Wednesday, 25 May, 2022
होमएजुकेशनसर्वे में खुलासा, स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स और पैरेंट्स को भी भाने लगा है ऑनलाइन पढ़ाई का मॉडल

सर्वे में खुलासा, स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स और पैरेंट्स को भी भाने लगा है ऑनलाइन पढ़ाई का मॉडल

68 प्रतिशत छात्र-छात्राओं, 89 फीसदी अभिभावकों और 85 फीसदी शिक्षकों ने कहा कि कक्षाओं में प्रत्यक्ष शिक्षण शुरू होने के बाद भी वे किसी न किसी रूप में ऑनलाइन शिक्षण जारी रखेंगे या ऐसा करने का सुझाव देंगे.

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नई दिल्ली: हाइब्रिड शिक्षण मॉडल (प्रत्यक्ष और ऑनलाइन दोनों तरह से अध्ययन) को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच व्यापक प्राथमिकता मिली है और वे चाहते हैं कि कक्षाओं में परंपरागत शिक्षण फिर से शुरू होने के बाद भी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहे. एचपी इंडिया के एक सर्वे में यह तथ्य उभरकर सामने आया है.

कोविड-19 महामारी प्रौद्योगिकी के जरिये शिक्षण को भारत समेत दुनियाभर में अपनाने के लिहाज से एक अवसर साबित हुई है. शिक्षा में अवरोध न आ सके इसलिए कई ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन होने लगीं.

एचपी इंडिया के ‘फ्यूचर ऑफ लर्निंग स्टडी-2022’ के मुताबिक, 98 प्रतिशत अभिभावक और 99 फीसदी शिक्षकों ने शिक्षण जारी रहने का श्रेय ऑनलाइन माध्यम को दिया.

एचपी इंडिया के प्रबंध निदेशक केतन पटेल ने कहा, ‘ऑनलाइन कक्षाओं के कारण अध्ययन जारी रह सका और सभी लोग सुरक्षित भी रहे.’

करीब 91 प्रतिशत विद्यार्थियों ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण पारंपरिक कक्षा शिक्षण का पूरक है. सर्वे में शामिल करीब 68 प्रतिशत छात्र-छात्राओं, 89 फीसदी अभिभावकों और 85 फीसदी शिक्षकों ने कहा कि कक्षाओं में प्रत्यक्ष शिक्षण शुरू होने के बाद भी वे किसी न किसी रूप में ऑनलाइन शिक्षण जारी रखेंगे या ऐसा करने का सुझाव देंगे.

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छात्रों द्वारा हाइब्रिड पढ़ाई को तवज्जो देने के पीछे कारण है कि दोनों तरीके से शिक्षण से विषय को लेकर समझ बेहतर होती है, खाली समय मिल जाता है जिसमें अपने पसंद के काम किए जा सकते हैं आदि.

हालांकि 77 प्रतिशत विद्यार्थियों ने कहा कि कक्षाओं में प्रत्यक्ष अध्ययन से अधिक दोस्त बनाए जा सकते हैं, पढ़ाई बेहतर तरीके से होती है. 76 फीसदी ने कहा कि इससे खेलकूल में भाग लेना संभव होता है.

पटेल ने कहा कि स्कूलों को भी यह अहसास हुआ है कि आगे का रास्ता हाइब्रिड शिक्षण है और उसके लिहाज से स्कूलों में आधारभूत ढांचा तैयार करने की जरूरत है.

इस शोध में 13 शहरों के शिक्षकों, अभिभावकों और छात्र-छात्राओं समेत कुल 1,500 लोगों से बात की गई.


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