19 दिसंबर की सुबह बांग्लादेश बिना ‘प्रोथोम आलो’ के जागा. देश के दो सबसे प्रभावशाली अखबारों के दफ्तरों में आग लगाए जाने की उस रात पर संपादकों ने दिप्रिंट से बात की.
अगर राहुल गांधी इतने ही बेकार हैं कि वे इस सरकार के लिए एक 'एसेट' और विपक्ष के लिए एक 'लायबिलिटी' की तरह काम करते हैं, तो फिर सरकार उन्हें ख़बरों में बनाए रखने के लिए इतनी ज़ोर-शोर से कोशिश क्यों कर रही है?