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Sunday, 27 September, 2026
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बद्रीनाथ में फेस्टिवल पर विवाद: चमोली प्रशासन ने सेना से मांगा जवाब, पहले किया था समर्थन

नोटिस में सेना से पूछा गया है कि 'बिना इजाज़त' यह कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम से पहले सेना और सिविल प्रशासन के बीच कई बैठकें हुई थीं. मुख्यमंत्री भी इस फेस्टिवल में शामिल हुए थे.

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नई दिल्ली: इस महीने की शुरुआत में उत्तराखंड के बद्रीनाथ में भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत हुए देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल को लेकर विवाद के बीच, चमोली प्रशासन ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया है. प्रशासन ने भारतीय सेना को नोटिस जारी किया है.

यह मामला तब सामने आया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फेस्टिवल के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था.

दो दिन के इस कार्यक्रम की आलोचना पुजारियों, धार्मिक लोगों और नेताओं ने की है. इनमें BJP के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी भी शामिल हैं. उन्होंने बद्रीनाथ धाम के पास कार्यक्रम में हुए प्रदर्शन और तेज आवाज में बजाए गए संगीत पर आपत्ति जताई है.

विवाद तब बढ़ा जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया गया. इस वीडियो में बाद में संगीत जोड़ा गया था. इसमें एक कलाकार स्टेज की रोशनी के नीचे गाते और नाचते हुए दिखाई दे रहा था. भीड़ के कुछ लोग भी उसके साथ शामिल होकर नाच रहे थे.

इसके बाद आलोचकों ने इस फेस्टिवल की तुलना एक “DJ कार्यक्रम” से की. कुछ लोगों ने कहा कि वहां “रेव पार्टी जैसा माहौल” था. हालांकि, सेना के सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम में कोई DJ नहीं था और गाने वाले कलाकार स्थानीय थे.

विवाद शुरू होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने X पर फेस्टिवल से जुड़े अपने पोस्ट भी हटा दिए. सेना को दिए गए नोटिस में पूछा गया है कि बद्रीनाथ धाम इलाके में “पहले से अनुमति लिए बिना” ऐसा कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया.

चमोली के जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार ने शनिवार को कहा कि भारतीय सेना ने 19-20 सितंबर को बामणी और माणा गांवों में ‘Vibrant Village’ योजना के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया था.

उन्होंने कहा, “सेना के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्टॉल लगाए थे. सांस्कृतिक कार्यक्रमों का फैसला करने या उनसे जुड़े भुगतान को संभालने में न तो जिला प्रशासन और न ही राज्य सरकार की कोई भूमिका थी.”

उन्होंने कहा, “ये सभी गतिविधियां भारतीय सेना ने की थीं. इसके अलावा, वहां भविष्य में ऐसे किसी भी कार्यक्रम पर रोक लगा दी गई है. मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार होने वाले किसी भी कार्यक्रम के लिए अब SDM से पहले अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया है.”

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय ने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में कहा था कि यह कल्चरल फेस्टिवल भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन ने मिलकर श्री बद्रीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित किया था.

बयान में कहा गया था, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘Our Heritage, Our Future’ (हमारी विरासत, हमारा भविष्य) थीम पर आयोजित इस फेस्टिवल में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अलग-अलग सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में जीतने वाले और दूसरे स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए.”

फेस्टिवल में महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप ने भी हिस्सा लिया. यहां हस्तशिल्प, पारंपरिक खाने और दूसरी चीजों के प्रदर्शन के लिए स्टॉल लगाए गए थे.

सूत्रों ने कहा कि आपत्ति म्यूजिक कार्यक्रम में तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों को लेकर थी. उन्होंने बताया कि जब भी किसी कार्यक्रम में आम लोगों और राजनीतिक हस्तियों के शामिल होने की बात होती है, तो सिविल प्रशासन हमेशा सेना के साथ सहयोग करता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिविल प्रशासन को हर एक कार्यक्रम की जानकारी होती है या वह उसमें शामिल होता है, उन्होंने कहा.

ऐसा कार्यक्रम पहली बार नहीं हुआ

जिला प्रशासन अब मुख्यमंत्री धामी के शामिल हुए इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर रहा है. लेकिन मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि ऐसा कार्यक्रम पहली बार नहीं हुआ था. पिछले साल भी इसी तरह का एक सांस्कृतिक फेस्टिवल आयोजित किया गया था.

20 सितंबर को चमोली जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के फेस्टिवल में जाने के बाद एक बयान भी जारी किया था. इसमें कहा गया था, “मुख्यमंत्री ने देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए भारतीय सेना, चमोली जिला प्रशासन और सभी आयोजकों को बधाई दी.”

हालांकि, इस बयान की शुरुआत में साफ तौर पर कहा गया था कि दो दिन का यह कार्यक्रम भारतीय सेना ने आयोजित किया था. जिस म्यूजिक कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ, वह 19 सितंबर को हुआ था.

घटनाओं के पूरे क्रम के बारे में बात करते हुए सूत्रों ने कहा कि देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल सेंट्रल कमांड की ओर से सीमा क्षेत्र में की जाने वाली कई पहलों में से एक है.

यह चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC को सामान्य बनाने और कई तरह की योजनाओं के जरिए भारत के दावों को मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. इसमें सीमा पर्यटन को बढ़ावा देना, सीमा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित करना, रोजगार पैदा करना और लोगों को वापस सीमावर्ती क्षेत्रों में बसने के लिए प्रोत्साहित करना जैसी चीजें शामिल हैं.

सूत्रों ने कहा कि यह इस फेस्टिवल का दूसरा साल था. इसका नाम था “Celebrations of Roots and Rhythm under the skies of India’s First Village Mana” (भारत के पहले गांव माना के आसमान के नीचे जड़ों और लय का जश्न). इसी तरह का कार्यक्रम 2025 में भी हुआ था.

सूत्रों के अनुसार, यह सालाना कार्यक्रम भारतीय सेना और राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित होता है. उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन की तरफ से भी स्टॉल और प्रदर्शनियां लगाई गई थीं.

कार्यक्रम माणा गांव के पास एक सांस्कृतिक और विरासत पर आयोजित किया गया था. यह बद्रीनाथ मंदिर परिसर से करीब 2 किलोमीटर दूर है. कार्यक्रम एक तय जगह पर हुआ था, जिसमें एक एम्फीथिएटर भी शामिल था.

उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री की कार्यक्रम में मौजूदगी को रक्षा मंत्रालय ने 15 सितंबर को ही मंजूरी दे दी थी. इससे पता चलता है कि यह कार्यक्रम पहले से तय था.

सूत्रों ने आगे कहा कि कार्यक्रम से पहले सिविल प्रशासन से जरूरी सभी मंजूरियां और अनुमतियां ले ली गई थीं.

एक सूत्र ने कहा, “जिला पर्यटन विकास अधिकारी की आधिकारिक चिट्ठी में 19-20 सितंबर 2026 को माणा में होने वाले देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में स्थानीय मीडिया के लोगों को भी बुलाया गया था. वहीं मुख्यमंत्री ने 20 सितंबर को फेस्टिवल में हिस्सा लिया और उसी स्टेज से लोगों को संबोधित भी किया.”

सूत्रों ने बताया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गायिका प्रियंका मेहर हैं. वह राज्य की एक लोकप्रिय समकालीन लोक गायिका हैं और गढ़वाली और कुमाऊंनी क्षेत्रीय संगीत को आधुनिक रूप देने के लिए जानी जाती हैं.

सूत्रों ने बताया कि पिछले साल इस जगह पर एक दूसरे बैंड ने भजन प्रस्तुत किए थे.

पहले से तैयारी की गई थी, स्थानीय प्रशासन ने अधिकारी भी नियुक्त किया था

सूत्रों ने आगे कहा कि जिला प्रशासन के इस दावे के उलट कि उसे कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी, कार्यक्रम से पहले सेना और सिविल प्रशासन के बीच कई बैठकें हुई थीं.

उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम का खर्च दोनों के बीच बांटा गया था.

स्थानीय प्रशासन ने 8 सितंबर को चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर को देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त किया था.

इसके बाद 10 सितंबर को सेना के अलावा अलग-अलग संबंधित विभागों और अधिकारियों को शामिल करके एक बैठक भी की गई थी, जिसमें कार्यक्रम की समीक्षा की गई.

यह सांस्कृतिक फेस्टिवल आगे के सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था, महिलाओं को सशक्त बनाने और सांस्कृतिक विरासत पर ध्यान देने के लिए आयोजित किया गया था. यह केंद्र सरकार के Vibrant Village कार्यक्रम की पहल के अनुरूप था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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