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Saturday, 13 June, 2026
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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने नए सेना प्रमुख, 1997 के बाद पहली बार मिला आर्मर्ड कॉर्प्स अधिकारी को पद

दिसंबर 1986 में आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन पाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ अभी आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ हैं और उन्होंने भारतीय सेना की साउथ वेस्टर्न और सदर्न कमांड, दोनों की कमान संभाली है.

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नई दिल्ली: बख्तरबंद कोर (आर्मर्ड कोर) के अधिकारी और वर्तमान में सेना के उप प्रमुख (VCOAS) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को शुक्रवार को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया गया. वह 30 जून की दोपहर को जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह पद संभालेंगे.

वह खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस अकादमी के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में उन्हें आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था.

वह 1997 के बाद पहले आर्मर्ड कोर अधिकारी होंगे जो सेना प्रमुख बनेंगे. 1997 में 20 लांसर्स के जनरल शंकर रॉय चौधरी सेवानिवृत्त हुए थे.

करीब चार दशक की सेवा में इस अधिकारी ने अलग-अलग इलाकों और संघर्ष वाले माहौल में काम किया है.

उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभाली और पटियाला स्थित 98 आर्मर्ड ब्रिगेड की भी कमान संभाली, जो उस समय पाकिस्तान पर केंद्रित 1 स्ट्राइक कोर का हिस्सा थी. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी ग्रिड का हिस्सा रही डिवीजन स्तर की यूनिफॉर्म फोर्स की भी कमान संभाली.

लेफ्टिनेंट जनरल पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने 21 स्ट्राइक कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में सेवा दी.

आर्मी कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में काम किया. इस तरह उन्हें पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों की कमान संभालने का दुर्लभ सम्मान मिला.

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर भी काम किया है. इनमें जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र आर्मर्ड ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ ऑपरेशंस ऑफिसर, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण-पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह एवं कल्याण महानिदेशक जैसे पद शामिल हैं.

उन्होंने रणनीतिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. इनमें मैकेनाइज्ड फोर्सेज के लिए कर्नल कैपेबिलिटी डेवलपमेंट, ब्रिगेडियर पर्सपेक्टिव प्लान्स एंड एक्विजिशन और अतिरिक्त महानिदेशक क्षमता विकास जैसे पद शामिल हैं. इन भूमिकाओं में उन्होंने भारतीय सेना की दीर्घकालिक एकीकृत दृष्टि योजना और आधुनिकीकरण की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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