नई दिल्ली: छब्बीस साल के एस ज्यादा पुराने और बड़े IIM जैसे IIM अहमदाबाद और IIM बेंगलुरु में दाखिला नहीं ले पाए, इसलिए उन्होंने नए IIM में से एक IIM संबलपुर को चुना. उनके लिए सिर्फ IIM का टैग और उससे मिलने वाला स्टेटस ही मायने नहीं रखता था, बल्कि दिल्ली में कैंपस होना भी बड़ी वजह थी.
जुलाई 2025 में एस उन 45 छात्रों में थे, जिन्होंने ओडिशा के IIM संबलपुर के दिल्ली सेंटर में दो साल के MBA in Business Analytics में दाखिला लिया. उन्होंने करीब 18.2 लाख रुपये फीस दी. छात्रों का कहना है कि उन्हें यह कोर्स एक फुल-टाइम रेजिडेंशियल प्रोग्राम के तौर पर बताया गया था. उन्हें एक बड़े और आधुनिक कैंपस की तस्वीर दिखाई गई थी. लेकिन जल्द ही यह तस्वीर बदल गई और छात्रों की लड़ाई शुरू हो गई.
वसंत कुंज में अच्छा-खासा कैंपस था, लेकिन IIM संबलपुर के छात्रों के लिए सिर्फ दो क्लासरूम थे. यह जगह Institute for Studies in Industrial Development (ISID) की है. इसके कैंपस में कई दूसरी संस्थाएं भी हैं. छात्रों का कहना है कि उन्हें लगा था कि वे पूरे कैंपस की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं था. उन्हें लाइब्रेरी इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी. कैंटीन दूसरी संस्थाओं के साथ साझा थी. और हॉस्टल भी नहीं था.
सेकंड ईयर के इस स्टूडेंट ने कहा, “जब हमने दाखिला लिया था, तब IIM संबलपुर का दिल्ली कैंपस तैयार भी नहीं था. इसलिए पहले तीन महीने हमें ओडिशा के संबलपुर स्थित मुख्य कैंपस में रहना पड़ा. जब हम तीन महीने बाद दिल्ली लौटे तो हमारे लिए यह बड़ा झटका था. कैंपस के नाम पर हमें सिर्फ एक बड़ा हॉल दिया गया है, जिसे दो क्लासरूम में बांट दिया गया है. इसके अलावा यहां कुछ भी नहीं है.” उनके पिता दिल्ली में कारोबारी हैं.
आगरा और मुजफ्फरपुर से लेकर कोल्हापुर और हैदराबाद तक के छात्रों ने कई महीनों तक IIM संबलपुर प्रशासन से शिकायत की. उन्होंने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों से संपर्क किया और शिक्षा मंत्रालय को भी लिखा. उन्होंने RTI दाखिल करने की धमकी भी दी. अब वे दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए हैं. छात्रों ने या तो फीस कम करने या उन्हें IIM संबलपुर के मुख्य कैंपस में भेजने की मांग की है.
दिल्ली सेंटर की यह कहानी अब कुछ ऐसी लगती है जो दूसरे नए सरकारी संस्थानों में भी देखने को मिली है. कई बड़े और नामी सरकारी संस्थान अपने ब्रांड के भरोसे नए कैंपस और कोर्स शुरू करते हैं, लेकिन जब तक छात्र पहुंचते हैं, तब तक कैंपस, शिक्षक और बाकी सुविधाएं पूरी तरह तैयार नहीं होतीं. एम्स मदुरई कई साल से एक अस्थायी कैंपस से चल रहा है. अरुणाचल प्रदेश के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट के पहले बैच के छात्रों ने पिछले साल प्रदर्शन किया था. उनका कहना था कि वे लगभग एक निर्माण स्थल जैसी जगह पर पढ़ाई कर रहे हैं. एएसआई के पंडित दीनदयाल उपाध्या इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी में समस्या अलग थी. वहां नया और अच्छी सुविधाओं वाला कैंपस तो था, लेकिन स्थायी शिक्षक नहीं थे और इन सबका असर आखिरकार छात्रों पर पड़ता है.
वसंत कुंज के कैंपस में नाराज़ छात्रों का कहना है कि दिल्ली में उन्हें जिस IIM अनुभव की उम्मीद थी, वह उन्हें नहीं मिला. उन्हें उम्मीद थी कि यहां भी IIM लखनऊ के नोएडा कैंपस जैसा मॉडल होगा. IIM लखनऊ का नोएडा में 20 एकड़ का कैंपस है, जहां हॉस्टल भी हैं. कई छात्रों के परिवारों ने 20 लाख रुपये या उससे ज्यादा का लोन लिया है, लेकिन यहां ज्यादातर सुविधाएं ISID कैंपस में मौजूद दूसरी संस्थाओं के साथ साझा करनी पड़ रही हैं. इनमें IGL और Solis Nature भी शामिल हैं.
कैंटीन में सेकंड ईयर साल के पांच छात्र जींस और टी-शर्ट पहने बैठे थे. उनसे कुछ कुर्सियों की दूरी पर ऑफिस में काम करने वाले लोग अपनी शिफ्ट और प्रोजेक्ट की डेडलाइन को लेकर जोर-जोर से बात कर रहे थे. एक छात्र ने आह भरते हुए कहा, “कुछ साल बाद हमारी ज़िंदगी भी ऐसी ही होगी. मैं अभी यह सब नहीं जानना चाहता.”
IIM संबलपुर के निदेशक महादेव प्रसाद जायसवाल का कहना है कि दिल्ली सेंटर अभी तैयार होने की प्रक्रिया में है.
जायसवाल ने दिप्रिंट से कहा, “यह एक अस्थायी कैंपस है. नई व्यवस्था तैयार करने में समय लगता है. हम लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार कर रहे हैं. हम छात्रों को खराब सुविधाएं क्यों देना चाहेंगे? इससे हमारे अपने ब्रांड को नुकसान होगा.”
दिप्रिंट दिल्ली सेंटर की प्रमुख काकोली सेन को फोन और ईमेल के जरिए संपर्क किया है. उनका जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
‘आवासीय कार्यक्रम’, लेकिन रहने की जगह नहीं
ISID कैंपस की लाल ईंटों से बनी इमारतों के चारों तरफ चौड़ी सड़कें, दोनों तरफ लगे पेड़ और खूबसूरत तरीके से तैयार किए गए मैदान हैं. बेसमेंट पर लगे एक कांच के दरवाजे पर IIM संबलपुर का नाम और लोगो लगा है. यह दरवाजा दो मॉडर्न लेक्चर रूम की ओर जाता है, जिनमें से हर एक में करीब 60 छात्र बैठ सकते हैं, लेकिन छात्रों के लिए यह सब काफी नहीं है. उनका कहना है कि उन्होंने जिस चीज के लिए पैसे दिए हैं, उन्हें वह मिलनी चाहिए.
IIM संबलपुर की 2024-26 की प्लेसमेंट पुस्तिका में दिल्ली सेंटर का दो साल का MBA in Business Analytics “पूर्णकालिक आवासीय कार्यक्रमों” की सूची में शामिल है. इसके बाद जून 2025 में IIM संबलपुर के प्रवेश कार्यालय की ओर से जारी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के दस्तावेज़ में इसे थोड़ा साफ किया गया. इसमें कहा गया था कि महिला उम्मीदवारों के लिए “वातानुकूलित, दो लोगों के साझा इस्तेमाल वाला कैंपस में रहने का इंतजाम” उपलब्ध होगा.
लेकिन कैंपस में किसी के लिए रहने की कोई जगह नहीं है. छात्रों के लिए यह सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है.
जब पहला बैच दिल्ली पहुंचा तो छात्रों को पता चला कि IIM का कोई छात्रावास ही नहीं है. इसके बजाय उन्हें किशनगढ़ में निजी तौर पर चलने वाली भुगतान-आधारित अतिथि आवास व्यवस्था में रखा गया. किशनगढ़ एक शहरी गांव है और कैंपस से करीब 5 किलोमीटर दूर है. वहां TERI School of Advanced Studies और एक विमानन स्कूल के छात्रों के साथ IIM संबलपुर के छात्रों को भी रखा गया था. 18.2 लाख रुपये की कार्यक्रम फीस के अलावा छात्रों को हर तीन महीने में रहने के लिए 70,000 रुपये देने पड़े. आने-जाने का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ा.
करीब 19 लाख रुपये का कर्ज लेकर यह कार्यक्रम करने वाले एस ने कहा, “छात्रावास में रहना अनिवार्य किया गया था.” उन्होंने आरोप लगाया कि इस इमारत का इस्तेमाल नौकरीपेशा लोगों के लिए अतिथि गृह के तौर पर भी किया जा रहा था.
मैं IIM जम्मू या किसी दूसरे नए IIM में जा सकता था. मैंने इसे इसलिए चुना क्योंकि मुझे लगा था कि दिल्ली में बड़ा कैंपस होगा और अनुभव बेहतर होगा. मुझे उम्मीद थी कि यहां पढ़ाई और शोध का स्तर IIM लखनऊ के सैटेलाइट कैंपस जैसा होगा.
—सेकंड ईयर के MBA स्टूडेंट
कुछ छात्रों को खाने और रहने की व्यवस्था के तरीके को लेकर भी परेशानी थी. जनवरी तक मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों को पुलिस बुलानी पड़ी.
छात्र ने कहा, “मालिक का हमारे साथ झगड़ा हो गया और उसने छात्रावास में करीब 50-100 लोगों को बुला लिया. हमें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होने वाला है.”
छात्र ने आरोप लगाया कि मालिक अपने ऑफिस में बंदूक रखता था.
छात्रों का आरोप है कि IIM संबलपुर ने उनकी शिकायतों में उनका साथ नहीं दिया और कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं हुई. झड़प के बाद, एस ने कहा कि दो छात्रों को रहने की जगह छोड़ने के लिए कहा गया और उन्हें फीस का पैसा भी वापस नहीं मिला. अप्रैल में बैच ने इंटर्नशिप शुरू करने के लिए वह रहने की जगह छोड़ दी. जब वे दूसरे साल के लिए वापस लौटे तो उन्हें अपने रहने का इंतजाम खुद करना पड़ा.
दिल्ली का फायदा भी नहीं, चार दीवारों में घिरे छात्र
कई छात्रों के लिए इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत दिल्ली में होना थी. IIM संबलपुर की 2024-26 की पुस्तिका में दिल्ली सेंटर को उसका “रणनीतिक केंद्र” बताया गया है. पुस्तिका में यह भी कहा गया है कि यहां छात्रों को “कॉरपोरेट नेटवर्क, नीति-निर्माताओं और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग” तक पहुंच मिलेगी. अब यही वादा पहले बैच के छात्रों के लिए परेशानी की एक और वजह बन गया है.
दो साल का MBA in Business Analytics अभी अपने पहले चरण में है और अभी तक कोई बैच ग्रेजुएट नहीं हुआ है, लेकिन छात्रों का आरोप है कि इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के मामले में उन्हें मुख्य कैंपस के बराबर मौके नहीं मिल रहे हैं. उनके मुताबिक, जो कंपनियां संबलपुर के मुख्य कैंपस में आती हैं, जरूरी नहीं कि वे दिल्ली के छात्रों को भी भर्ती करें.
सेकंड ईयर स्टूडेंट ने कहा, “सारी अच्छी कंपनियां मुख्य कैंपस जाती हैं. हमारे हिस्से में जो बचता है, वह आता है. इंटर्नशिप के लिए भी हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे.”
कुछ छात्र पूरे शैक्षणिक अनुभव से भी नाराज हैं. उनका कहना है कि कुछ मौकों पर एक प्रोफेसर ने कुछ कक्षाएं पढ़ाईं और फिर वही विषय पढ़ाने के लिए दूसरा प्रोफेसर आ गया.
दिल्ली-एनसीआर के रहने वाले इस छात्र ने कहा, “अब मुझे लगता है कि मेरे पास और भी विकल्प थे. मैं IIM जम्मू या किसी दूसरे नए IIM में जा सकता था. मैंने इसे इसलिए चुना क्योंकि मुझे लगा था कि दिल्ली में बड़ा कैंपस होगा और अनुभव बेहतर होगा. मुझे उम्मीद थी कि यहां पढ़ाई और शोध का स्तर IIM लखनऊ के सैटेलाइट कैंपस जैसा होगा.”
उनके मध्यमवर्गीय परिवार ने फीस भरने के लिए 15 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज लिया है.
इस छात्र के लिए पुस्तिका और वेबसाइट में दिखाई गई चमकदार तस्वीरों ने परेशानी को और बढ़ा दिया है.
उन्होंने कहा, “तस्वीरों में पूरा ISID कैंपस दिखाते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि हमारे लिए सिर्फ डिब्बे होंगे.”
‘संस्थान की चुप्पी’ से बढ़ता गुस्सा
फरवरी तक छात्रों का गुस्सा काफी बढ़ चुका था.
9 फरवरी को छात्रों ने अपने संयुक्त ईमेल खाते, ‘Academic Committee MBA-BA 2025-27’, से IIM संबलपुर के निदेशक, डीन और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को ईमेल भेजा. इसमें उन्होंने कहा कि पिछली सामूहिक शिकायतों पर “लगातार संस्थान की चुप्पी” के कारण वे अब अपनी शिकायतों को आगे बढ़ा रहे हैं. ईमेल का विषय था: शिकायत समाधान की अंतिम समीक्षा–MBA BA बैच.
इस पत्र में छात्रों ने अपनी कई शिकायतें गिनाईं. इसमें किशनगढ़ की रहने की जगह के मालिक के साथ हुए विवाद का भी ज़िक्र था. छात्रों ने कहा कि रहने की जगह छोड़ने वाले छात्रों को अभी तक पैसा वापस नहीं मिला है और उनके ईमेल का भी कोई जवाब नहीं दिया गया. उन्होंने प्लेसमेंट में मदद की कमी का भी मुद्दा उठाया. छात्रों ने लिखा कि दिल्ली में बेहतर संपर्क और उद्योगों तक पहुंच के दावों के बावजूद कोई भर्ती करने वाला व्यक्ति दिल्ली कैंपस में खुद नहीं आया है. साथ ही, दिल्ली में ऐसा कोई विशेष अवसर भी नहीं मिला है जिसके लिए छात्रों का यहां शारीरिक रूप से मौजूद रहना जरूरी हो.
छात्रों की दूसरी शिकायतों में संबलपुर से आने वाले “घूम-घूमकर पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था” पर निर्भरता और मुख्य कैंपस के कार्यक्रमों से खुद को अलग महसूस करना भी शामिल था.
ईमेल में छात्रों ने चेतावनी दी, “हम इसे इस मामले को अंदरूनी तौर पर सुलझाने का संस्थान को दिया गया आखिरी मौका मानते हैं. अगर इन शिकायतों पर लगातार चुप्पी, देरी या उन्हें दूर करने से इनकार जारी रहा, तो हमारे पास उपलब्ध सभी औपचारिक, नियामकीय और बाहरी रास्तों से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.”
कुछ दिन बाद छात्रों ने याद दिलाने वाला ईमेल भेजा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद छात्रों ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, शिक्षा मंत्रालय और दूसरे सरकारी दफ्तरों को एक और पत्र भेजकर मामला आगे बढ़ाया. उन्होंने लिखा कि संस्थान के अंदर शिकायत दूर करने के सभी रास्ते आजमा लिए गए हैं. छात्रों का आरोप है कि उन्हें चेतावनी दी गई थी कि अगर उन्होंने अपनी शिकायतें उठाना जारी रखा तो उन्हें “गंभीर शैक्षणिक परिणामों” का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें संस्थान से निष्कासन भी शामिल है.
जुलाई 2026 में छात्रों के एक समूह ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की. इसमें उन्होंने कैंपस की सुविधाओं, शिक्षकों और फीस से जुड़ी अपनी सभी शिकायतें रखीं. उनकी मांग है कि उन्हें वापस संबलपुर कैंपस भेजा जाए या फीस का कुछ हिस्सा वापस किया जाए. छात्रों ने IIM लखनऊ के नोएडा कैंपस की सुविधाओं का भी हवाला दिया है, ताकि दोनों सैटेलाइट कैंपस में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं का अंतर दिखाया जा सके.
अपना पक्ष मजबूत करने के लिए छात्रों ने सैटेलाइट-कैंपस मॉडल पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक बयान का हवाला दिया. उस समय मंत्रालय ने कहा था कि सरकार की IIMs, IITs या JNU के सैटेलाइट कैंपस या शाखाएं खोलने की “कोई योजना नहीं” थी और नीति के तौर पर भी सरकार ऐसे कैंपस को बढ़ावा नहीं देती थी. छात्रों का तर्क है कि राष्ट्रीय महत्व वाले संस्थानों के प्रमुख कार्यक्रम ऐसी सैटेलाइट सुविधाओं से नहीं चलाए जाने चाहिए जो पूरी तरह विकसित नहीं हैं.
10 अगस्त 2026 को दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में IIM संबलपुर के प्रतिवादियों ने कहा कि वे “रिट याचिका में लगाए गए सभी आरोपों और दावों का स्पष्ट रूप से विरोध और खंडन करते हैं”.
संस्थान ने कहा कि MBA-Business Analytics कार्यक्रम “किसी भी समय आवासीय कार्यक्रम नहीं था”. उसका तर्क है कि छात्रों ने खुद इसे आवासीय कार्यक्रम मान लिया था और संस्थान ने ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया था. संस्थान ने यह भी कहा कि छात्रों को रहने की जगह ढूंढने में जो मदद दी गई थी, वह सिर्फ एक सहायता थी. वह IIM की ओर से चलाया जाने वाला छात्रावास नहीं था.
जवाबी हलफनामे में यह भी कहा गया कि IIM एक्ट के तहत बॉर्ड ऑफ गवर्नर्स को देश के “किसी भी हिस्से” में प्रबंधन अध्ययन के केंद्र खोलने का अधिकार है और दिल्ली सेंटर को इसी के तहत मंजूरी दी गई थी.
संस्थान ने दिल्ली और संबलपुर कैंपस के बीच छात्रों की तुलना को भी खारिज कर दिया. दिल्ली सेंटर को “उभरता हुआ शैक्षणिक केंद्र” बताते हुए, जिसे अलग-अलग चरणों में विकसित किया जा रहा है, संस्थान ने कहा कि अलग-अलग कैंपस में बुनियादी ढांचे, कार्यक्रम की रूपरेखा और पढ़ाने के तरीके अलग होना गैरकानूनी नहीं है. दिप्रिंट के पास मौजूद इस दस्तावेज में दिल्ली सेंटर में बनाई जा रही नई बैठने की जगह और निर्माणाधीन जिम की तस्वीरें भी शामिल थीं. इन्हें इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया गया कि कैंपस में सुविधाएं लगातार तैयार की जा रही हैं.
जवाबी हलफनामे में आगे कहा गया, “स्थानांतरण की मांग करने वाली मौजूदा याचिका इसलिए अपने हित में, विरोधाभासी और बाद में तैयार की गई है…”
यानी अब यह विवाद सिर्फ सुविधाओं, फीस या शिक्षकों तक सीमित नहीं रह गया है. सवाल यह भी है कि आखिर किस तरह की जगह को IIM कैंपस माना जा सकता है और माना जाना चाहिए. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति तेजस करियाकर रहे हैं. अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को है, जिसमें अंतिम दलीलें होने की उम्मीद है.
नए बैच के लिए अलग व्यवस्था
पुराने बैच ने जिन परेशानियों का सामना किया और जिनके खिलाफ आवाज़ उठाई, उनसे नए बैच के छात्रों का उत्साह कम होता नहीं दिख रहा. उन्हें भी IIM का टैग और दिल्ली का पता आकर्षित कर रहा है. फर्क बस इतना है कि नए छात्र इस बार अलग उम्मीदों के साथ यहां पहुंचे हैं.
इस साल मई में संस्थान के छात्र शिकायत दिल्ली केंद्र ने एक ईमेल में लिखा: “MBA-BA कार्यक्रम अब एक गैर-आवासीय कार्यक्रम के तौर पर जारी रहेगा. हाल में इसमें बदलाव किए गए हैं, जो आवासीय मॉडल और उसे ठीक तरह से चलाने में आ रही दिक्कतों को लेकर छात्रों से मिले सुझावों के आधार पर किए गए हैं.”
इस भाषा से IIM संबलपुर का अदालत में दिया गया वह जवाब विरोधाभासी लगता है, जिसमें संस्थान ने कहा था कि कार्यक्रम कभी भी आवासीय था ही नहीं. वहीं अगस्त 2026 की उसकी प्लेसमेंट पुस्तिका में दिल्ली के MBA को अब भी “पूर्णकालिक आवासीय कार्यक्रमों” के तहत रखा गया है.
इन विरोधाभासी बातों के बावजूद, नया बैच जुलाई में पूरी जानकारी के साथ दिल्ली पहुंचा. उन्हें पहले से पता था कि यहां क्या व्यवस्था होगी. दिल्ली-एनसीआर की रहने वालीं 23 साल की एक पहले साल की छात्रा, जिन्होंने करीब एक साल पहले ग्रेजुएशन किया है, ने कहा कि दाखिला लेने से पहले ही उसे पता था कि उसे रहने का इंतजाम खुद करना होगा.
उन्होंने अपनी क्लास की ओर जाते हुए कहा, “मुझे दाखिला लेने से पहले ही पता था कि यह गैर-आवासीय पाठ्यक्रम है, इसलिए मुझे कोई परेशानी नहीं हुई. कैंटीन साझा है, इसलिए हम कभी-कभी दोपहर के खाने के लिए मध्यांचल (मध्य प्रदेश भवन) चले जाते हैं. लाइब्रेरी भी उपलब्ध हो जाएगी, इसलिए ठीक है.”
इस साल 55 छात्रों ने कोर्स में एडमिशन लिया, जबकि पहले बैच में 45 छात्र थे. इस बार छात्रों ने सीधे दिल्ली कैंपस से कोर्स शुरू किया और उन्हें पहले ओड़िशा नहीं भेजा गया. महिला छात्रों की संख्या भी दो से बढ़कर 10 हो गई. 2025 में जब पाठ्यक्रम शुरू हुआ था, तब संस्थान ने 70 सीटों का विज्ञापन दिया था. 2026-28 बैच के लिए उसने करीब 60 छात्रों का बैच आकार तय किया.
दाखिला CAT के अंक, शैक्षणिक प्रदर्शन, संबंधित कार्य अनुभव और व्यक्तिगत साक्षात्कार के आधार पर होता है. इस बैच के लिए चार साल की स्नातक डिग्री वाले उम्मीदवारों के लिए योग्यता के बाद एक साल का कार्य अनुभव होना जरूरी नहीं है.
दूसरे साल के एक छात्र ने आरोप लगाया कि ज्यादा छात्रों को दाखिला देने के लिए संस्थान ने दाखिले के मानदंड में ढील दी.
छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ज्यादा दाखिला लेने के लिए संस्थान ने नियम बदल दिए. उदाहरण के लिए, पहले एक साल का कार्य अनुभव जरूरी था, लेकिन नए छात्रों के लिए उन्होंने नए ग्रेजुएट्स को भी चुना है और कार्य अनुभव की जरूरत कम कर दी है. महिला उम्मीदवारों को विविधता अंक दिए गए हैं और हमसे कम परसेंटाइल वाले छात्रों को भी चुना गया है.”
दूसरे साल के छात्रों को जिस लाइब्रेरी का वादा किया गया है, उसे लेकर भी भरोसा नहीं है. उनका कहना है कि नए बैच के छात्रों को दिल्ली सेंटर में आए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, इसलिए उन्होंने उन वादों पर भरोसा नहीं खोया है कि आगे और सुविधाएं दी जाएंगी.
एस ने कहा, “पिछले साल जुलाई में भी पहले बैच को यही बात बताई गई थी, लेकिन एक साल बाद भी लाइब्रेरी नहीं है.”
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