नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि (रिटायर्ड), जिन्हें सैन्य हलकों में एक सैनिक-विद्वान और ऑपरेशनल अधिकारी के रूप में जाना जाता है, को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और सैन्य मामलों के विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है.
वह CDS जनरल अनिल चौहान की जगह लेंगे, जिनका बढ़ाया गया कार्यकाल 30 मई को खत्म हो रहा है.
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व वाले नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (NSCS) में मिलिट्री एडवाइजर हैं. उन्हें पिछले साल 1 सितंबर को इस पद पर नियुक्त किया गया था. इससे पहले वह 31 जुलाई 2025 को भारतीय सेना के वाइस चीफ पद से रिटायर हुए थे.
NSCS, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) की कार्यकारी शाखा के रूप में काम करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नीति संबंधी सुझाव और मंत्रालयों के बीच समन्वय करता है. संरचना के हिसाब से यह परिषद तीन स्तरों में बंटी है — स्ट्रैटेजिक पॉलिसी ग्रुप, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड और NSCS. इसमें सैन्य मामलों, तकनीक, इंटेलिजेंस समन्वय और समुद्री सुरक्षा जैसे विभाग शामिल हैं.
मिलिट्री एडवाइजर का दफ्तर सशस्त्र बलों और NSCS के बीच मुख्य कड़ी के रूप में काम करता है. यह ऑपरेशनल तैयारी, फोर्स प्लानिंग और क्षमता विकास का आकलन देता है.
NDA से पढ़ाई
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पढ़ाई की है. उन्हें 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला था.
वह जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, ब्रैकनेल (यूके) और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली के पूर्व छात्र भी हैं. उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल की डिग्री है.
हालांकि दो मौजूदा सेना प्रमुखों के नामों पर भी विचार किया गया था, लेकिन सूत्रों ने बताया कि CDS के लिए तीन-स्टार अधिकारी को चुनने का फैसला लिया गया, जबकि CDS का पद चार-स्टार रैंक का होता है.
दिलचस्प बात यह है कि पहले दो CDS — दिवंगत जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान — दोनों सेना से थे और लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि तीसरे सेना अधिकारी होंगे जो यह पद संभालेंगे.
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल भारत को जमीन आधारित खतरों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए अब तक सेना के अधिकारियों को CDS बनाया गया है.
जैसा कि दिप्रिंट ने पहले भी रिपोर्ट की थी कि, थिएटराइजेशन लागू होने के बाद CDS का पद रोटेशन के आधार पर दिया जाएगा.
सूत्रों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि के पक्ष में सबसे बड़ी बात उनका पाकिस्तान और चीन जैसे चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर बड़ा ऑपरेशनल अनुभव और पूर्वोत्तर में उग्रवाद से निपटने का अनुभव रहा.
अपने करियर में उन्होंने ऑपरेशन राइनो के तहत असम में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और सेंट्रल सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन की भी कमान संभाली.
उनके नाम भारतीय सेना के पश्चिमी मोर्चे की प्रमुख स्ट्राइक कोर 2 कोर की कमान संभालने और सेंट्रल आर्मी कमांडर रहने का भी रिकॉर्ड है.
उनकी अन्य अहम नियुक्तियों में माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाखस्तान में डिफेंस अटैची, मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच में असिस्टेंट मिलिट्री सेक्रेटरी, ईस्टर्न कमांड मुख्यालय में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के डिप्टी कमांडर शामिल हैं.
उन्होंने रक्षा मंत्रालय (सेना) के इंटीग्रेटेड मुख्यालय में डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस, ईस्टर्न कमांड में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ इंस्ट्रक्टर (सेना) और उत्तरी कमांड मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में भी काम किया है.
सैन्य हलकों में उन्हें शांत लेकिन मजबूत व्यक्तित्व वाले अधिकारी और सैनिक-विद्वान के रूप में जाना जाता है.
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