इसके जवाब में कांग्रेस ने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, जो भाजपा के झारखंड चुनाव सह-प्रभारी भी हैं, को 2024 के चुनावों के दौरान असम के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में उनके प्रचार के समय की याद दिलाई.
राहुल गांधी के साथ उनकी भारत जोड़ो यात्रा पर चलने और खट्टर सरकार की खेल नीति की आलोचना करने के बाद, बूरा इस साल की शुरुआत में ‘मोदी से प्रभावित होकर’ भाजपा में शामिल हो गईं.
जयपुर के हवा महल क्षेत्र के विधायक ने कहा कि वे इस बारे में राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे. कई पत्नियां और बच्चे रखने वाले एक खास ‘समाज’ पर निशाना साधते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सभी के लिए समान कानून होने चाहिए.
इनमें राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती, जो राइफल शूटर हैं और जिन्होंने भारत के लिए कई उपलब्धियां हासिल की हैं, पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा के वकील बेटे चाणक्य और पूर्व मंत्री संपत सिंह के बेटे गौरव शामिल हैं.
10 जुलाई को हुए विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से रायगंज, बागदा और राणाघाट दक्षिण की सीटें छीन लीं, जबकि मानिकतला सीट पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखा. ममता बनर्जी ने इसे ‘लोगों की जीत’ बताया.
विधानसभा उपचुनाव के लिए बुधवार को पंजाब की एक, हिमाचल प्रदेश की तीन, उत्तराखंड की दो, पश्चिम बंगाल की चार, मध्य प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर मतदान हुआ था.
शुक्रवार को सार्वजनिक की गई हितधारक परामर्श पर एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने कहा कि “एलजीबीटीक्यूआईए: संबंध सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुरूप नहीं हैं”.
2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि जाट और एससी ने बड़े पैमाने पर कांग्रेस को वोट दिया है. अब, जाट परिवार के नेतृत्व वाली आईएनएलडी और दलित नेता मायावती के नेतृत्व वाली बीएसपी 10 साल बाद राज्य में लड़ाई के लिए एक साथ आ रही हैं.
पंचायती राज मंत्रालय के पूर्व सलाहकार पी.पी. बालन को आरजीआईडीएस का निदेशक नियुक्त किया गया है. उन्होंने कहा कि तिरुवनंतपुरम में केंद्र में सरकारी योजनाओं के विश्लेषण सहित शोध भी किया जाएगा.
भारतीय व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष का कहना है कि अपराध से निपटने के लिए पूर्व सीएम हुड्डा की रणनीति अपनाए जाने की ज़रूरत है. हरियाणा सरकार इस बात पर जोर दे रही कि पुलिस सक्रियता से अपराधियों पर लगाम लगा रही है और सीएम सैनी ‘अपराधों को रोकने को लेकर गंभीर हैं’.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.