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Wednesday, 16 September, 2026
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गुरुग्राम की बाइक सवार सिया ने कल्याण बैंसला पर कहा: ‘समझ नहीं आता कि वे किस तरह के समाज से आता है’

बाइकर शिवानी चौहान, जिन्हें ऑनलाइन सिया के नाम से जाना जाता है, उन्होंने कहा कि दिल्ली और गुरुग्राम में महिला बाइकर्स के साथ छेड़छाड़, पीछा किया जाना और उन्हें खतरा महसूस होना कोई नई बात नहीं है.

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नई दिल्ली: शिवानी चौहान ने एक साल तक अपना चेहरा इंटरनेट से दूर रखा. वह सिया के नाम से बाइक चलाती थीं, अपने सभी 42 रील्स के लिए खुद वॉइसओवर करती थीं और हर रील में काला मास्क पहनती थीं, लेकिन इस हफ्ते उनकी यह पहचान छिपी नहीं रह सकी, जब गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड पर एक सफेद सेडान कार ने उनकी बाइक को टक्कर मारकर उन्हें गिरा दिया और इसका वीडियो वायरल हो गया.

दिप्रिंट से कालकाजी स्थित अपने घर पर बात करते हुए 27 साल की शिवानी ने कहा कि आखिर में अपनी पहचान सामने लाने का फैसला उनके हाथ में नहीं था.

उन्होंने कहा, “मुझे अपने सिया पेज के जरिए अपनी पहचान बताने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. दोपहर तक, जब मीडिया मेरे घर के बाहर आकर बैठ गया था, तब भी किसी को नहीं पता था कि सिया कौन है या वह कैसी दिखती है. अपनी पहचान बताना मेरा निजी फैसला था. मैं इसे सामने नहीं लाना चाहती थी, लेकिन अब ऐसा हो गया है.”

उन्हें यह कदम उठाने के लिए आरोपी कल्याण बैंसला का खुद अपनी सफाई में सार्वजनिक रूप से सामने आना वजह बना. गिरफ्तारी से पहले एक टीवी चैनल से बात करते हुए पलवल निवासी बैंसला ने टक्कर होने की बात मानी, लेकिन कहा कि उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था. उसने कहा कि डर जाने की वजह से वह वहां से भाग गया था.

चौहान ने कहा, “मैं अपने और अपने मुद्दों के लिए बहुत मज़बूत स्टैंड लेती हूं. उसके (आरोपी बैंसला), उसके वकील और उसके सपोर्टर्स के बयान उसकी सोच को दिखाते हैं. मुझे समझ नहीं आता कि वो किस तरह के समाज से आता है. अब, प्लीज़ इन चीज़ों की जांच करें.”

वह गुरुग्राम जिला अदालत से लौटकर आई थीं, जहां उन्होंने कोर्ट रूम नंबर 10 में BNSS की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया. सफेद शर्ट, माथे पर तिलक और बाएं हाथ पर नारंगी रंग की क्रेप पट्टी बांधे चौहान करीब 90 मिनट तक अदालत में रहीं, जबकि उनके भाई और पिता उनका इंतजार कर रहे थे. वह लंगड़ाते हुए बाहर आईं और इसके बाद अस्पताल गईं.

उन्होंने कहा, “महिला राइडर्स डरती नहीं हैं, मैं भी नहीं डरती. ऐसी घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि बाहर जाना चाहिए या नहीं, लेकिन महिलाएं फिर भी अपने जुनून को जारी रखती हैं.”

‘मैं अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहती थी’

दक्षिण दिल्ली के कालकाजी के एक अपर-मिडिल-क्लास इलाके में स्थित उनका घर तब से रिश्तेदारों और दोस्तों से भरा हुआ है, जब सोशल मीडिया पर शिवानी चौहान नाम को बाइक पर सवार महिला से जोड़ दिया गया. रिश्तेदार और दोस्त उनका हाल जानने के लिए घर आ रहे हैं.

दिन में इससे पहले बीजेपी नेता और कालकाजी के पूर्व विधायक हरमीत सिंह कालका उनसे मिलने उनके घर पहुंचे.

उन्होंने मुलाकात के बाद फेसबुक पर लिखा, “उन्हें ठीक होते देखकर मुझे राहत मिली और मैंने उनके जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना की. इस तरह के लापरवाह व्यवहार को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.”

रविवार को चौहान गोल्फ कोर्स रोड पर एक अन्य बाइक सवार के साथ बाइक चला रही थीं, तभी उन्हें टक्कर मार दी गई. बाइक से गिरने के बाद उन्हें कुछ समझ नहीं आया.

चौहान ने दिप्रिंट से कहा, “मैं कांप रही थी, मेरे घुटनों में दर्द हो रहा था.”

शिवानी चौहान | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
शिवानी चौहान | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

उनके साथ बाइक चला रहे लोग उन्हें उस कैफे में ले गए, जहां पूरा ग्रुप जाने वाला था. उनमें से एक व्यक्ति उन्हें घर छोड़कर आया. उनके दिमाग में सबसे पहले बाइक का ख्याल आया.

उन्होंने कहा, “यह मेरी पहली बाइक थी और वह टूट गई थी.”

उस शाम बाद में उन्होंने घटना का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया. कैप्शन में उन्होंने लिखा कि उन्हें गुरुग्राम की सड़कों पर असुरक्षित महसूस हुआ था और इस तरह के लोग किसी को टक्कर मारकर वहां से भागने से नहीं डरते. उन्होंने अपना चेहरा नहीं दिखाया.

बैंसला के टीवी इंटरव्यू के बाद ही उन्होंने पहली बार वीडियो मैसेज पोस्ट किया. इसमें उन्होंने कहा, “मेरी मौत हो सकती थी.”

स्कूल के समय से बाइक चला रही हैं

चौहान को कम उम्र में ही बाइक चलाने का शौक था.

उन्होंने कहा, “स्कूल के समय से ही मुझे बाइक चलानी आती थी, मेरे नाम पर हमेशा एक बाइक रही है.” उन्होंने पिछले साल ही रेगुलरली बाइक चलाना शुरू किया और जहां भी जातीं, वहां वीडियो बनाने लगीं—मुरथल, गुरुग्राम और दिल्ली से बाहर जाने वाले आम रास्तों पर.

दिल्ली के कई बाइक सवारों की तरह चौहान भी रविवार को बाइक राइड पर जाती हैं. पिछले हफ्ते की राइड भी आम रविवार जैसी ही होनी थी. उन्होंने बताया कि इन राइड्स के दौरान उन्हें सड़कों पर छेड़ा और उनका पीछा किया गया है.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हर महिला राइडर के साथ ऐसा होना बहुत आम है. आप सड़क पर बाइक चला रही हैं और कोई आपका पीछा करना शुरू कर देता है, आपको छेड़ता है, अपनी दबंगई दिखाने की कोशिश करता है, आपके बहुत करीब आता है, आपको ओवरटेक करता है, रोकता है या फिर वापस आपकी तरफ आता है. मुझे लगता है कि हर महिला राइडर के साथ ऐसा हुआ है. मुझे लगता है कि लगभग हर दूसरी राइड पर उन्हें इस तरह की किसी न किसी चीज का सामना करना पड़ता है.”

हालांकि, वह इसे सिर्फ बाइक सवारों तक सीमित नहीं मानतीं.

उन्होंने कहा, “लड़कियों के लिए सभी सड़कें असुरक्षित हैं. मुझे पता है कि पुरुष बाइक सवारों को भी कुछ चीज़ों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह सिर्फ बाइक सवारों की बात नहीं है.”

अदालत के बाहर उनका इंतज़ार कर रहे मीडियाकर्मियों ने उनसे कई सवाल पूछे. “आपने जज को बताया क्या हुआ आपके साथ?” “क्या जज उन्हें दोषी ठहराएंगे?” “क्या आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ी हैं?” उन्होंने धीरे से जवाब दिया कि वह ज्यादा बात करने की स्थिति में नहीं हैं.

चौहान ने 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर कालकाजी से नगर निगम चुनाव लड़ा था. वह चुनाव मैदान में सबसे कम उम्र की उम्मीदवार थीं, लेकिन हार गईं. इसके बाद से वह वार्ड में सामाजिक काम करती रही हैं और अपने पिता के कारोबार में उनकी मदद करती हैं. खुद को खुश रखने के लिए उन्होंने बाइक चलाना शुरू किया.

वे चाहती हैं कि दूसरी महिलाएं भी ऐसी घटनाओं की शिकायत करें.

चौहान ने कहा, “अगर किसी के साथ ऐसी घटना होती है, तो उसे उस व्यक्ति को सोशल मीडिया और संबंधित विभाग के सामने लाना चाहिए और उसके खिलाफ शिकायत करनी चाहिए. क्योंकि जब तक हम अपने लिए खड़े नहीं होंगे, कोई और हमारे लिए खड़ा नहीं होगा.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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