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Friday, 12 April, 2024
होमफीचरएक साल बाद, कलाक्षेत्र आज भी वैसा है, ‘आक्रामक व्यंग्य’, POSH पैनल गठित पर कोई छात्र नहीं

एक साल बाद, कलाक्षेत्र आज भी वैसा है, ‘आक्रामक व्यंग्य’, POSH पैनल गठित पर कोई छात्र नहीं

चेन्नई में कलाक्षेत्र फाउंडेशन में चार कर्मचारियों के खिलाफ छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों के एक साल बाद, कैंपस अभी भी ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ कर रहा है.

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नई दिल्ली: चेन्नई में कलाक्षेत्र फाउंडेशन के रुक्मिणी देवी कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स के कैंपस में अभी भी बेचैनी भरा माहौल है. एक साल बीत चुका है जब प्रमुख भरतनाट्यम और कर्नाटक संगीत अकादमी को कई छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों से झटका लगा था और इसने अपने पीछे एक खंडित संस्थान छोड़ दिया था.

21 मार्च 2023 को दिप्रिंट ने सबसे पहले कलाक्षेत्र के चार स्टाफ सदस्यों के खिलाफ आरोपों पर रिपोर्ट की, जिसमें सहायक प्रोफेसर हरि पद्मन भी शामिल थे, जिन्हें छात्राओं और शिक्षकों ने “कैंपस में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति” बताया था. दिप्रिंट की रिपोर्ट ने मुद्दे पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया और अंततः आरोपी को निलंबित या बर्खास्त कर दिया गया.

आक्रोश के बाद कैंपस में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं. नई मानक संचालन प्रक्रियाओं को बनाने की ज़रूरत का हवाला देते हुए पिछले साल पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम में प्रवेश को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन इस फैसले ने मुख्य रूप से चौथे वर्ष के छात्रों को प्रभावित किया, जिनमें से कई ने मार्च 2023 में कलाक्षेत्र के प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिससे उनके लिए संस्थान में उच्च अध्ययन के लिए कोई रास्ता नहीं बचा.

इसके अलावा, कलाक्षेत्र द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र जांच पैनल, जस्टिस कन्नन समिति ने संस्थान को प्रदर्शन के बजाय नृत्य निर्देश पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा. परिणामस्वरूप, वरिष्ठ छात्राओं को प्रदर्शनों की सूची में प्रदर्शन करने से प्रतिबंधित कर दिया गया, एक निर्णय ऐसा फैसला जो कैंपस में आमतौर पर नहीं लिया गया था.

इस विवाद ने कैंपस को प्रबंधन समर्थकों और विरोधियों में भी विभाजित कर दिया. एक तरफ फैकल्टी मेंबर्स हैं जो मुख्य आरोपी पद्मन के प्रति सहानुभूति रखते हैं और दूसरी तरफ वे हैं जिन्होंने कैंपस में उत्पीड़न और चुप कराने की व्यापक संस्कृति के खिलाफ विरोध जताया.

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कैंपस से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि विरोध करने वालीं छात्राओं को स्पष्ट रूप से “निशाना” बनाया जा रहा है और कमज़ोर किया जा रहा है.

एक सूत्र ने दावा किया, “वरिष्ठ पीजी छात्राओं और चौथे वर्ष की छात्राओं से कहा गया था कि अगर वे फरवरी के फेस्टिवल में परफॉर्म करना चाहती हैं तो विरोध करने के लिए माफीनामा पेश करें.” उन्होंने कहा कि छात्राओं ने इनकार कर दिया और इसलिए उन्हें परफॉर्म करने की अनुमति नहीं दी गई.

सूत्र ने बताया कि क्लास का माहौल उन छात्राओं के लिए प्रतिकूल हो गया था जिन्होंने विरोध जताया था. उन्होंने आरोप लगाया, “छात्राओं को अक्सर वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा आक्रामक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, जैसे “आप मुझसे सलाह क्यों मांग रहे हैं?”, “आपको हमारे खिलाफ विरोध में बैठना चाहिए!”

कलाक्षेत्र प्रबंधन द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में कोई नया दाखिला स्वीकार नहीं करने के कारण, इसका खामियाजा बड़े पैमाने पर अंतिम वर्ष की छात्राओं को उठाना पड़ा है, जिन्होंने पिछले साल विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में लटक गई थी. एक पूर्व छात्रा ने दिप्रिंट को बताया, “हमने कलाक्षेत्र को पीछे छोड़ दिया है और अब इस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं. हम आगे बढ़ चुके हैं.”

दिप्रिंट ने फोन कॉल और ईमेल के जरिए सुरेश चिक्कला से संपर्क की कोशिश की, जिन्होंने पिछले दिसंबर में कलाक्षेत्र के निदेशक का पद संभाला था, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.


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प्रभाव

नार्थकी पत्रिका की प्रकाशक अनीता रत्नम, जिन्होंने कलाक्षेत्र में उत्पीड़न के मुद्दों के खिलाफ मुखर रुख अपनाया और छात्राओं के समर्थन में सामने आईं, ने कहा कि उन्होंने पिछले साल अपने कई दोस्तों को खो दिया है. रत्नम ने दिप्रिंट को बताया, “मैं इस बात से हैरान हूं कि मेरी कई महिला मित्रों ने मुझसे बात करना बंद कर दिया है. कई लोगों को मुझसे यह उम्मीद नहीं थी कि मैं छात्राओं का पक्ष लूंगी, लेकिन मेरे लिए यह वामपंथी या दक्षिणपंथी नहीं था, मैं सिर्फ छात्राओं की सुरक्षा के लिए खड़ी रहना चाहती थी.”

रत्नम ने कहा कि विवाद का एक सकारात्मक परिणाम यह था कि छात्राओं के बीच यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) अधिनियम और उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ी.

रत्नम ने कहा, “कलाक्षेत्र में मुद्दे सामने आने के बाद देश भर के निजी नृत्य स्कूलों में POSH अधिनियम पर कई ऑनलाइन सम्मेलन आयोजित किए गए. निजी डांस स्कूलों के कई शिक्षकों को भी जाने दिया गया क्योंकि इन कॉलेजों में छात्राओं ने अपने साथ हो रहे उत्पीड़न के बारे में खुलकर बात की. अब वे पॉश अधिनियम के बारे में प्राप्त ज्ञान से सशक्त हैं.”

लेकिन कलाक्षेत्र में उत्पीड़न के आरोपों ने शास्त्रीय कला जगत को तेज़ी से विभाजित किया है, जबकि कई लोग छात्राओं के साथ खड़े थे, दूसरों ने तर्क दिया कि इस मुद्दे को प्रचारित करना दुर्भावनापूर्ण था और इसका उद्देश्य संस्थान की छवि को नष्ट करना था.

छात्राओं के पक्ष में रुख अपनाने वाले वरिष्ठ नर्तक और कलाक्षेत्र के पूर्व छात्र जी नरेंद्रन ने कहा, “जेएनयू जैसे ध्रुवीकृत माहौल” ने कैंपस पर कब्ज़ा कर लिया है. उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि विवाद के बाद से मैं कैंपस नहीं नहीं गया हूं, लेकिन मुझे जो सुनने को मिलता है वो यह है कि फैकल्टी स्वयं विभाजित है, जहां शिक्षक आपस में बात नहीं कर रहे हैं. कैंपस का राजनीतिकरण हो गया है, जो कि पहले नहीं था.”

अभियुक्त और अभियोक्ता

पिछले अप्रैल में पद्मन को चेन्नई में एक छात्रा की यौन उत्पीड़न की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कुछ हफ्ते बाद उसे ज़मानत दे दी गई. उसे कलाक्षेत्र से निलंबित कर दिया गया है, लेकिन इसके अलावा, उसका सामाजिक पुनर्वास पटरी पर दिखाई दे रहा है.

नरेंद्रन ने दावा किया कि कुछ महीने पहले एक शादी में उन्होंने पद्मन को चेन्नई में शास्त्रीय कला के दिग्गजों के साथ मेलजोल बढ़ाते हुए देखा था. उन्होंने कहा, “उसे मुस्कुराते हुए और आत्मविश्वास से मिलते-जुलते देखकर, मुझे सचमुच हैरानी हुई कि क्या मैं सपना देख रहा था. उसने ऐसा व्यवहार किया मानो साल की शुरुआत में कुछ हुआ ही न हो! सामाजिक दायरे में उसकी स्वीकार्यता बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुई है.”

जिस महिला ने हरि पद्मन के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की थी और जिसका दिप्रिंट ने पहली बार मार्च 2023 में इंटरव्यू किया था, ने कहा कि चीज़ें अब ठीक हो गई हैं. उन्होंने कहा, चेन्नई में कुछ नर्तक उनके साथ नहीं जुड़ते, लेकिन उनके करियर पर कोई असर नहीं पड़ा है.

उन्होंने कहा, “कुछ सहपाठी, कुछ अन्य नर्तक जो उसका (पद्मन) समर्थन करते हैं, मुझसे बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन मैं उतना अलग-थलग महसूस नहीं करती जितना पहले किया करती थी. मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात का हुआ कि कुछ यूट्यूब चैनलों पर मेरी फोटो का इस्तेमाल किया गया और मेरा चरित्र हनन किया गया, लेकिन अब मैं इन चीज़ों से नहीं जुड़ती, मैं आगे बढ़ना चाहती हूं.”


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छात्राओं की मांगें हुईं पूरी?

पिछले साल, कलाक्षेत्र प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्राओं की चार प्रमुख मांगों पर सहमति व्यक्त की थी: आरोपी कर्मचारियों की बर्खास्तगी, मौखिक और यौन उत्पीड़न के खिलाफ तत्काल उपाय, एक छात्र संघ का गठन और मान्यता और छात्रावास में छात्र सुरक्षा और गोपनीयता के संबंध में आश्वासन, लेकिन कैंपस सूत्रों के मुताबिक, इन वादों पर प्रगति असमान रही है.

कलाक्षेत्र में पॉश समिति को मजबूत करने की कोशिशों के बावजूद, यह अपूर्ण बनी हुई है. कॉलेज ने पैनल में बाहरी और निष्पक्ष सदस्यों को शामिल किया है, लेकिन अभी भी कोई छात्र प्रतिनिधि नहीं है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कॉलेज की आंतरिक समितियों में पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए तीन छात्र प्रतिनिधि होने चाहिए, लेकिन कलाक्षेत्र की वर्तमान आंतरिक समिति में किसी भी छात्र का कोई उल्लेख नहीं है.

छात्र संघ के मोर्चे पर काउंसिल का गठन हुआ, लेकिन प्रबंधन ने इसे मंजूरी नहीं दी. इसके अलावा, प्रशासन कथित तौर पर परिषद को छात्र बैठकें आयोजित करने से प्रतिबंधित करता है.

इस बीच, छात्रावास में कुछ सुधार देखे गए हैं. छात्रों को अब वीकेंड पर बाहर जाने की अनुमति है और भोजन मेनू में सुधार की योजना है. हालांकि, वार्डन के संबंध में शिकायतें बनी रहती हैं.

बदलाव की उम्मीद अब नये नेतृत्व पर टिकी है. पिछले निदेशक रेवती रामचंद्रन का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो गया, और सभी की निगाहें उनके उत्तराधिकारी सुरेश चिक्कला पर हैं.

भारतीय आयुध निर्माणी सेवा के एक पूर्व अधिकारी, चिक्कला संस्थान के इतिहास में पहले निदेशक हैं जिनका प्रदर्शन कला जगत से संबंध नहीं है. सूत्रों ने बताया की लीक से हटकर, चिक्कला अब तक कर्मचारियों और छात्रों के लिए सुलभ और पहुंच योग्य रहे हैं. उन्होंने कहा, यह खुलापन आशा की एक किरण प्रदान करता है क्योंकि कॉलेज उस विवाद के बाद एक नया रास्ता चुन रहा है जिसने उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है. कैंपस के एक सूत्र ने कहा, “चिक्कला अच्छे हैं, निष्पक्ष हैं. हम उन पर बहुत भरोसा कर रहे हैं.”

(इस फीचर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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