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Friday, 12 July, 2024
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सशस्त्र बलों में महिलाओं पर फोकस, महिला कैडेटों के लिए NDA के ढांचे की समीक्षा करेंगे सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुख

सैन्य सेवाओं के प्रमुख ऐसे समय पर अकादमी का दौरा करने वाले हैं जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से महिलाओं को एनडीए प्रवेश परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा चुकी है. इस साल फरवरी तक थल सेना, नौसेना और वायु सेना में 9,118 महिला अधिकारी सेवारत थीं.

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नई दिल्ली: थल सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुख इसी हफ्ते राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) का दौरा करेंगे और महिला कैडेटों के प्रवेश के संदर्भ में प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे, जिस दिशा में इस साल की शुरुआत से ही कामकाज शुरू किया जा चुका है.

रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अकादमी की प्रवेश परीक्षा में महिलाओं को बैठने की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पूर्व इस महीने की शुरुआत में ही सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख आर.के.एस भदौरिया के 20 अगस्त को प्रस्तावित दौरे की रूपरेखा तय कर ली गई थी.

उन्होंने आगे कहा कि तीनों सैन्य प्रमुखों की इस यात्रा का बुधवार को पारित अदालत के आदेश से कोई संबंध नहीं है.

एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, ‘महिला कैडेटों के लिए प्रशिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा के उद्देश्य से इस महीने की शुरू में ही यह यात्रा निर्धारित की गई थी. महिला कैडेटों के मद्देनजर अतिरिक्त बुनियादी ढांचा मुहैया कराए जाने को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है और इसे क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया जाना है. लैंगिक समानता एक मुद्दा रहा है, जिस पर पूरी सक्रियता से बहस हुई है और रक्षा सेवाओं में इस पर प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही है.’

सूत्र ने कहा कि एनडीए के जरिये महिलाओं को सशस्त्र सेवाओं में शामिल करने पर चर्चा जारी थी और इसे शीर्ष नेतृत्व की तरफ से समर्थन भी मिल रहा था.

दिप्रिंट ने जून में बताया था कि एनडीए का विस्तार किया जा रहा है और सशस्त्र बलों में अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए हर वर्ष प्रशिक्षण पाने वाले सैन्य कैडेटों की संख्या लगभग 400 बढ़ाई जाएगी.

सीटों में यह वृद्धि विदेशी कैडेटों और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के ग्राउंड ड्यूटी कैडेट के प्रशिक्षण की बड़ी मांग को पूरा करने के लिए भी की जा रही है.

संस्था में महिला कैडेटों के संभावित प्रवेश को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष एनडीए में बुनियादी ढांचे बढ़ाने के लिए भी एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया था.

महिलाएं काफी लंबे समय से सशस्त्र बलों का हिस्सा हैं

एनडीए के माध्यम से सशस्त्र सेवाओं में महिलाओं की भर्ती होना कोई नई बात नहीं है.

सूत्रों ने बताया कि सशस्त्र बलों ने बहुत पहले ही महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं में अधिकारियों के तौर पर शामिल करना शुरू कर दिया था.

ऊपर उद्धृत सूत्र ने बताया कि पुणे स्थित सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज वर्षों से पुरुष और महिला चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहा है. सैन्य नर्सिंग अधिकारी आजादी से बहुत पहले से ही सेवा में हैं और रक्षा बलों के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

हाल में सैन्य पुलिस कोर में भी निचली रैंक में महिलाओं को शामिल किया गया है.

सूत्र ने कहा, ‘पहले तो जेएजी और शिक्षा संबंधी शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार किया गया और हाल ही में उन्हें कुछ अन्य शाखाओं में भी समान लाभ मिलने लगे हैं. महिला अधिकारियों को हाल ही में आर्मी एविएशन में ट्रेनिंग के लिए भी शामिल किया गया है.’

इस साल फरवरी तक तीनों सेनाओं में 9,118 महिला अधिकारी कार्यरत थीं.

महिला अधिकारी 1993 से ही सेना में अपनी सेवाएं दे रही हैं. शुरुआत में तो उन्हें ‘स्पेशल एंट्री स्कीम’ के तहत पांच साल की सेवाओं के लिए लाया गया था. बाद में इसे शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में बदल दिया गया.

2008 में जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) और आर्मी एजुकेशन कोर की स्ट्रीम में महिलाओं को स्थायी कमीशन दे दिया गया.
2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी दस ब्रांच में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिये महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को मंजूरी दे दी.

इनमें सिग्नल कोर, इंजीनियर्स, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डनेंस कोर और इंटेलिजेंस कोर शामिल हैं.

हालांकि, यह नियम मौजूदा समय में सेवारत एसएससी अधिकारियों और भविष्य में इस सेवा में शामिल होने वालों के लिए है और इसे पहले से लागू नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेना की कुल 147 अतिरिक्त महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया. लेकिन तमाम कारणों से अभी सेना में युद्धक भूमिकाओं को महिलाओं के लिए खोला जाना बाकी है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )

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