सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, पटना | फोटो: एएनआई
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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सभी संबद्ध स्कूलों को 1 मार्च से प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू करने को कहा है. चूंकि देशभर के स्कूल अधिकांश शैक्षणिक सत्र के दौरान बंद रहे हैं, छात्रों को प्रैक्टिकल की कक्षा में हिस्सा लेने का कोई मौका लगभग नहीं मिला है. ऐसे में मार्च में परीक्षा आयोजित करना किसी चुनौती से कम नहीं है.

31 दिसंबर को जारी एक नोटिस में सीबीएसई ने कहा है कि 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के लिए परीक्षाएं 4 मई से शुरू होंगी और स्कूल इससे पहले 1 मार्च से प्रैक्टिकल परीक्षाएं करा सकते हैं.

बोर्ड ने यह भी कहा कि अगर स्कूलों के, स्थानीय प्रशासन से फिर खोलने की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में, परीक्षाएं आयोजित कराना व्यावहारिक तौर पर संभव न हो तो वे आंतरिक मूल्यांकन जैसे मूल्यांकन के वैकल्पिक उपाय अपना सकते हैं. लेकिन स्कूलों को इंतजार है कि राज्यों की तरफ से चरणबद्ध तरीके से इन्हें फिर खोलने की अनुमति मिल जाए ताकि प्रयोगशाला संबंधी काम पूरा किया जा सके.

अब तक केवल कर्नाटक, महाराष्ट्र और असम जैसे कुछ राज्यों ने हीं 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को फिर से स्कूल बुलाने की अनुमति दी है लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित अन्य तमाम राज्यों ने अभी तक स्कूल खोलने पर कोई निर्णय नहीं लिया है. ऐसे राज्यों में चल रहे स्कूलों को अब उम्मीद है कि सरकारें उन्हें अलग-अलग बैच में छात्रों को बुलाने की अनुमति देंगी.


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दिल्ली के स्कूलों को छूट की उम्मीद

दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि स्कूल तभी दोबारा खुलेंगे जब वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी. लेकिन स्कूल उम्मीद कर रहे हैं कि 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए इसमें छूट दी जाएगी.

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लाजपत नगर स्थित शहीद हेमू कॉलोनी सर्वोदय बाल विद्यालय के प्रिंसिपल बी.के. शर्मा ने कहा, ‘हम किसी योजना पर आगे बढ़ने से पहले दिल्ली सरकार के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. यदि सरकार छात्रों को प्रैक्टिकल की कक्षाओं के लिए अलग-अलग बैच में आने की अनुमति देती है, तो हम छात्रों को बुलाएंगे. लेकिन तैयारियों की बात करें तो मेरा स्कूल ऑफलाइन प्रैक्टिकल एग्जाम कराने के लिए पूरी तरह तैयार है.’

मॉडर्न स्कूल, शालीमार बाग की प्रिंसिपल अलका कपूर ने कहा, ‘सरकार को छात्रों को अलग-अलग समूहों में आने की अनुमति देनी चाहिए, खासकर बोर्ड वाली कक्षाओं के छात्रों को आने देना चाहिए, ताकि उन्हें लैब के काम का अनुभव हो सके.’

उन्होंने कहा, ‘अब तक हम उन्हें ग्राफिक्स और वीडियो के जरिये ऑनलाइन प्रयोग सिखा रहे हैं. लेकिन हम यहां बोर्ड की कक्षाओं की बात कर रहे हैं, अगर उन्हें इस स्तर पर प्रैक्टिकल का अनुभव नहीं कराया गया तो उनका आधार कैसे मजबूत हो पाएगा?’

कपूर ने कहा कि अगर छात्रों को ऑफलाइन प्रैक्टिकल की अनुमति नहीं दी गई तो यह एक निरर्थक कवायद होगी.


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गुजरे समय की भरपाई की उम्मीद है

गुजरात, पंजाब और ओडिशा जैसे राज्यों के स्कूलों, जिन्हें सरकारों की तरफ से जनवरी में फिर खोलने की अनुमति मिल गई है, को उम्मीद है कि वे बीत चुके समय की भरपाई कर पाएंगे और छात्रों को प्रैक्टिकल का अनुभव दे पाएंगे.

सूरत स्थित एक निजी स्कूल में शिक्षक दिवेश कृष्ण ने दिप्रिंट से कहा, ‘गुजरात में सरकार ने स्कूलों को 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को 11 जनवरी से फिर बुलाने की अनुमति दी है. इससे मार्च में प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू होने से पहले हमें अपने छात्रों को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा.’

ओडिशा में स्कूलों के इस सप्ताह फिर खुलने के आसार हैं और उम्मीद की जा रही है कि बड़ी कक्षाओं के छात्रों को बुलाने की अनुमति मिल सकती है.

भुवनेश्वर के ओडीएम पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर सोयान सत्येंदु ने कहा, ‘हम हर दिन प्रैक्टिकल के लिए पीरियड निर्धारित करेंगे और छात्रों को हर चीज से परिचित कराएंगे. परीक्षा बाहरी या आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से हो सकती है लेकिन इस पर किसी फैसले का इंतजार किए बिना हम छात्रों को प्रैक्टिकल से परिचित कराने की योजना बना रहे हैं.’

महाराष्ट्र में सरकार ने स्कूलों को फिर खोलने की अनुमति तो दी है लेकिन मुंबई और नवी मुंबई में अभी स्कूल बंद ही रहेंगे. इन स्कूलों के शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षाओं से पहले सीनियर छात्रों को बुलाने की अनुमति देगी.

बाल भारती स्कूल, नवी मुंबई के प्रिंसिपल गणेश परमेश्वरन ने कहा, ‘हम छात्रों को स्कूल बुलाने को लेकर सरकार के अगले निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि वे लैबोरेटरी से संबंधित पाठ को सीख सकें. अगर वे प्रैक्टिकल के लिए आ सकेंगे तो बोर्ड परीक्षा की तैयारी हो पाएगी.’

कर्नाटक में, जहां स्कूल पहले से ही सीनियर छात्रों के लिए फिर खुल चुके हैं, शिक्षक और स्कूल प्रशासन प्रैक्टिकल परीक्षाएं आराम से हो जाने को लेकर आश्वस्त नज़र आ रहे हैं.

बेंगलुरू और मैसूर स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में प्रबंधन बोर्ड के सदस्य मंसूर अली खान ने कहा, ‘दोनों शहरों में हमारे छात्र स्कूल आते रहे हैं और लैब सेशन में भी शामिल हुए हैं. हम 15 मार्च तक अपने यहां प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू करेंगे और इसमें एक महीने का समय लेंगे ताकि कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग बैच में इनका आयोजन किया जा सके.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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