नई दिल्ली: गुरुग्राम के सेक्टर-83 स्थित ईमार पाम गार्डन्स का एंट्री गेट कड़ी सुरक्षा में रहता है. लगभग हर कोने पर CCTV कैमरे लगे हुए हैं. अंदर ऊंची-ऊंची इमारतें हैं, जो साफ-सुथरी सड़कों पर छाया करती हैं. इन्हें देखने के लिए गर्दन ऊपर उठानी पड़ती है, लेकिन इसी पते के अंदर एक बिल्कुल अलग तस्वीर भी मौजूद है.
कुछ हफ्ते पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) ब्लॉक के निवासी नारे लगा रहे थे—“पाम गार्डन RWA हाय-हाय, पाम गार्डन RWA हाय-हाय.” वे सोसायटी के मुख्य गेट तक मार्च करते हुए पहुंचे और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे. निवासियों का आरोप था कि RWA सफाई के काम की अनदेखी कर रही है, बार-बार शिकायत करने के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा और EWS निवासियों के साथ मुख्य टावरों में रहने वालों से अलग व्यवहार किया जा रहा है.
एक संकरा काला गेट हमेशा खुला रहता है. वहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड है और न ही कोई कैमरा दिखाई देता है. इमारत की सीढ़ियां दिखने से पहले ही कूड़े की बदबू आने लगती है. दीवारों की पपड़ी उखड़ रही है. एक टावर की लिफ्ट किसी तरह ऊपर तो चली जाती है, लेकिन कई बार नीचे वापस आने से मना कर देती है. यह है ईमार पाम गार्डन्स का EWS हाउसिंग ब्लॉक.
30 साल की राजकुमारी, जो पिछले छह साल से यहां रह रही हैं, कहती हैं कि यहां एक गार्ड तक लगवाना मुश्किल है.
उन्होंने मुख्य सोसायटी की ओर इशारा करते हुए कहा, “उधर देखिए. वहां अंदर जाने से पहले कई सुरक्षा जांचों से गुज़रना पड़ता है और यहां हम हर बार मांग करने के बाद भी एक गार्ड तक नहीं पा रहे हैं.”

ईमार पाम गार्डन्स के अंदर जो विवाद चल रहा है, वह कोई अकेला मामला नहीं है. दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में प्रीमियम गेटेड सोसायटियों के अंदर या उनके पास रहने वाले EWS निवासी कहते हैं कि उन्हें उन्हीं परिसरों में खुद को अनदेखा किया गया महसूस होता है, जिन्हें “समावेशी आवास” के वादे के साथ बनाया गया था.
निवासियों का कहना है कि उनकी कॉलोनी में हर समय कूड़ा पड़ा रहता है. कोई सफाई कर्मचारी नहीं आता. आवारा कुत्ते कूड़े के बैग फाड़ देते हैं. यहां ज्यादातर समय बदबू रहती है.
राजकुमारी ने कहा, “अगर मुख्य टावरों में ऐसा होता, तो कुछ ही घंटों में सफाई हो जाती.”
हरियाणा सरकार की किफायती आवास और शहरी विकास नीतियों के अनुसार, आवासीय परियोजनाओं में EWS श्रेणी के लिए कुछ आवास इकाइयां आरक्षित रखना अनिवार्य है. इस नीति के तहत कई लाइसेंस प्राप्त ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में कुल आवास इकाइयों का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा EWS निवासियों के लिए रखा जाता है.
EWS इकाइयां मुख्य आवासीय परिसर के भीतर, उसी परिसर में अलग टावरों में या स्वीकृत लेआउट योजना और अधिकारियों की मंजूरी के अनुसार मुख्य आवासीय ब्लॉकों से थोड़ी दूरी पर बनाई जा सकती हैं.
EWS आवास आवंटन के नियम संबंधित प्राधिकरण पर निर्भर करते हैं, जैसे दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), राज्य आवास बोर्ड, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अथॉरिटी और प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY).
कई मामलों में EWS आवास उपलब्ध कराना परियोजना की मंजूरी या अनुमति पाने के लिए जरूरी होता है, खासकर तब जब परियोजना बड़े भूखंड, ग्रुप हाउसिंग अनुमति, अतिरिक्त FAR (फ्लोर एरिया रेशियो), भूमि पूलिंग योजना, PMAY लाभ, PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल या सरकारी जमीन पर विकसित की जा रही हो.
कई सोसायटियों में यह अंतर साफ दिखाई देता है. मुख्य टावर सभी सुविधाओं के साथ चमकते रहते हैं, जबकि EWS ब्लॉक टूटी फर्श, खराब लिफ्ट और क्षतिग्रस्त चारदीवारी जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं.
ईमार पाम गार्डन्स के एक अन्य निवासी संतोष कुमार ने कहा, “वे हमें अपनी समस्याएं बताने या RWA से मिलने के लिए मुख्य इमारत में भी नहीं जाने देते.”
उन्होंने कहा, “हम कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन जब भी जवाब मांगते हैं, तो या तो बहस करने लगते हैं या कह देते हैं कि कुछ बदलने वाला नहीं है.”
RWA बनाम EWS
31 साल की नज़मा खातून अपने 5 साल के बेटे को गोद में लेकर ईमार पाम गार्डन्स में अपने फ्लैट के सामने टूटी हुई दीवार के पास से गुज़रती हैं. वह एक बड़ी दरार वाली दीवार और उस लिफ्ट की ओर इशारा करती हैं, जो ज्यादातर समय खराब रहती है.
निवासियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से लिफ्ट की देखभाल से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उनके अनुसार, लिफ्ट अक्सर ऊपर जाकर कई मिनट तक फंस जाती है. उनका आरोप है कि इस मुद्दे को कई बार RWA के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.
ईमार पाम गार्डन्स के EWS ब्लॉक में 210 फ्लैट हैं. इनमें से ज्यादातर फ्लैट किरायेदारों के पास हैं. यहां का किराया लगभग 6,000 से 7,000 रुपये के बीच है.
खातून ने कहा, “इस बिल्डिंग में बहुत सारी समस्याएं हैं और अधिकारियों की सिर्फ एक ही चिंता है कि हम मालिक नहीं, किरायेदार हैं. हमें दिन में भी अपने बच्चों को बाहर भेजने में डर लगता है. यहां सुरक्षा के लिए न तो गेट है और न ही CCTV कैमरा. कोई भी अंदर आ सकता है.”
खातून दो साल पहले सेक्टर-83 के सैफायर मॉल के पास की झुग्गी बस्ती से यहां आई थीं. उन्हें उम्मीद थी कि उनके बेटे को यहां ज्यादा सुरक्षित और बेहतर माहौल मिलेगा, लेकिन उनका कहना है कि यहां आने के बाद समस्याएं बढ़ती चली गईं.
उन्होंने बताया, “हम करीब 7,000 रुपये किराया दे रहे हैं. यह झुग्गियों में दिए जाने वाले किराये से ज्यादा है, लेकिन अब हमें घंटों बिजली के बिना रहना पड़ता है और पानी की भी लगातार कमी रहती है. शिकायत करने पर मकान मालिक सिर्फ यही कहता है कि समस्या जल्द ठीक हो जाएगी.” उन्होंने यह भी बताया कि अगर समस्याएं ऐसे ही जारी रहीं तो वह और उनके पति कहीं और जाने पर विचार कर रहे हैं. उनके पति परिवार में कमाने वाले इकलौते व्यक्ति हैं और कैब ड्राइवर का काम करते हैं.
कई सोसाइटियों में EWS निवासियों से मेंटेनेंस शुल्क नहीं लिया जाता. हालांकि, कई हाउसिंग सोसाइटियों में RWA, EWS निवासियों से 500 से 800 रुपये प्रति माह तक का मामूली मेंटेनेंस शुल्क लेती है, ताकि सफाई, लिफ्ट की मरम्मत और पावर बैकअप जैसी ज़रूरी सेवाएं दी जा सकें.
ईमार पाम गार्डन्स की RWA फिलहाल EWS निवासियों से कोई मेंटेनेंस शुल्क नहीं लेती है. इसलिए उन्हें पावर बैकअप की सुविधा भी नहीं दी जाती.
ईमार पाम गार्डन्स के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा, “मेंटेनेंस शुल्क लिए बिना हर सुविधा देना संभव नहीं है, क्योंकि सरकार इन सेवाओं का खर्च नहीं देती. हम तो RWA के फंड से ही लिफ्टों की देखभाल कर रहे हैं.” उन्होंने आगे बताया कि RWA भविष्य में EWS निवासियों से थोड़ी राशि लेने पर विचार कर रही है, ताकि उन्हें बेहतर सेवाएं और रखरखाव की सुविधाएं दी जा सकें.

गुरुग्राम या एनसीआर में ईमार पाम गार्डन्स अकेली ऐसी हाउसिंग सोसाइटी नहीं है, जहां EWS निवासी और RWA एक ही स्थिति की बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हों. गुरुग्राम के सेक्टर-109 स्थित ब्रिस्क लुंबिनी से लेकर नोएडा के सेक्टर-82 और 62, और द्वारका की कई रिहायशी सोसाइटियों तक, RWA और EWS निवासियों के बीच बुनियादी सुविधाओं, पहुंच और समान व्यवहार को लेकर विवाद लंबे संघर्ष में बदलते जा रहे हैं.
जहां EWS निवासी भेदभाव और असमान व्यवहार का आरोप लगाते हैं, वहीं मुख्य सोसाइटी में रहने वाले RWA सदस्य इन आरोपों को खारिज करते हैं और कहते हैं कि सभी को बराबर अधिकार और जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं.
RWA का कहना है कि मामला सिर्फ भेदभाव का नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा जटिल है. शर्मा ने कहा कि सफाई की समस्या पूरी सोसाइटी में थी, क्योंकि सफाई कर्मचारियों की कमी हो गई थी. उनके अनुसार, बंगाल चुनाव के दौरान कई सफाई कर्मचारी अपने गांव लौट गए थे, जिससे कर्मचारियों की कमी हो गई.
जहां शर्मा का कहना है कि सफाई की समस्या सिर्फ पिछले महीने से है, वहीं EWS निवासियों ने इस दावे को खारिज कर दिया. उनका कहना है कि सफाई और लिफ्ट की समस्याएं पिछले छह महीनों से बढ़ी हैं और कई शिकायतों के बावजूद RWA ने कोई कार्रवाई नहीं की.
30 साल की राजकुमारी ने कहा, “अगर यह कर्मचारियों की कमी की समस्या है, तो उनकी सोसाइटी हमेशा साफ क्यों रहती है और हमारी नहीं? गेट पर कोई सुरक्षा नहीं है. कोई भी अंदर आकर कूड़ा फैला सकता है. शाम को लोग यहां आते हैं और पीछे की तरफ बैठकर शराब भी पीते हैं.”
इस बीच, शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ बिल्डर RWA के खिलाफ माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.
हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अनुसार, बिल्डर या RWA, EWS फ्लैट या प्लॉट धारकों से सालाना मेंटेनेंस शुल्क, मेंटेनेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट या वापस किए जाने वाले आकस्मिक जमा (कॉन्टिजेंसी डिपॉजिट) नहीं ले सकते. हालांकि, अगर EWS निवासियों को पानी, सीवर, बिजली और दूसरी सुविधाएं दी जा रही हैं, तो उनके वास्तविक उपयोग का शुल्क लिया जा सकता है.
कई सोसाइटियों में RWA निवासियों से मेंटेनेंस के नाम पर थोड़ी राशि ली जाती है. हालांकि, अन्य निवासियों से लिया जाने वाला मेंटेनेंस शुल्क ज्यादातर फ्लैट के आकार पर निर्भर करता है.
गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली की कई RWA के अनुसार, EWS आवासों के प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है मालिकों और किरायेदारों का स्पष्ट रिकॉर्ड न होना. RWA सदस्यों का कहना है कि कई EWS फ्लैट मालिक अब भी बिल्डरों से जुड़े रहते हैं, और कई मामलों में फ्लैटों को बिना सही जानकारी दिए कई बार बेचा या ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसके कारण RWA के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि असली मालिक कौन है या फ्लैट में नया किरायेदार कौन रह रहा है.
शर्मा ने कहा, “मालिक अब भी बिल्डरों से जुड़े हुए हैं. कई बार हमें यह भी नहीं पता होता कि असली मालिक कौन है या घर में कौन नया किरायेदार रह रहा है, क्योंकि हमें कोई जानकारी नहीं दी जाती. हालांकि, यहां कोई भेदभाव नहीं है. जो व्यक्ति मेंटेनेंस शुल्क देता है, उसे स्वाभाविक रूप से बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. EWS मालिकों से मेंटेनेंस नहीं लिया जाता, इसलिए हम उनकी हर मांग पूरी नहीं कर सकते.”
भेदभाव
34 साल का एक व्यक्ति पिछले 11 साल से नोएडा के सेक्टर-82 स्थित जनता फ्लैट पॉकेट-7 में एक बेडरूम वाले फ्लैट में रह रहा है. नए फ्लैट में आने के कुछ समय बाद ही उसे यहां के फर्क और भेदभाव का एहसास हो गया था.
उन्होंने कहा, “EWS फ्लैट गेटेड सोसाइटियों के अंदर छिपी हुई एक दूसरी तरह की झुग्गी बन जाते हैं. भेदभाव खुलकर नहीं दिखता, लेकिन आपको हर दिन महसूस होता है.”
वह अपनी पत्नी, दो बच्चों और परिवार के एक अन्य सदस्य के साथ इस फ्लैट में रहते हैं. उनका कहना है कि निवासी कई बार टूटी दीवारों, खराब पानी की सप्लाई और मरम्मत में देरी की शिकायत कर चुके हैं.
उन्होंने कहा, “हम कई सालों से अधिकारियों से बाउंड्री वॉल की मरम्मत की मांग कर रहे हैं. हर बार हमें नई तारीख और नया आश्वासन दे दिया जाता है.”
टूटी हुई दीवारों की वजह से आवारा जानवर और बाहरी लोग आसानी से अंदर आ जाते हैं, जिससे निवासियों को परेशानी होती है. लोगों को यह डर भी है कि दीवार कभी भी किसी पर गिर सकती है, क्योंकि उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी है.
EWS निवासी यह भी शिकायत करते हैं कि उन्हें पार्क, क्लब हाउस और स्विमिंग पूल जैसी साझा सुविधाओं तक पूरी पहुंच नहीं मिलती. उनका कहना है कि उन्हें RWA या अन्य निवासी समूहों में शामिल नहीं किया जाता और अक्सर उन साझा कम्युनिकेशन चैनलों तक भी पहुंच नहीं होती, जहां दूसरे निवासी अपनी समस्याएं उठाते हैं और जरूरी जानकारी पाते हैं.
34 साल के इस व्यक्ति ने आरोप लगाया, “हमें उन ग्रुप्स तक पहुंच नहीं दी जाती, जहां RWA जानकारी और अपडेट साझा करती है. कई बार तो हमें यह भी नहीं पता चलता कि चुनाव कब घोषित हुए और कब करवा दिए गए.”

इन आरोपों को खारिज करते हुए RWA ने कहा कि उन्होंने कभी सोसाइटी सदस्यों के लिए अलग ग्रुप नहीं बनाए. उनके अनुसार, ये ग्रुप निवासी खुद आपसी बातचीत के लिए बनाते हैं. उन्होंने कहा कि जानकारी MyGate और NoBrokerHood जैसे सोसाइटी मैनेजमेंट ऐप्स के जरिए साझा की जाती है.
सेक्टर-82 की एक सोसाइटी के RWA सदस्य ने कहा, “सदस्य इन ऐप्स के जरिए जुड़े रहते हैं और RWA कोई अलग ग्रुप नहीं बनाती. हम सिर्फ इन ऐप्स पर नोटिस के जरिए जानकारी देते हैं और EWS निवासियों को भी उनके लिए जरूरी हर जानकारी दी जाती है.”
जनता फ्लैट पॉकेट-7 नाम के इस हाउसिंग ब्लॉक में 843 EWS मकान हैं. कई निवासी पहले यहां किरायेदार बनकर आए थे और बाद में फ्लैट खरीद लिया, हालांकि अब कुछ लोगों को अपने इस फैसले पर पछतावा है.
34 साल के इस व्यक्ति ने कहा कि जब निवासी अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उनकी समस्या के समाधान में अक्सर कई महीने या कई साल लग जाते हैं.
उन्होंने कहा, “हमने अपनी तरफ की बाउंड्री वॉल की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की है, लेकिन सालों बीत गए और हमें सिर्फ आश्वासन और नई तारीखें ही मिलती हैं. कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम अछूत हैं, जिस तरह RWA हमारे साथ अनदेखी वाला व्यवहार करती है.”
जनता फ्लैट के निवासियों की एक और शिकायत यह है कि RWA और सोसाइटी से जुड़े अन्य अधिकारी उनकी अनदेखी करते हैं. उनका कहना है कि EWS परिवारों को सोसाइटी के मामलों या सामुदायिक गतिविधियों में बहुत कम शामिल किया जाता है.
एक अन्य निवासी ने कहा, “वे हमें किसी भी मामले, त्योहार या सोसाइटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं करते और न ही हमारे लिए अलग से कुछ आयोजित करते हैं.”
‘हमारे बच्चों को कॉमन पार्क में खेलने नहीं दिया जाता’
कई सोसाइटियों में EWS आवास मुख्य रिहायशी परिसर के बाहर, उसके बिल्कुल बगल में या आलीशान इमारतों के पीछे बनाए जाते हैं. कुछ मामलों में EWS फ्लैट उसी परिसर के अंदर होते हैं, लेकिन अलग टावरों में बनाए जाते हैं.
ब्रिस्क लुंबिनी में 272 सामान्य फ्लैट हैं और उसी परिसर में एक अलग टावर में 48 EWS फ्लैट बने हुए हैं, जहां EWS निवासी भेदभाव और साझा सुविधाओं के इस्तेमाल पर रोक की बात करते हैं, वहीं कई अन्य निवासी इन आरोपों को गलत बताते हैं.
सोसाइटी के EWS निवासियों का आरोप है कि उन्हें अपने बच्चों को कॉमन पार्क में खेलने तक की अनुमति नहीं है.
नाम न बताने की शर्त पर एक EWS निवासी ने कहा, “आप हमारे बच्चों को कभी सामान्य ब्लॉकों में रहने वाले बच्चों के साथ खेलते नहीं देखेंगे. हमारे बच्चों को कॉमन पार्क में खेलने तक की इजाजत नहीं है, बाकी सुविधाओं का इस्तेमाल करना तो बहुत दूर की बात है.”
साझा सुविधाओं के इस्तेमाल पर बात करते हुए एक अन्य EWS निवासी ने कहा कि जिम, क्लब हाउस और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं उन लोगों के लिए होती हैं जो मेंटेनेंस और सदस्यता शुल्क देते हैं. उन्होंने कहा कि कई सोसाइटियों में तो किरायेदारों को भी इन सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होती, इसलिए EWS किरायेदारों पर भी वही नियम लागू होते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि कई सोसाइटियों में EWS निवासी या तो मेंटेनेंस शुल्क नहीं देते या सिर्फ बहुत कम राशि देते हैं, जो उनके निर्धारित क्षेत्र के रखरखाव के लिए होती है. उनके अनुसार, सभी सुविधाएं मुफ्त में देना सोसाइटी का रखरखाव मुश्किल बना देगा और उन निवासियों के साथ भी अन्याय होगा जो भारी मेंटेनेंस शुल्क देते हैं.
उन्होंने कहा, “अगर हर साझा सुविधा बिना किसी शुल्क के सभी के लिए खोल दी जाए, तो इन सुविधाओं का रखरखाव करना मुश्किल हो जाएगा. इससे उन लोगों और बिना योगदान दिए सुविधाओं का इस्तेमाल करने वालों के बीच विवाद भी पैदा हो सकते हैं, जो मेंटेनेंस और सदस्यता शुल्क देते हैं.”
विवाद
द्वारका सेक्टर-14 के पॉकेट-5 स्थित द्वारका ग्रीन्स हाउसिंग सोसाइटी में पिछले दो साल से EWS फ्लैटों और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग (LIG और MIG) फ्लैटों के बीच लगाई गई लोहे की बाड़ को लेकर विवाद चल रहा है.
26 अप्रैल 2024 को, सोसाइटी के अंदर पार्किंग को लेकर EWS, LIG और MIG निवासियों के बीच होने वाले विवादों को नियंत्रित करने के लिए DDA ने लोहे की बाड़ लगवाई थी.
जब मजदूर यह बाड़ बना रहे थे, तब EWS निवासी मौके पर इकट्ठा हो गए और इसका विरोध करने लगे.
जल्द ही इस कदम के खिलाफ शिकायतें होने लगीं, क्योंकि DDA अधिकारी सोसाइटी के अंदर EWS टावरों को बाकी रिहायशी ब्लॉकों से अलग करने के लिए बाड़ बना रहे थे. EWS निवासियों ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे सामाजिक भेदभाव बढ़ेगा और पार्क, साझा जगहों तथा खासकर कॉमन पार्किंग तक उनकी पहुंच सीमित हो जाएगी.
सोसाइटी के एक निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “ऐसी हाउसिंग योजनाओं का मकसद यह होता है कि समाज के सभी वर्ग साथ रहें, लेकिन यहां EWS निवासियों को फिर से उनके साझा जगहों के अधिकारों से अलग करने के लिए दीवार बनाई जा रही है.”
EWS निवासियों ने DDA के इस समाधान का विरोध किया, जिसमें अलग-अलग हिस्सों को बांटने के लिए दीवार बनाने की बात थी. आखिरकार, मामला द्वारका जिला अदालत पहुंच गया और DDA ने बाड़ बनाने का अधूरा काम छोड़ दिया.
उन्होंने कहा, “जहां दीवार बनाई जा रही थी, वह एक साझा पार्किंग क्षेत्र है. वे यह मानकर दीवार बना रहे हैं कि EWS मकान मालिकों को पार्किंग की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास कार नहीं होती.”

फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित ओजोन पार्क में EWS निवासी अपने अधिकारों के लिए सिर्फ RWA से ही नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि उन्होंने कानूनी कार्रवाई के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई है.
ओजोन पार्क के 150 से अधिक निवासियों ने हरियाणा के सोसाइटी रजिस्ट्रार जनरल और स्टेट रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज को संयुक्त शिकायत दी. उन्होंने आरोप लगाया कि EWS निवासियों को सोसाइटी चुनावों में मतदान का अधिकार नहीं दिया जा रहा है.
फरीदाबाद में वकील सतिंदर दुग्गल के कार्यालय में बैठे निवासियों ने बताया कि RWA लगातार EWS निवासियों को चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने के अधिकार से वंचित करती रही है.
एक शिकायतकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “RWA हमें सोसाइटी का हिस्सा तक नहीं मानती. हमें यह भी नहीं पता चलता कि चुनाव कब घोषित हुए और कब हुए, क्योंकि वे हमें किसी बात की जानकारी नहीं देते.”
हरियाणा अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट, 2012 के अनुसार, जो EWS निवासी कानूनी रूप से फ्लैट के मालिक हैं, उन्हें आम तौर पर सोसाइटी चुनावों में भाग लेने, वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार होता है.
निवासियों ने यह भी मांग की कि अगर उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया जाता, तो उनके लिए अलग EWS RWA बनाई जाए. इनमें से ज्यादातर निवासी अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों से हैं. उनका आरोप है कि रजिस्ट्रार कार्यालय में कई शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई है.
सोसाइटी के एक अन्य EWS निवासी ने कहा, “हमें इन गेटेड सोसाइटियों में सिर्फ घर मिले हैं, लेकिन हमारे अधिकार और सम्मान अब भी नहीं मिले हैं. इतनी समस्याओं और भेदभाव का सामना करने के बाद भी हम खुलकर विरोध नहीं कर सकते, क्योंकि फिर वे हमें और ज्यादा परेशान करने लगेंगे.”
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