नई दिल्ली: 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आजमाए हुए विधायकों पर भरोसा जताया है. इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल हैं, जो धुरी से चुनाव लड़ेंगे. वहीं, जेल में बंद मंत्री संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिम से टिकट दिया गया है.
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भी कोटकपूरा से उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी ने शनिवार को यह सूची जारी की. पहली सूची से साफ है कि AAP अपने मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है. बाकी 77 उम्मीदवारों के नाम आने वाले दिनों में घोषित किए जाएंगे.
मान ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा था कि 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जल्द जारी की जाएगी. सूची की घोषणा से पहले उन्होंने नई दिल्ली में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के साथ बैठक की थी.
ਆਗਾਮੀ 2027 ਦੀਆਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਚੋਣਾਂ ਲਈ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵੱਲੋਂ 40 ਉਮੀਦਵਾਰਾਂ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਸੂਚੀ ਜਾਰੀ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ…
ਇਹ ਅਗੇਤਾ ਐਲਾਨ ਸਾਡੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਤਿਆਰੀ, ਪਾਰਦਰਸ਼ਤਾ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਕੀਤੇ ਕੰਮਾਂ 'ਤੇ ਸਾਡੇ ਅਟੁੱਟ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦਾ ਪ੍ਰਤੀਕ ਹੈ… ਮੈਨੂੰ ਮੁੜ ਧੂਰੀ ਹਲਕੇ ਤੋਂ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਸੇਵਾ ਕਰਨ ਦਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲਿਆ ਹੈ…
ਸਾਰੇ… pic.twitter.com/9euBQfa9Tt— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) October 31, 2026
उम्मीदवारों की घोषणा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के लोग पिछले पांच साल में किए गए काम से बहुत खुश हैं और चाहते हैं कि भगवंत मान फिर से मुख्यमंत्री बनें.
चार उम्मीदवार 2017 और 2022, दोनों विधानसभा चुनावों में जीत चुके हैं, जबकि 35 पहली बार विधायक बने हैं. पूर्व अकाली नेता हरमीत सिंह संधू, जिन्हें AAP ने तरन तारन से फिर टिकट दिया है, इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. वह AAP के डॉ. कश्मीर सिंह सोहल से चुनाव हार गए थे. सोहल की मौत के बाद संधू AAP में शामिल हो गए और 2025 में उपचुनाव जीतकर विधायक बने.
जिन विधायकों को दूसरी बार टिकट दिया गया है, उनमें गढ़शंकर से जय कृष्ण सिंह रौड़ी, निहाल सिंह वाला से मनजीत सिंह बिलासपुर, कोटकपूरा से कुलतार सिंह संधवां और तलवंडी साबो से बलजिंदर कौर शामिल हैं. संधवां और रौड़ी क्रमशः विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं.
भगवंत मान का नाम सूची में है, लेकिन मंत्रिमंडल के किसी अन्य सदस्य को टिकट नहीं दिया गया है. हालांकि, सूची में चार पूर्व मंत्री शामिल हैं. इनमें अजनाला से कुलदीप सिंह धालीवाल, होशियारपुर से ब्रह्म शंकर शर्मा (जिम्पा), अमृतसर दक्षिण से डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर और करतारपुर से बलकार सिंह शामिल हैं.
लुधियाना पश्चिम से फिर उम्मीदवार बनाए गए अरोड़ा को मई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था. वह गुरुग्राम की जेल में बंद हैं.
लुधियाना के उद्योगपति अरोड़ा को AAP ने राज्यसभा भेजा था. हालांकि, जनवरी 2025 में मौजूदा विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी की मौत के बाद लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी. इसके बाद हुए उपचुनाव में AAP ने अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने कांग्रेस नेता भारत भूषण आशु को हराया था.
सिसोदिया ने मामले में आरोपी होने के बावजूद अरोड़ा का नाम सूची में शामिल किए जाने पर सफाई दी. उन्होंने PTI से कहा, “संजीव अरोड़ा की बात करें तो BJP आजकल आरोप लगाकर चुनाव लड़ती है. संजीव अरोड़ा पंजाब के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे थे. BJP ने उन्हें एक फर्जी मामले में गिरफ्तार किया, क्योंकि उसे राज्य में उनके शुरू किए गए निवेश और काम से परेशानी थी.”
चब्बेवाल सीट पर पार्टी ने इशांक कुमार चब्बेवाल को फिर से उम्मीदवार बनाया है. वह होशियारपुर से सांसद राज कुमार चब्बेवाल के बेटे हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज कुमार ने विधानसभा सीट छोड़ दी थी. इसके बाद उनके बेटे ने उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी.
पार्टी ने चार महिलाओं को भी टिकट दिया है. इनमें नकोदर से इंदरजीत कौर मान, बलाचौर से संतोष कटारिया, मोगा से डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा और तलवंडी साबो से बलजिंदर कौर शामिल हैं. पार्टी ने अनुसूचित जाति (SC) के सात उम्मीदवारों को भी टिकट दिया है.
शनिवार को हुई यह घोषणा अपने समय के लिहाज से भी अहम है. AAP ने एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति अपनाई है और औपचारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से काफी पहले उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए हैं. इससे उम्मीदवारों को अपनी उम्मीदवारी को लेकर स्पष्टता मिलती है और उन्हें दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों के मुकाबले तैयारी शुरू करने का ज्यादा समय मिलता है.
AAP पंजाब में चुनाव के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक तौर पर घोषित करने वाली पहली प्रमुख राजनीतिक पार्टी है. शिरोमणि अकाली दल (SAD) और SAD (वारिस पंजाब दे) की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर कुछ संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन दोनों ने अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.
दूसरी पार्टियों की स्थिति
कांग्रेस के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में देरी नुकसानदायक साबित हो सकती है. इसकी वजह राज्य इकाई में गुटबाजी और अलग-अलग नेताओं के दावे हैं. पार्टी को अलग-अलग गुटों को साथ लेकर चलना होगा और कई नेताओं की चुनाव लड़ने की इच्छा को संभालना होगा. जिन नेताओं को टिकट नहीं मिलेगा, उनके नाराज होने की भी आशंका है.
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दावा किया कि AAP की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची “फर्जी” है.
उन्होंने ANI से कहा, “मुझे लगता है कि यह उन लोगों की सूची है जो पार्टी छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में जा सकते हैं. अमन अरोड़ा और हरपाल चीमा के नाम अब तक क्यों नहीं घोषित किए गए हैं? इससे सवाल उठता है कि क्या उनके टिकट रद्द किए जा सकते हैं. मुझे नहीं लगता कि उनके टिकट रद्द हो सकते हैं, लेकिन पहली सूची में उनके नाम क्यों नहीं हैं?”
उन्होंने कहा, “सिर्फ 40 उम्मीदवारों के नाम क्यों घोषित किए गए हैं? AAP का नाम घोषित करने के बाद उम्मीदवार बदलने का इतिहास रहा है और यह पहली बार नहीं होगा. मुझे लगता है कि ऐसा उन लोगों को पार्टी छोड़ने से रोकने के लिए किया गया है, जिनके दूसरी पार्टियों में जाने का शक है.”
वहीं, अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने संभावित चुनावी गठबंधन और दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी चुनौतियां हैं. सूत्र नवंबर में आधिकारिक घोषणा के संकेत दे रहे हैं, लेकिन उम्मीदवारों की पहली सूची साल के आखिर तक ही आने की उम्मीद है.
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि AAP ने उम्मीदवारों की पहली सूची में “खालसा पंथ की भावनाओं की पूरी तरह अनदेखी” की है.
बादल ने कहा, “पार्टी ने मनविंदर सिंह गियासपुरा को विधानसभा का टिकट दिया है, जिन्हें श्री अकाल तख्त साहिब ने ‘तनखैया’ घोषित किया था. वह संजीव अरोड़ा जैसे लोगों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है, जो भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पकड़े जाने के बाद फिलहाल जेल में हैं. ऐसे लोगों को इनाम देने का मतलब है कि AAP पिछले पांच साल से भी ज्यादा खराब शासन की तैयारी कर रही है.”
In its first list of 40 candidates, @AamAadmiParty has shown complete disregard for the sentiments of the Khalsa Panth.
▪️ It has given a Vidhan Sabha ticket to Manwinder Singh Giaspura, who was declared ‘tankhaiya’ by Sri Akal Takht Sahib.
▪️ It is also fielding people like… pic.twitter.com/oLQRx1UcVm— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) October 31, 2026
जहां तक SAD-WPD की बात है, तो पार्टी खुद भी विवादों में घिरी हुई है. शुक्रवार को पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भंग कर दिया गया था. जब ड्राफ्टिंग कमेटी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई तो पार्टी नेतृत्व ने कमेटी के सदस्यों को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में निलंबित कर दिया.
जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह इस राजनीतिक समूह का नेतृत्व कर रहे हैं. अमृतपाल फिलहाल डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं.
चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित SGGS कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रोफेसर हरजेश्वर सिंह ने दिप्रिंट से कहा कि AAP की पहली सूची “नियमित, ज्यादातर विवादों से दूर और वफादार नेताओं से भरी हुई” है.
उन्होंने कहा, “दूसरी पार्टियों के मुकाबले यह सूची जल्दी आई है, लेकिन AAP यही चाहती है. वह आम तौर पर चुनावी मुकाबले में पहले उतरती है और माहौल बनाने की कोशिश करती है. अब दूसरी पार्टियों को भी जवाब देना होगा.”
चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित DAV कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग की कनवलप्रीत कौर के मुताबिक, पहली सूची को सभी मौजूदा विधायकों के लिए अंतिम समर्थन नहीं समझना चाहिए.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “अभी 77 सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित होने बाकी हैं. असली परीक्षा यह होगी कि पार्टी मौजूदा विधायकों को टिकट देना जारी रखती है या उन सीटों पर उम्मीदवार बदलती है, जहां सत्ता विरोधी माहौल, स्थानीय नाराजगी या चुनावी समीकरणों के कारण बदलाव जरूरी हो सकता है.”
उन्होंने कहा, “फिलहाल AAP ने साफ संदेश दिया है कि वह अपनी मौजूदा टीम के साथ है और अपने उम्मीदवारों को तैयारी के लिए पहले से समय दे रही है. बाकी सूचियों में ऐसे चौंकाने वाले नाम आते हैं या नहीं, जिनसे पहली 40 उम्मीदवारों की सूची काफी हद तक बची रही है, इससे पता चलेगा कि पार्टी इस रणनीति को कितनी आगे तक अपनाती है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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