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Wednesday, 25 March, 2026
होमफीचरखुरपेंच ने UPSC का ऑनलाइन पहरेदार बनने तक का सफर कैसे तय किया

खुरपेंच ने UPSC का ऑनलाइन पहरेदार बनने तक का सफर कैसे तय किया

उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों द्वारा गुमनाम रूप से चलाए जा रहे इस लोकप्रिय X अकाउंट पर, UPSC उम्मीदवारों और सिविल सेवकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर उनके बड़े-बड़े दावों की भी बारीकी से पड़ताल की जाती है.

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नई दिल्ली: अब जब भी UPSC के नतीजे आते हैं, एक गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट अपनी अलग जांच शुरू कर देता है. ‘खुरपेंच’ नाम का यह लोकप्रिय X अकाउंट सिविल सर्वेंट्स और अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच करता है—फर्जी सर्टिफिकेट से लेकर अधिकारियों के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों तक.

खुरपेंच की टीम नकली नामों के पीछे काम करती है. ये लोग कुछ हद तक व्हिसलब्लोअर, कुछ हद तक उकसाने वाले और कुछ हद तक खुद ही न्याय करने वाले हैं. पिछले चार साल से इस पेज को चलाने वाले एडमिन अपने काम को “इन्वेस्टिगेटिव कंटेंट क्रिएशन” कहते हैं. यह पेज उम्मीदवारों और अधिकारियों की जिंदगी खंगालता है—रिजर्वेशन सर्टिफिकेट, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और पुराने सोशल मीडिया पोस्ट तक—ताकि यह दिखा सकें कि किसने सिस्टम में शॉर्टकट लिया.

दशकों से UPSC का रिजल्ट मेहनत की जीत का प्रतीक माना जाता रहा है—परिवारों और कोचिंग संस्थानों के लिए गर्व का पल. लेकिन खुरपेंच जैसे ऑनलाइन वॉचडॉग के आने से अब एक नई तरह की जांच शुरू हो गई है. अब सिविल सर्विस का यह बंद सा सिस्टम सिर्फ आधिकारिक जांच तक सीमित नहीं रहा. कुछ अधिकारियों का कहना है कि इससे नौकरशाह अब सोशल मीडिया पर ज्यादा सावधान रहने लगे हैं.

हालांकि UPSC इस अकाउंट के बारे में जानता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आरोपों का फैसला गुमनाम सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर नहीं किया जा सकता. योग्यता या सर्टिफिकेट से जुड़े सवालों का जवाब केवल आधिकारिक जांच से ही मिल सकता है.

शैलजा चंद्रा, रिटायर्ड IAS अधिकारी ने कहा, “फैक्ट-चेकिंग जरूरी है और इसका स्वागत होना चाहिए. अधिकारियों को ईमानदारी से काम करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अवॉर्ड्स के पीछे भागना चाहिए. लेकिन ऐसी जांच पूरी तरह सत्यापित होनी चाहिए और इसका उद्देश्य जवाबदेही सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी की छवि खराब करना.”

लेकिन खुरपेंच के 28 साल के एडमिन इससे सहमत नहीं हैं.

खुरपेन्च के एडमिन ने दिप्रिंट से कहा, “हम कुछ भी ऐसे ही पोस्ट नहीं करते. हम पूरी रिसर्च करते हैं, हर पहलू को देखते हैं और उसके बाद ही पोस्ट करते हैं. हमारा मकसद है उन लोगों को सामने लाना जो सिस्टम को धोखा देते हैं और सोचते हैं कि बच जाएंगे.”

इस अकाउंट की गुमनामी भी विवाद का विषय है. आलोचक अक्सर इसे नाराज UPSC अभ्यर्थियों का काम बताते हैं, जिसे एडमिन नकारते हैं.

लखनऊ में रहने वाले खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमने कभी UPSC नहीं दिया. हम दोनों इंजीनियर हैं—एक मैकेनिकल और एक इलेक्ट्रिकल.”

सर्टिफिकेट का दिलचस्प मामला

खुरपेंच की जांच का बड़ा हिस्सा UPSC में इस्तेमाल होने वाले रिजर्वेशन सर्टिफिकेट पर केंद्रित है. उदाहरण के तौर पर आस्था जैन का मामला लें, जिन्होंने 2025 UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की. वह EWS कैटेगरी में टॉप रैंक लाने की वजह से वायरल हुई थीं.

जब सोशल मीडिया पर जैन को बधाइयां मिल रही थीं, उसी समय खुरपेंच ने जांच शुरू कर दी. पेज ने आरोप लगाया कि जैन ने अलग-अलग प्रयासों में EWS कैटेगरी का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से किया.

खुरपेंच का दावा है कि जैन ने 2023 में EWS कैटेगरी में 131वीं रैंक हासिल की थी और IPS के लिए चुनी गई थीं. इसके बाद, पेज के मुताबिक, उन्होंने 2024 में फिर परीक्षा दी और इस बार जनरल कैटेगरी में IAS हासिल किया. इसके बाद जैन ने एक लेखपाल से संपर्क कर EWS सर्टिफिकेट बनवाया, ऐसा पेज ने आरोप लगाया.

10 मार्च को हिंदी में किए गए एक थ्रेड में खुरपेंच ने लिखा, “फिर 2025 का फॉर्म भरते समय आपने कथित तौर पर एक लेखपाल से संपर्क किया और एक ‘नया और चमकदार’ EWS सर्टिफिकेट बनवाने को कहा. एक बार फिर EWS कैटेगरी के साथ आप परीक्षा में उतरीं—और इस बार टॉप पर पहुंच गईं.”

इसके बाद कई अन्य अकाउंट्स ने भी इस दावे को फैलाया. सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कुछ यूजर्स ने जैन को “फ्रॉड” तक कह दिया.

लेकिन सोशल मीडिया पर होने वाली बहस से सरकारी नियम तय नहीं होते. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे आरोप अक्सर यह नहीं समझते कि रिजर्वेशन के नियम कैसे काम करते हैं.

नियमों के अनुसार EWS की पात्रता हर साल तय होती है. यह परिवार की आय 8 लाख रुपये और संपत्ति की शर्तों पर निर्भर करती है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के आधार पर देखी जाती है. इसलिए किसी उम्मीदवार की पात्रता एक साल में हो सकती है और दूसरे साल में नहीं, अगर उसकी आय या संपत्ति में बदलाव हो.

एक हाल ही में भर्ती हुए IAS अधिकारी ने कहा, “हो सकता है उनके सर्टिफिकेट में कोई समस्या रही हो. कभी-कभी तकनीकी गलती भी हो जाती है और DoPT किसी कैटेगरी को रद्द कर सकता है. ऐसे मामलों में अगर उम्मीदवार ने जनरल कैटेगरी में सभी चरण पास कर लिए हों, तो सेवा उसी आधार पर मिलती है.”

उसी अधिकारी ने आगे कहा, “अगर उस समय उनका EWS सर्टिफिकेट मान्य होता, तो संभव है कि उसी प्रयास में उन्हें IAS मिल जाता.”

Former trainee IAS officer Puja Khedkar | File Photo | ANI
पूर्व ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेड़कर | फ़ाइल फ़ोटो | ANI

शुरुआत पूजा खेड़कर से हुई

जब 2022 में खुरपेंच बनाया गया था, तब नौकरशाहों को बेनकाब करना इसका मकसद नहीं था.

यह अकाउंट कानपुर के दो बचपन के दोस्तों ने शुरू किया, जो दोनों इंजीनियर हैं और अब अपने पारिवारिक बिज़नेस संभालते हैं. वे फिलहाल लखनऊ में रहते हैं, लेकिन इस पेज या इससे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स से कोई कमाई नहीं करते.

शुरुआत में यहां सिर्फ मीम्स और UPSC से जुड़े कमेंट पोस्ट होते थे. धीरे-धीरे यह कोचिंग इंडस्ट्री तक पहुंच गया, जहां लोकप्रिय UPSC शिक्षकों को भी जांच के दायरे में लाया गया, जिसे एडमिन “फेक मोटिवेशनल कंटेंट” कहते हैं.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमने अपनी ऑब्जर्वेशन पर मज़ेदार पोस्ट डालना शुरू किया. हमने अवध ओझा और विकास दिव्यकीर्ति जैसे लोकप्रिय UPSC शिक्षकों के बारे में लिखा और धीरे-धीरे ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी दूसरी चीजों पर भी जाने लगे.”

पेज की दिशा पूजा खेड़कर विवाद के दौरान बदली, जब पूर्व IAS प्रोबेशनर के दस्तावेजों पर लगे आरोपों की जांच हुई और उन्हें सेवा से हटा दिया गया.

हालांकि इस मामले को सबसे पहले पुणे के एक्टिविस्ट विजय कुंभार ने RTI के जरिए उठाया था, लेकिन खुरपेंच ने इसे कई पोस्ट और थ्रेड के जरिए आगे बढ़ाया, जो अभ्यर्थियों के बीच तेजी से फैल गए.

एडमिन के मुताबिक, इसी केस ने तय किया कि वे अपने पेज के साथ क्या करना चाहते हैं.

खुरपेन्च के एडमिन ने कहा, “हमने पिछले पांच साल का डेटा देखा. EWS और PwD सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने वालों का डेटा निकाला और उसका विश्लेषण किया. तभी हमने दूसरे कैंडिडेट्स पर पोस्ट करना शुरू किया. जब हमने सवाल उठाने शुरू किए, तो उनमें से कुछ लोगों ने सोशल मीडिया छोड़ दिया.”

इसके बाद उनका बड़ा ब्रेक आया. IPS अधिकारी अभिषेक पल्लव पर उनकी नजर पड़ी, जो अपने बड़े सोशल मीडिया फॉलोइंग और वायरल इंस्टाग्राम रील्स के लिए जाने जाते हैं. उनके पास एक डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट भी था.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति xyz कंडीशन के साथ डिसएबिलिटी का दावा करता है, वह बॉलीवुड गानों पर इतनी सक्रियता से कैसे डांस कर सकता है. जब हमारी पोस्ट वायरल हुई, तो उन्होंने हमसे संपर्क किया, लेकिन हमने कोई जवाब नहीं दिया.”

तब से यह अकाउंट, जिसके अब X पर 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, खुद को एक ऑनलाइन व्हिसलब्लोअर के रूप में पेश कर रहा है. यह सिविल सर्वेंट्स और अभ्यर्थियों पर सवाल उठाता है—EWS, PwD और OBC नॉन-क्रीमी लेयर जैसी रिजर्वेशन कैटेगरी के कथित दुरुपयोग से लेकर भ्रष्टाचार और उपलब्धियों के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों तक. यह पेज नेताओं, सांसदों और विधायकों को भी निशाने पर लेता है.

सूत्र, RTI और रिसर्च

खुरपेंच के वायरल थ्रेड्स के पीछे एक सिस्टम है, जिसे एडमिन टिप-ऑफ, RTI और ऑनलाइन रिसर्च का मिश्रण बताते हैं.

कई जांच UPSC अभ्यर्थियों, कोचिंग से जुड़े लोगों या गुमनाम स्रोतों से मिली जानकारी से शुरू होती हैं. इसके बाद टीम पब्लिक रिकॉर्ड, RTI दस्तावेज, सोशल मीडिया आर्काइव और जमीन के रिकॉर्ड के जरिए जानकारी की जांच करने का दावा करती है.

यह पेज आरोप पोस्ट करने से पहले वकीलों से सलाह नहीं लेता.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हम नियम पढ़ते हैं, दस्तावेज देखते हैं और लोगों से बात करते हैं. कई बार लोग खुद हमें दस्तावेज भेजते हैं.”

RTI भी इस पेज के लिए एक अहम टूल है और खुरपेंच इसे करीब से ट्रैक करता है. इसी तरह उन्हें 2022 बैच के हिंदी मीडियम UPSC टॉपर रवि सिहाग के बारे में जानकारी मिली, जो EWS कैटेगरी से थे.

खेड़कर मामले के बाद विजय कुंभार ने एक और RTI दाखिल की, जिसमें कई अधिकारियों की पात्रता पर सवाल उठाए गए, जिनमें सिहाग भी शामिल थे. खुरपेंच ने उनके बैकग्राउंड की जांच की और एक पोस्ट में दावा किया कि उनके परिवार के पास राजस्थान में काफी जमीन है और उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में गलत जानकारी दी.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमने पूरी जांच की और अब यह साफ है कि उन्होंने EWS रिजर्वेशन पाने के लिए सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की. हमारे पास राजस्थान में उनकी जमीन के दस्तावेज हैं.”

जैसे-जैसे खुरपेंच की लोकप्रियता बढ़ी, उसका फोकस UPSC अभ्यर्थियों से आगे बढ़कर मौजूदा अधिकारियों और उनके दावों तक पहुंच गया.

कुछ हफ्ते पहले पेज ने बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी पर पोस्ट किया, जिन्हें जल शक्ति मिशन के काम के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मान मिला था. लेकिन खुरपेंच ने आरोप लगाया कि काम पूरा दिखाने के लिए AI से बनी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया.

खुरपेंच ने एक पोस्ट में लिखा, “टीना डाबी की बहन ने एक जगह शादी के कार्ड की फोटो और दूसरी जगह जल शक्ति मंत्रालय की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट अपलोड किया, और इन ‘शानदार जल संरक्षण कार्यों’ के आधार पर 1 करोड़ रुपये का अवॉर्ड जीत लिया.”

डाबी जैसे चर्चित अधिकारी पर पोस्ट करने का मतलब है कि वह वायरल होगा. ऐसे पोस्ट को ऑनलाइन समर्थन भी मिलता है और संदेह भी जताया जाता है. एडमिन का कहना है कि उनका कोई निजी एजेंडा नहीं है और उनके दावे रिसर्च पर आधारित हैं.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमारे पास बहुत सारा रिसर्च डेटा है. हमने कई टूल्स, जिसमें गूगल सर्च भी शामिल है, का इस्तेमाल करके डेटा शीट्स बनाई हैं.”

इस पेज की बढ़ती लोकप्रियता ने कुछ सिविल सर्वेंट्स को सोशल मीडिया पर सतर्क बना दिया है.

एक अधिकारी ने कहा, “ये मीडिया ट्रायल्स भी ब्यूरोक्रेसी के काम करने के तरीके को बदल रहे हैं. पहले अधिकारी पब्लिक इंटरेस्ट में जोखिम लेने के लिए ज्यादा तैयार रहते थे. अब कई लोग हिचकते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि उनके काम को ऑनलाइन कैसे देखा जाएगा.”

ब्लिक सर्विस या ट्रोलिंग

हर कोई खुरपेंच के काम को पब्लिक सर्विस नहीं मानता.

हालांकि इस पेज के खिलाफ कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि रिजर्वेशन सर्टिफिकेट या प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े आरोप सोशल मीडिया ट्रायल से तय नहीं हो सकते.

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के एक सूत्र ने कहा, “लोग ऑनलाइन बहुत कुछ पोस्ट करते हैं. इसके लिए नियम और जांच की व्यवस्था होती है. सिर्फ किसी के लग्जरी बैग या कार के साथ फोटो पोस्ट करने से कुछ साबित नहीं होता. इसके लिए एक सिस्टम है.”

अधिकारी ने कहा कि जिनके पास सबूत हैं, उन्हें कोर्ट या संबंधित अधिकारियों के पास जाना चाहिए, न कि गुमनाम तरीके से पोस्ट करना चाहिए.

DoPT के सूत्र ने कहा, “बिना सबूत के यह ट्रोलिंग बन जाती है.”

हालांकि खुरपेंच के एडमिन का कहना है कि उनके काम के लिए गुमनामी जरूरी है.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हम अपनी पहचान बताने से नहीं डरते. लेकिन जिस तरह का काम हम करते हैं, उसमें गुमनामी जरूरी है.”

लेकिन सिविल सर्वेंट्स का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक जांच, वह भी गुमनाम स्रोतों से, नुकसान पहुंचा सकती है.

एक 2016 बैच के IAS अधिकारी ने कहा, “जब तक जानकारी पूरी तरह सत्यापित हो, तब तक जांच उपयोगी हो सकती है. लेकिन अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया ट्रायल किसी अधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं.”

अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी ब्यूरोक्रेसी में गलतियां होना स्वाभाविक है.

उसी अधिकारी ने कहा, “हर दस्तावेज या फोटो खुद जिला मजिस्ट्रेट अपलोड नहीं करता.”

जहां खुरपेंच कुछ उम्मीदवारों पर दबाव बनाए रखता है, वहीं UPSC अभ्यर्थियों के बीच इस पेज की अच्छी-खासी लोकप्रियता है. दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रहे 28 साल के गौरव पांडेय का कहना है कि उन्हें यह पेज इसलिए पसंद है क्योंकि यह कोचिंग संस्थानों को भी बेनकाब करता है.

खुरपेंच के निशाने पर आने वालों में दृष्टि IAS जैसे बड़े कोचिंग संस्थान भी शामिल हैं. खुरपेंच से जुड़े एक अकाउंट ने दावा किया कि संस्थान ने अपने सफल छात्रों की संख्या 54 से बढ़ाकर 216 बताई.

संस्थान से जुड़े एक सूत्र ने इस आरोप को खारिज किया.

संस्थान से जुड़े सूत्र ने कहा, “CCPA द्वारा लगाया गया जुर्माना इस वजह से नहीं था कि हमने किसी को गलत तरीके से अपना छात्र बताया. बल्कि इसलिए था क्योंकि हमने यह स्पष्ट नहीं किया कि चयनित उम्मीदवार पेड कोर्स से थे या फ्री इनिशिएटिव से.”

बिहार के रहने वाले पांडेय जैसे अभ्यर्थियों के लिए खुरपेंच दिल्ली के भीड़भाड़ वाले और प्रतिस्पर्धी UPSC कोचिंग माहौल में एक गाइड की तरह काम करता है.

गौरव पांडेय ने कहा, “खुरपेंच इन संस्थानों की हकीकत सामने लाता है. ये लोग इतने टॉपर्स का दावा करते हैं, लेकिन सच्चाई अलग होती है. गांव से आने वाले कई छात्र ऐसे विज्ञापनों में फंस जाते हैं, लेकिन ऐसे पोस्ट उनकी मदद करते हैं.”

Two posts of Khurpenchh. Credit: @khurpenchh/X
खुरपेंच की दो पोस्ट। क्रेडिट @khurpenchh/X

एक गुमनाम टीम

बढ़ते प्रभाव के बावजूद, इस अकाउंट को चलाने वाले लोगों के बारे में बहुत कम जानकारी है. दो लोगों से शुरू हुआ यह पेज अब छह से सात लोगों की एक छोटी रिमोट टीम बन चुका है, जिसमें इंटर्न और डिजाइनर भी शामिल हैं. ज्यादातर लोगों को ऑनलाइन पोस्ट के जरिए भर्ती किया गया.

खुरपेंच के एक एडमिन ने कहा, “हमारी टीम बहुत कम पैसे में काम करती है, करीब 10 से 15 हजार रुपये प्रति महीना.”

उनका दावा है कि यह पेज करीब 300 जुड़े हुए अकाउंट्स के नेटवर्क से जुड़ा है, जो मुख्य रूप से X पर हैं, लेकिन इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर भी सक्रिय हैं. ये अकाउंट्स औपचारिक रूप से जुड़े नहीं हैं, लेकिन पोस्ट को फैलाने और देशभर से जानकारी जुटाने में मदद करते हैं.

टीम प्राइवेट मैसेजिंग ग्रुप्स के जरिए काम करती है, जहां टिप्स, दस्तावेज और आइडियाज शेयर किए जाते हैं. मुख्य अकाउंट जहां विस्तृत थ्रेड पोस्ट करता है, वहीं छोटे अकाउंट उन्हें रीशेयर करते हैं या स्थानीय जानकारी जोड़ते हैं.

एडमिन का कहना है कि इस नेटवर्क की वजह से पेज हर दिन लाखों लोगों तक पहुंचता है.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमारी रोज की पहुंच करीब 20 लाख लोगों तक होती है. कभी-कभी यह 30 लाख तक भी पहुंच जाती है.”

अब टीम लखनऊ में एक ऑफिस खोलने और अपने काम को बढ़ाने की योजना बना रही है. इसमें एक प्रस्तावित “महिला विंग” भी शामिल है, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करेगा.

ऑनलाइन अटकलों के बावजूद, एडमिन का कहना है कि यह पेज फिलहाल कोई कमाई नहीं करता.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हमें कई ऑफर मिले हैं. हमने किसी से पैसे नहीं लिए. अभी हम अपने पारिवारिक बिजनेस से चलते हैं. आगे चलकर विज्ञापन कर सकते हैं, लेकिन शराब या गुटखा के नहीं.”

खुरपेंच का भविष्य

खुरपेंच के एडमिन कहते हैं कि उनकी महत्वाकांक्षाएं सिर्फ़ वायरल थ्रेड्स तक ही सीमित नहीं हैं. वे इस पेज को एक ऐसी जांच-पड़ताल करने वाली वेबसाइट में बदलना चाहते हैं, जो सरकारी अधिकारियों के काम-काज पर नज़र रखे.

वे चाहते हैं कि यह प्लेटफ़ॉर्म नागरिकों को अपने-अपने इलाकों के सरकारी कर्मचारियों, डॉक्टरों और दूसरे सरकारी मुलाज़िमों के रिकॉर्ड की जांच करने की सुविधा दें.

खुरपेंच के एडमिन ने कहा, “हम बदलाव लाने वाले बनना चाहते हैं. हम एक ऐसा ओपन-सोर्स, पब्लिक डेटा पोर्टल बनाना चाहते हैं, जहां लोग आसानी से अपने इलाके का रिपोर्ट कार्ड देख सकें.”

वह यह भी मानते हैं कि गुमनाम आरोप लगाना तो आसान है, लेकिन असली मेहनत तो सिस्टम को अंदर से सुधारने में लगती है. वह ज़ोर देकर कहते हैं कि खुरपेंच यही काम बखूबी कर रहा है.

उन्होंने कहा, “इन सभी लोगों ने सिस्टम में हेर-फेर करके नौकरी हासिल की है. इसलिए मैं एक-एक करके उनकी पोल खोल रहा हूं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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