पलवल (हरियाणा): “बैंसला कचौरी वाला”, “बैंसला मिष्ठान भंडार” और “बैंसला हार्डवेयर शॉप”—हरियाणा के पलवल जिले के टिकरी गुर्जर गांव जाने वाली सड़क पर दुकानों के बाहर बैंसला सरनेम हर जगह दिखाई देता है. यही वह जगह है, जहां गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले के आरोपी कल्याण बैंसला का गांव है. उसे मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था. यहां उसके जाति समूह के लोग बड़ी संख्या में हैं.
कल्याण का घर उसकी गिरफ्तारी के बाद से बंद है. गुरुग्राम की घटना को लेकर कोई बात नहीं कर रहा है. गांव में खामोशी छाई है—डर की वजह से भी और एक-दूसरे के साथ खड़े होने की वजह से भी. पत्रकारों के गुज़रने पर महिलाएं अपना घूंघट नीचे कर लेती हैं और घटना के बारे में पूछने पर दरवाजे और खिड़कियां बंद हो जाती हैं. ऐसे गांव में जहां हर कोई एक-दूसरे को जानता है, वहां अचानक छाई यह खामोशी साफ महसूस होती है.
फिर भी, जब लोग बात करते हैं, तो उनमें से कई तुरंत इस घटना को हादसा और गलती बताते हैं.
कल्याण के पड़ोसी 60 साल के जसपाल बैंसला ने कहा, “यह ड्राइविंग की गलती का मामला है. यह पहली सड़क दुर्घटना नहीं है, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया ने इसे बहुत नकारात्मक तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. इससे सिर्फ कल्याण का भविष्य ही खराब नहीं होगा, बल्कि गांव के लिए भी यह अच्छा नहीं होगा.”

कल्याण के एक और पड़ोसी अमरजीत ने कहा, “जब मीडिया हमारे गांव के एक व्यक्ति को हत्यारा या आतंकवादी बताकर दिखा रहा है, जिसने इतना गंभीर अपराध किया है, तो हम मीडिया या किसी और से बात क्यों करें? क्या यह पहली सड़क दुर्घटना है? क्या जांच पूरी हो गई है? अगर नहीं, तो उसे [कल्याण] अपराधी के तौर पर क्यों दिखाया जा रहा है?”
सोमवार को गुरुग्राम के सेक्टर 56 पुलिस थाने में कल्याण के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 (दूसरों की जान या निजी सुरक्षा को खतरे में डालने का काम) और 281 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. मंगलवार को हत्या की कोशिश की धारा भी जोड़ दी गई.
फिटनेस और खेल
इसके बजाय गांव के लोग जिस बारे में उत्साह से बात करते हैं, वह है कल्याण बैंसला की खेलों से जुड़ी छवि. उनका कहना है कि वह खेलों का बहुत शौकीन था और इस बात को वे काफी सम्मान के साथ बताते हैं. उसने हरियाणा और पंजाब में कई जोनल और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और बॉडीबिल्डिंग और फिटनेस पर भी ध्यान दिया.
जसपाल ने कहा, “हमने कल्याण को अपने सामने बड़ा होते देखा है. फिटनेस और खेल हमेशा से उसकी ज़िंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं. वह बच्चों, युवाओं और यहां तक कि बुजुर्गों से भी फिट रहने और खेलों को अपनाने की जरूरत के बारे में बात करता था. उसने गांव के बच्चों को कई बार ट्रेनिंग भी दी है.”
कल्याण के सोशल मीडिया प्रोफाइल से भी उसकी फिटनेस और जिम पर केंद्रित ज़िंदगी की झलक मिलती थी. उसने खुद को जिम मालिक और कबड्डी खिलाड़ी बताया था. उसकी पोस्ट और वीडियो में अक्सर उसे कसरत करते, अपनी बॉडी दिखाते और अपनी फिटनेस रूटीन के पल साझा करते देखा जा सकता था. हालांकि, घटना के बाद कल्याण ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिए हैं.
कल्याण पलवल में एक जिम चलाता है, जो कथित तौर पर दो महीने से ज्यादा समय से मरम्मत के लिए बंद है और अगले हफ्ते फिर से खुलने वाला था. बेसमेंट में बना यह जिम किराए की जगह पर है और किराया देने में देरी को लेकर हुए विवाद के बाद इसे बंद कर दिया गया था.
कल्याण के दोस्त नंदू ने कहा, “मकान मालिक के साथ किराए को लेकर कुछ विवाद था, लेकिन मरम्मत पूरी होने के बाद जिम 17 सितंबर को फिर से खुलने वाला था.”
कल्याण का परिवार मुख्य रूप से खेती और पशुपालन करता है. उसने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन पलवल से किया है. वह अक्सर दिल्ली-एनसीआर इलाके में आता-जाता था और रियल एस्टेट का काम भी करता था. वह शादीशुदा है और उसके दो बेटे हैं.
नंदू ने कहा, “वह हमेशा अपने काम में व्यस्त रहता था. वह एक नया कारोबार शुरू करने की भी योजना बना रहा था और जिम को दोबारा खोलने के लिए मेहनत कर रहा था, लेकिन इस घटना और जिस तरह उसे दिखाया गया है, उससे उसके सपने और भविष्य बर्बाद हो जाएंगे.”
गांव को मामले की जानकारी है
सिया की मोटरसाइकिल पर लगे कैमरे की फुटेज सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गई और गांव के लोगों के स्मार्टफोन तक भी पहुंच गई.
कल्याण के दोस्त 41 साल के सत्येंद्र बैंसला ने पूछा, “वीडियो में सिर्फ एक पक्ष ही क्यों दिखाया जा रहा है? सड़क पर लगे कैमरे की फुटेज क्यों जारी नहीं की जा रही है? अगर पूरा वीडियो सामने आता है तो कहानी अलग होगी.”

पलवल के आसपास के गांवों में अब लगभग हर कोई कल्याण का नाम जानता है. सड़क किनारे लोग चारपाइयों और खुले आंगनों में बैठकर हुक्का पीते हैं और अपने मोबाइल फोन पर इस मामले की खबरें तेज़ आवाज़ में देखते हैं.
कल्याण के दोस्तों का कहना है कि वह हरियाणा और पंजाब में गांव की पंचायतों, स्थानीय क्लबों और आयोजकों की ओर से आयोजित कबड्डी प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेता था. उनका कहना है कि उसने ऐसी कई प्रतियोगिताएं जीती हैं, जिनमें गोल्ड मेडल भी शामिल हैं.
कल्याण के साथ कबड्डी खेलने वाले सत्येंद्र बैंसला ने कहा, “उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेला है, लेकिन हमने कबड्डी क्लबों और गांव की पंचायतों की ओर से आयोजित कई प्रतियोगिताओं में खेला है. इसके अलावा हरियाणा में अलग-अलग स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में भी हमने हिस्सा लिया है.”
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