दिसंबर 2024 में, आशा भोसले ने 91 साल की उम्र में करण औजला का ‘तौबा-तौबा’ गाया और उसका हुक स्टेप भी किया और दिखा दिया कि वह हमेशा हिंदी सिनेमा की बेहतरीन पॉप क्वीन रहेंगी. दुबई ऑडिटोरियम में मौजूद दर्शक जहां तालियां बजा रहे थे, वहीं ऑनलाइन लोगों की सिर्फ एक ही प्रतिक्रिया थी—उम्र उनकी चमक को कम नहीं कर सकती.
भोसले का 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92-साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया. इस दिग्गज गायिका ने हाल ही में दुनिया के मशहूर वर्चुअल बैंड Gorillaz के साथ उनके गाने ‘The Shadowy Light’ में काम किया था.
भोसले का करियर आठ दशकों से ज्यादा लंबा रहा और उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी बेहतरीन बहुमुखी प्रतिभा थी. उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिसमें गजल से लेकर कैबरे तक हर तरह का संगीत शामिल था. संगीतकार ओ. पी. नैय्यर के साथ उनकी जोड़ी ने ‘आओ हुज़ूर तुमको’ जैसे गाने दिए, जबकि आर.डी. बर्मन के साथ ‘चुरा लिया है जो तुमने दिल को’ जैसे क्लासिक बनाए.
उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से बाहर निकलकर प्लेबैक सिंगिंग में अपनी अलग पहचान बनाई.
भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक और रंगमंच कलाकार थे. जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया और परिवार पुणे से कोल्हापुर और फिर मुंबई चला गया. परिवार चलाने के लिए लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में गाना शुरू किया. एक साल बाद, भोसले ने मराठी फिल्म ‘Majha Bal’ (1943) में ‘Chala Chala Nav Bala’ गाकर शुरुआत की.
छह साल बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में ‘चुनरिया’ के ‘सावन आया’ से शुरुआत की और फिर ‘रात की रानी’ (1949) में पहला सोलो गाना गाया. अपने करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने काफी नाट्यसंगीत भी गाया और अपने पिता की तरह मराठी नाट्यपदों को दोबारा जीवंत किया.
शिखर, आलोचना, शक
1970 के दशक का हिंदी सिनेमा दो चीज़ों के लिए जाना जाता है—अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ बनना और आशा भोसले का प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन बनना. वह अभिनेत्रियों जैसे हेलन और मधुबाला के हावभाव को ध्यान से देखती थीं और उन्हें अपनी आवाज़ में शामिल करती थीं.
लेखिका शिखा झिंगन अपनी किताब The Female Playback in Bombay Cinema (2025) में लिखती हैं कि इसी दशक में भोसले ने कैबरे गानों पर लगभग एकाधिकार बना लिया था.
भोसले ने अपना पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड ‘दस लाख’ (1966) के ‘गरीबों की सुनो’ के लिए जीता और अगले 30 साल में 18 नामांकन और 6 अवॉर्ड हासिल किए. उन्हें ‘उमराव जान’ (1981) के ‘दिल चीज़ क्या है’ और ‘इज़ाज़त’ (1987) के ‘मेरा कुछ सामान’ के लिए दो बार नेशनल अवॉर्ड भी मिला.
वह ग्रैमी के लिए नामित होने वाली पहली भारतीय प्लेबैक सिंगर बनीं.
लेकिन उन्हें कई बार ठुकराया भी गया.
किशोर कुमार के साथ कई हिट गाने रिकॉर्ड करने के बावजूद, शुरुआत में उनकी आवाज को यह कहकर नकार दिया गया कि यह अच्छी नहीं है और स्टूडियो को गीता दत्त को बुलाने को कहा गया.
भोसले इस बात से भी परेशान थीं कि ‘अच्छे गाने’ उनकी बहन को मिलते थे, जबकि उन्हें ‘बोल्ड’ गाने दिए जाते थे. उनके कई गानों पर दूरदर्शन ने रोक लगा दी थी. ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ (1971) का ‘दम मारो दम’ ऑल इंडिया रेडियो पर बैन कर दिया गया था, जबकि दूरदर्शन ने फिल्म दिखाते समय इस गाने को हटा दिया.
धीरे-धीरे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और ‘दिल चीज़ क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे गानों से यह साबित किया कि उन्हें शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय संगीत पर भी पूरा अधिकार है.
भोसले-बर्मन जोड़ी
भोसले और आर. डी. बर्मन की जोड़ी ने ‘तीसरी मंजिल’ (1966) के गानों ‘आजा-आजा मैं हूं प्यार तेरा’ और ‘ओ हसीना जुल्फोंवाली’ से धमाकेदार सफलता हासिल की. इसके बाद दोनों ने कई हिट गाने दिए.
भोसले ने बताया कि जब उन्हें ‘आजा-आजा मैं हूं प्यार तेरा’ ऑफर हुआ, तो वह थोड़ी घबरा गई थीं, लेकिन अभ्यास के बाद उन्होंने इसे शानदार तरीके से गाया.
दोनों का पेशेवर रिश्ता बाद में निजी रिश्ते में बदल गया और उन्होंने शादी कर ली.
रीमिक्स और नया दौर
1990 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में भोसले ने खुद को नए अंदाज में पेश किया. उन्होंने रीमिक्स गाने किए और ‘राहुल एंड आई’ (1996) और ‘जानम समझा करो’ (1997) जैसे एल्बम काफी लोकप्रिय हुए.
ए.आर. रहमान के साथ उनकी जोड़ी ने ‘रंगीला’ (1995) के ‘तन्हा-तन्हा’ और ‘रंगीला रे’ जैसे हिट गाने दिए.
उन्होंने अदनान सामी के साथ ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ (2000) गाया. 2006 में ‘Asha and Friends’ में संजय दत्त, उर्मिला मांतोडकर और क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ गाने गाए.
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान 2020 में उन्होंने उषा उत्थूप , उदित नारायण, कैलाश खेर, अल्का यागनिक और सोनू निगम समेत 200 लोगों के साथ ‘Jayatu Jayatu Bharatam’ गाया.
अंत तक भोसले कॉन्सर्ट में गाती रहीं और भारतीय संगीत में एक ऐसी विरासत छोड़ गईं, जिसकी बराबरी बहुत कम लोग कर सकते हैं.
(इस फीचर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
