रेश दत्ता ने कहा, “हमें इन व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर लगभग हर दूसरे दिन फोन, मैसेज और शिकायतें मिलती हैं, लेकिन इन्हें रोकने का अधिकार हमारे पास नहीं है. जैसे-जैसे ऐसे कारोबार बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे शिकायतें और उन्हें सुलझाने में हमारी मुश्किलें भी बढ़ रही हैं.”

आमतौर पर RWAs राज्य के कानूनों के तहत सोसाइटी, एसोसिएशन या गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत होती हैं. उनके अधिकार सिर्फ सोसाइटी की साझा सुविधाओं का प्रबंधन करने, सोसाइटी के नियम लागू कराने और निवासियों की समस्याएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने तक सीमित होते हैं.

किसी विकास परियोजना, जमीन के उपयोग, निर्माण कार्य या सरकार से मंजूर परियोजनाओं को मंजूरी देना, रोकना, नियंत्रित करना या उन पर कानूनी आदेश जारी करना RWAs के अधिकार में नहीं आता. वे सिर्फ लोगों की शिकायतें सरकार तक पहुंचा सकती हैं, आपत्ति दर्ज करा सकती हैं और कार्रवाई की मांग कर सकती हैं. लेकिन खुद किसी निर्माण या कारोबार को कानूनी रूप से बंद नहीं करा सकतीं.

गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड स्थित सनसिटी सोसाइटी | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट
गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड स्थित सनसिटी सोसाइटी | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट

किसी फ्लैट से चल रहा छोटा क्लिनिक, जिम, ब्यूटी पार्लर या ऑनलाइन कारोबार अक्सर रिहायशी सोसाइटियों में विवाद की वजह बन जाता है. सबसे ज्यादा शिकायतें पीजी (पेइंग गेस्ट), जिम, होम किचन, प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस, होम क्लिनिक और फूड डिलीवरी सेवाओं को लेकर आती हैं, जो रिहायशी परिसरों के भीतर चल रही हैं.

इन कारोबारों की वजह से बाहरी लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है, जिससे भीड़ बढ़ती है, ट्रैफिक की समस्या होती है और सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा होती है. कई निवासी पहले RWA के पास शिकायत करते हैं, जबकि कुछ लोग सीधे नगर निगम, सीएम विंडो और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में शिकायत देकर रिहायशी सोसाइटियों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं. जैसे-जैसे रिहायशी प्लॉटों का इस्तेमाल पीजी, ऑफिस और दूसरे व्यावसायिक कामों के लिए बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आबादी का घनत्व भी बढ़ रहा है.

RWAs और स्थानीय निवासियों का कहना है कि इससे पानी की सप्लाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

गुरुग्राम के जिला नगर योजनाकार कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, “बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई लगातार चल रही है. लेकिन कई बार सील होने के बाद भी कुछ लोग उसी जगह नया सेटअप बनाकर फिर से कारोबार शुरू कर देते हैं. ऐसे मामलों का पता लगाने और कार्रवाई करने में समय लगता है.”

RWAs की बढ़ती परेशानी

जब योगिता मिश्रा ने पिछले साल गुरुग्राम की वैली व्यू एस्टेट सोसाइटी में सचिव का पद संभाला, तो उन्हें लगा था कि उनका काम नोटिस जारी करना, बैठकें करवाना और रोजमर्रा की रखरखाव संबंधी समस्याओं को देखना होगा, लेकिन अब उनका काफी समय रिहायशी घरों से चल रहे छोटे-छोटे कारोबारों की शिकायतें निपटाने में बीतता है.

पिछले एक साल में मिश्रा ने देखा है कि घर से चलने वाली बेकरी, क्लाउड किचन और खाने-पीने से जुड़े दूसरे कारोबार लगातार बढ़े हैं. इन कारोबारों के साथ पूरे दिन डिलीवरी एजेंटों का सोसाइटी में आना-जाना भी बढ़ गया है. वे ऑर्डर लेने और पहुंचाने के लिए लगातार आते रहते हैं.

मिश्रा के फोन पर अक्सर निवासियों के मैसेज और कॉल आते रहते हैं. लोग शिकायत करते हैं कि डिलीवरी एजेंट कॉमन एरिया में खड़े रहते हैं, गंदगी फैलाते हैं या शोर-शराबा करते हैं. कुछ लोग यह भी शिकायत करते हैं कि घरों के अंदर व्यावसायिक इस्तेमाल वाले बड़े उपकरण (कमर्शियल इक्विपमेंट) चलाए जा रहे हैं, जिससे पड़ोसियों को परेशानी होती है और सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है.

हाल ही की एक शाम ऐसी ही एक शिकायत मिश्रा के पास पहुंची.

एक निवासी ने शिकायत की कि सोसाइटी में घर से चल रही एक बेकरी से ऑर्डर लेने आने वाले डिलीवरी एजेंट लिफ्ट के अंदर फोन स्पीकर पर चलाते हैं, जिससे दूसरे लोगों को परेशानी होती है. छोटी-सी शिकायत धीरे-धीरे पड़ोसियों के बीच तीखी बहस में बदल गई.

80 साल के रिटायर्ड कर्नल सुरिंदर पाल सैनी के लिए अब अपने ही इलाके में सुबह की सैर ट्रैफिक, शोर और अनजान लोगों के बीच से गुजरने जैसी हो गई है | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट
80 साल के रिटायर्ड कर्नल सुरिंदर पाल सैनी के लिए अब अपने ही इलाके में सुबह की सैर ट्रैफिक, शोर और अनजान लोगों के बीच से गुजरने जैसी हो गई है | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट

आखिरकार यह मामला RWA के पास पहुंचा. RWA ने सभी पक्षों की बैठक बुलाकर विवाद सुलझाने की कोशिश की.

मिश्रा ने कहा, “हमने घर से बेकरी चलाने वाले निवासी से बात की और उनसे अनुरोध किया कि डिलीवरी एजेंट कॉमन एरिया में स्पीकर ऑन करके फोन का इस्तेमाल न करें. हमने शिकायत करने वाले निवासी को भी भरोसा दिलाया कि आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे.”

मिश्रा के मुताबिक, घर से चलने वाले कारोबारों से जुड़े ज्यादातर विवाद एक फोन कॉल या छोटी-सी बैठक में सुलझ जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में समस्या तब बढ़ जाती है, जब कोई भी पक्ष समझौता करने को तैयार नहीं होता. उन्होंने कहा, “कई बार हमें दूसरों की तरफ से माफी मांगनी पड़ती है और लोगों को ऐसी बातों पर समझाना पड़ता है, जिनमें हमारी कोई गलती नहीं होती. लेकिन ऐसी शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है.”

शिकायतें बढ़ने के बाद RWA ने सोसाइटी स्तर पर कुछ नियम बनाना शुरू किया, ताकि निवासियों और कारोबार करने वालों के बीच संतुलन बना रहे. इन नियमों में बाहरी लोगों के आने-जाने पर नियंत्रण, डिलीवरी के तय समय और लिफ्ट जैसी साझा सुविधाओं के इस्तेमाल के नियम शामिल हैं. कुछ मामलों में समाधान निकालने के लिए RWA को कई बैठकें करनी पड़ीं.

मिश्रा ने एक मामले का जिक्र किया, जिसमें एक निवासी अपने घर के अंदर बड़ा कमर्शियल ओवन इस्तेमाल कर रहा था.

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ दो पड़ोसियों के बीच शोर या असुविधा का मामला नहीं था. हमें लगा कि यह सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. इसलिए हमने हस्तक्षेप किया और उस निवासी से अनुरोध किया कि वह होटल और बड़े संस्थानों में इस्तेमाल होने वाला कमर्शियल ओवन घर में इस्तेमाल न करे.”

साथ ही मिश्रा ने यह भी कहा कि RWA घर से छोटे कारोबार चलाने का विरोध नहीं करती. उन्होंने कहा, “हम लोगों को अपने घर से क्लाउड किचन, बेकरी या ट्यूशन सेंटर जैसे छोटे कारोबार चलाने से नहीं रोकते, खासकर तब जब उनसे कोई बड़ी परेशानी नहीं होती. ये सेवाएं कई निवासियों के लिए उपयोगी हैं और कई परिवारों की आय का महत्वपूर्ण जरिया भी हैं. हमारी कोशिश सिर्फ ऐसा बीच का रास्ता निकालने की होती है, जिससे सभी का काम चलता रहे.”

घर के पास चलते कारोबार और बढ़ती शिकायतें

दूसरे कई निवासियों की तरह सुरिंदर पाल सैनी भी सोसाइटी के अंदर बढ़ते कारोबारों को लेकर कई बार रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से शिकायत कर चुके हैं. निवासी बार-बार सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में भीड़भाड़ वाले एंट्री गेट, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याओं की शिकायत करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि RWA का जवाब अक्सर यही होता है कि उसके पास कार्रवाई करने के लिए बहुत कम अधिकार हैं.

निवासी विश्वा सिंह के लिए अब कार्रवाई का इंतजार करना संभव नहीं था.

व्हाट्सऐप ग्रुप में बार-बार शिकायत लिखने के बजाय उन्होंने अलग-अलग सरकारी विभागों में औपचारिक शिकायतें देना शुरू कर दिया.

उनकी शिकायतों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण, सील की गई संपत्तियों का दोबारा खुलना और रिहायशी मकानों को पीजी, ऑफिस, जिम और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदलने जैसे मुद्दे शामिल थे. सिंह ने कहा, “मैं पिछले दो साल से अलग-अलग विभागों के सामने ये मुद्दे उठा रहा हूं, लेकिन बहुत कम कार्रवाई हुई है. कई बार अधिकारी जांच करने आते भी हैं, फिर भी लोगों को लगता है कि कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि किसकी पहुंच और पहचान ज्यादा है. सरकारी कार्रवाई हो या RWA की, दोनों ही कई बार चुनिंदा मामलों में होती दिखाई देती हैं.”

हाल के महीनों में गुरुग्राम नगर निगम (MCG) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) ने पूरे शहर में अवैध अतिक्रमण और रिहायशी संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर दी है. डीएलएफ फेज-3 में हुई एक बड़ी कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने एक रिहायशी इमारत में चल रहे बड़े अवैध पीजी को तोड़ दिया.

यह कार्रवाई रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा थी.

यह तोड़फोड़ डीएलएफ रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से करीब दो साल पहले दायर की गई एक रिट याचिका के बाद हुई. इसी याचिका के आधार पर अदालत ने पूरे इलाके की संपत्तियों का सर्वे कराने का आदेश दिया था. डीएलएफ फेज-1 RWA के अध्यक्ष राहुल चंडोला ने कहा, “हम स्वयंसेवक हैं, कार्रवाई करने वाली एजेंसी नहीं. जब भी निवासी हमारे पास शिकायत लेकर आते हैं, हम अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव मदद करते हैं. लेकिन कई बार लोग यह मान लेते हैं कि इलाके में होने वाली अवैध गतिविधियों के लिए RWA ही जिम्मेदार है या उसका उनसे कोई संबंध है.”

अधिकारियों के मुताबिक एक और आम गड़बड़ी स्टिल्ट+4 इमारतों में देखने को मिलती है. इन इमारतों को सिर्फ चार परिवारों के रहने की अनुमति होती है, लेकिन आरोप है कि कई मालिक इन्हें ज्यादा लोगों को किराये पर देने के लिए छोटे-छोटे कमरों या कई किराये की यूनिटों में बदल देते हैं.

DTCP के एक अधिकारी ने कहा, “अनुमति रिहायशी इस्तेमाल की दी जाती है, लेकिन बाद में कई मालिक सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के उपयोग (लैंड यूज) को बदले बिना ही इन जगहों को छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बदल देते हैं. ऐसे मामलों का पता लगाने और कार्रवाई करने के लिए हम अब ज्यादा मौके पर जाकर जांच कर रहे हैं.”

बीच का रास्ता निकालना

65-वर्षीय अजय जैन, जो डीएलएफ सिटी फेज-5 की वेलिंगटन एस्टेट सोसाइटी में रहते हैं, कई वर्षों तक वहां की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं. इन वर्षों में उन्होंने सीखा है कि घर से चलने वाले कारोबारों से जुड़े विवादों का समाधान उन्हें बंद कराने में नहीं, बल्कि ऐसा बीच का रास्ता निकालने में है जिससे सभी का काम चल सके.

जैन का मानना है कि हर घर से चल रहे कारोबार को समस्या नहीं माना जाना चाहिए.

उनके मुताबिक RWAs का काम निवासियों की जरूरतों और उनकी परेशानियों के बीच संतुलन बनाना है. जैन ने कहा, “हम सोसाइटी के अंदर लोगों को अपने ब्यूटी पार्लर, ट्यूशन सेंटर या दूसरे कारोबार के बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं देते. सिर्फ क्लिनिक को इसमें छूट दी जाती है. हम कारोबार करने वालों से यह भी कहते हैं कि वे अपना काम सीमित रखें और बाहर से आने वाले लोगों की संख्या कम रखें, ताकि भीड़ और शोर न बढ़े.”

65-वर्षीय अजय जैन, जो डीएलएफ सिटी फेज-5 की वेलिंगटन एस्टेट में रहते हैं, कई वर्षों तक वहां की RWA के अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं. उनका मानना है कि घर से चलने वाले कारोबारों से जुड़े विवादों का समाधान उन्हें बंद कराने में नहीं, बल्कि सभी के लिए संतुलित रास्ता निकालने में है | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट
65-वर्षीय अजय जैन, जो डीएलएफ सिटी फेज-5 की वेलिंगटन एस्टेट में रहते हैं, कई वर्षों तक वहां की RWA के अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं. उनका मानना है कि घर से चलने वाले कारोबारों से जुड़े विवादों का समाधान उन्हें बंद कराने में नहीं, बल्कि सभी के लिए संतुलित रास्ता निकालने में है | फोटो: अलमिना खातून/दिप्रिंट

जैन और कई दूसरे RWA सदस्यों का मानना है कि किराना दुकान, क्लिनिक और होम ट्यूशन सेंटर जैसी कुछ सेवाएं रिहायशी इलाकों के लिए जरूरी सुविधाएं हैं. अगर सही नियमों का पालन किया जाए, तो ये बिना किसी परेशानी के चल सकती हैं.

जैन ने कहा, “जरा सोचिए, अगर पास में किराने की दुकान न हो और दूध या ब्रेड लेने के लिए हर बार बाहर जाना पड़े. इसी तरह घर के पास डॉक्टर होना भी हमेशा फायदेमंद रहता है, खासकर बुजुर्गों के लिए.”

उनके अनुसार सबसे जरूरी बात यह है कि सोसाइटी के अंदर क्या हो रहा है, इस पर नजर रखी जाए और तभी हस्तक्षेप किया जाए, जब कोई गतिविधि दूसरे निवासियों को परेशान करने लगे.

ऐसा ही एक मामला याद करते हुए जैन ने बताया कि सोसाइटी में एक घर से डांस क्लास और दूसरे घर से ब्यूटी पार्लर चल रहा था.

उन्होंने कहा, “एक निवासी डांस क्लास चलाते थे और दूसरे के घर में ब्यूटी पार्लर था. लोगों को सबसे ज्यादा शिकायत डांस क्लास से थी, क्योंकि वहां शोर होता था और बाहर से काफी लोग आते थे. जबकि ब्यूटी पार्लर का इस्तेमाल ज्यादातर सोसाइटी में रहने वाली महिलाएं ही करती थीं.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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