हालांकि यूरोपीय नेताओं के साथ मोदी की बैठकों के एजेंडे में यूक्रेन युद्ध का मुद्दा छाया रहा, लेकिन उनमें रूस पर भारत के रुख़ के प्रति भी व्यापक स्वीकार्यता देखी गई,.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के विकास के संकल्पों को दुनिया अपने लक्ष्यों की प्राप्ति का माध्यम मान रही है. उन्होंने कहा, ‘आज देश प्रतिभा, व्यापार और प्रौद्योगिकी को यथासंभव प्रोत्साहित कर रहा है. आज देश हर रोज़ दर्जनों स्टार्टअप्स रजिस्टर कर रहा है, हर हफ्ते एक यूनिकॉर्न बना रहा है.’
अलेक्जेंडर गिलेस्पी, वाइकाटो विश्वविद्यालय हैमिल्टन, छह मई (द कन्वरसेशन) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रूस की हालिया यात्रा इस बात का आदर्श उदाहरण...
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.