मुस्लिम वोट भाजपा की सबसे बड़ी चिंता हैं. विरोधी पहले से ही सक्रिय हैं और कमियों की तलाश कर रहे हैं. यूपी को फिर से हासिल किए बिना, भाजपा की हार के धीरे धीरे बढ़ने की संभावना है.
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद का घर-घर जाकर प्रचार करना, संविधान को मुद्दा बनाना और दलितों और मुसलमानों को एकजुट करना, जिसने उन्हें नगीना निर्वाचन क्षेत्र में जीत दिलाई, मायावती खेमे में बेचैनी बढ़ा सकता है.
नतीजों से तीन निष्कर्ष निकलते हैं: भारतीय राजनीति गठबंधन के अपने ढर्रे पर लौट आई है, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को शिकस्त दी जा सकती है और कांग्रेस पुनर्जीवित हो गई है.
सेना में बढ़ते पेंशन बिल के मसले का 2022 में अग्निपथ योजना की घोषणा से पहले तक समाधान नहीं ढूंढा गया था. अब पेंशन के मद में खर्च को घटाने के जो उपाय किए जाएंगे उनका असर 15 साल बाद ही दिखेगा.
पंजाब में कट्टरपंथ वापस आ गया है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिख ग्रामीण बहुसंख्यक हैं, और इस चुनाव में पांच प्रमुख राजनीतिक ताकतों में से तीन इसके साथ खेल रही हैं.
2024 का चुनाव एक उम्मीदवार केंद्रित चुनाव ही था. भाजपा अगर सिर्फ मोदी के नाम पर वोट मांग रही थी, तो मोदी ही एकमात्र प्रतिद्वंद्वी थे जिन्हें पूरा विपक्ष हराने में जुटा रहा.
हाल ही में एक महिला ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें बताया गया कि कनाडा में ज़िंदगी कितनी ‘मुश्किल’ है – उसे अपने रिटर्न पार्सल के लिए लेबल प्रिंट करने पड़ते हैं और उन्हें भारत के विपरीत खुद ही छोड़ना पड़ता है.
उनकी ऑटोबायोग्राफी बॉर्डर पार करके अलग-अलग भाषाओं में छपी. वह समझती थीं कि उन्हें कैसे फंसाया जा रहा है और उन्होंने उन जगहों का इस्तेमाल खुद के लिए बोलने के लिए किया.