एलडीएफ केरल में अब तक चली आ रही परिपाटी को तोड़ते हुए सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है. और इसका श्रेय जाता है ‘कैप्टन’ पिनराई विजयन को जिन्होंने खुद को एक कुशल संकट प्रबंधक साबित किया है.
केरल में माकपा की अगुवाई वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) कुल 140 विधानसभा सीटों में से 88 पर आगे है तो कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की बढ़त 50 सीटों पर है.
कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद को धता बताते हुए, तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी तेजी से जीत की ओर बढ़ते दिख रहे हैं और अगर मौजूदा रुझान परिणामों में तब्दील होते हैं तो पार्टी बेहद आसानी से लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाएगी.
ई. श्रीधरन कांग्रेस के विधायक शफी परम्बिल और सीपीएम के सी. पी. प्रमोद के खिलाफ मैदान में हैं. भाजपा में शामिल होने और केरल चुनाव लड़ने के उनके निर्णय पर बहुत बहस हुई थी.
विधानसभा की 292 सीटों में से 120 सीट पर उपलब्ध रुझानों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 75 सीटों पर आगे चल रही है, भाजपा 43 पर और निर्दलीय प्रत्याशी दो सीटों पर आगे चल रहे हैं.
कोविड-19 संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों से अनुरोध किया कि वे अपने क्षेत्रों में लोगों के संपर्क में रहें, उनकी मदद करें और उनसे स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहें. महामारी ने 'सदी में एक बार' आने वाले संकट जैसे हालात बना दिये हैं और दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है.
पिछली टीम में सिर्फ सिविल सर्वेंट्स थे. नई टीम में, सभी नौ सदस्यों को राज्य में महामारी से निपटने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और इसमें मंत्रियों को भी शामिल किया गया है.
अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.