ठाकुर की जातिवादी टिप्पणी का राहुल गांधी ने बहुत सटीक जवाब दिया कि जिसने भी दलितों पिछड़ों आदिवासियों शोषितों वंचितों के पक्ष में आवाज़ उठाई है उसको गालियां सुनने को मिली है, मैं उनकी गालियों को खुशी-खुशी ग्रहण करूंगा, लेकिन जाति जनगणना के लक्ष्य से पीछे नहीं हटूंगा.
भारतीय त्वचा, जो अपनी मोटी बनावट और उच्च मेलेनिन कंटेंट के लिए जानी जाती है, प्राकृतिक तत्त्वों से बहुत लाभ उठा सकती है. ये तत्त्व हानिकारक केमिकल्स से मुक्त हैं और कोमल लेकिन प्रभावी देखभाल प्रदान करते हैं.
वायनाड में भूस्खलन ने 300 से ज़्यादा लोगों की जान ले ली है. यह केरल में तेज़ी से बढ़ते पर्यटन विकास, अनियंत्रित शहरीकरण और अवैध उत्खनन के लिए एक चेतावनी है.
हमारा शासन कितना बदहाल हो सकता है और हमारा ढकोसला अविश्वसनीय रूप से कितना दुःखद हो सकता है, इसकी मिसाल यह है कि आप युवाओं को शिक्षा देने पर मुनाफा नहीं कमा सकते लेकिन उन्हीं ग्रेजुएटों को वही ट्यूशन देकर करोड़ों कमा सकते हैं.
हमें निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इतनी दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. यूपीएससी की कोशिश बेहतर कारणों से होनी चाहिए, न कि बहिष्कार, हाशिए पर जाने या विशेषाधिकारों की इच्छा से.
भाजपा की योजना पश्चिम बंगाल को इस तरह से विभाजित करने की है कि ममता बनर्जी के तथाकथित मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव हो और उसे चुनाव जीतने में मदद मिले. अच्छी खबर यह है कि बंगाल भाजपा में मतभेद है.
मध्यम वर्ग, हालांकि, काफी हद तक भाजपा के प्रति वफादार है, अब उसके पास दूसरे विकल्प हैं. बजट 2024 पर नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया से पता चलता है कि वे कैसे विश्वासघात महसूस करते हैं.
चीन क्वॉड में भारत और ऑस्ट्रेलिया के योगदान को कमतर आंकता है, लेकिन कहानी यह बताती है कि ये देश अपने द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने को लेकर ज़्यादा चिंतित हैं.
उन्होंने राज्य-व्यवस्था को कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के वैचारिक चश्मे से या मेकियावली की किताब ‘द प्रिंस’ या वेबर की पदानुक्रम वाली व्यवस्था या सर्वहारा की तानाशाही की मार्क्सवादी अवधारणा के नहीं बल्कि राज्य-व्यवस्था के कार्यों के नजरिए से देखा
संजीव चोपड़ा