scorecardresearch
Wednesday, 4 February, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

BJP और RSS के बीच की दूरियां अब स्पष्ट हैं, नरेंद्र मोदी इसके केंद्र में हैं

अगर मोदी 2024 के चुनाव में बहुमत जीतते हैं, तो आरएसएस की पितामह बने रहने की राहें मुश्किल हो जाएंगी, लेकिन अगर वे विफल रहे, तो वो आरएसएस की संघ परिवार मे प्राथमिकता को सिद्ध करेगी.

सेना का फर्ज़ संवैधानिक मूल्यों की रक्षा ही है, धार्मिक मूल्यों को लेकर वह दुविधा में न फंसे

भारत में जो सियासी हवा चल रही है, उससे सैन्य नेतृत्व को सजग हो जाना चाहिए कि सेना के बुनियादी मूल्यों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

5वां चरण BJP की करो या मरो की लड़ाई, यूपी महाराष्ट्र में कड़ा मुकाबला

तीसरे चरण की तरह, इस बार भी एनडीए को अपनी जमीन गंवानी पड़ सकती है, क्योंकि पिछली बार उसे 49 में से 39 सीटें मिली थीं, जिनमें से अकेले भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं.

कांग्रेस के लिए अबकी बार 90 पार? क्यों 30 से अधिक सीटें BJP को कर सकती है परेशान

चुनाव नतीजे पर चर्चा में प्रायः हर कोई केवल भाजपा के ‘आंकड़े’ की बात कर रहा है, लेकिन क्या हो अगर हम समीकरण को उलट दें और यह सवाल करें कि हारने वाले का प्रदर्शन कैसा रहा?

घाटकोपर में होर्डिंग गिरना मुंबई की एक सामान्य आपदा — बहुत सारी एजेंसियां और दोषी कोई नहीं

बीएमसी के अनुसार, शहर में अभी 1,025 आधिकारिक तौर पर स्वीकृत होर्डिंग्स हैं. हालांकि, मुंबई में रहने वाला कोई भी व्यक्ति आपको बता सकता है कि यह संख्या हास्यास्पद रूप से कम आंकी गई है.

शक्सगाम घाटी में सड़क बनाने की चीन की मंशा से भारत की सुरक्षा को खतरा नहीं, राजनीतिक पहलू पर गौर कीजिए

भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा विरोध दर्ज करने से ज्यादा-से-ज्यादा यह मकसद सध सकता है कि भारत अपना दावा बनाए रख सकता है. कोई और मकसद सधेगा, इसकी उम्मीद रखना बेमानी है.

भाजपा अब उतनी बौखलाई हुई नहीं है जितनी 2024 के चुनाव कैंपेन में पहले थी

राजनीतिक दृष्टि से नरेंद्र मोदी अकेले हैं. वह निर्णय लेते हैं कि वह क्या करना चाहते हैं और किसे उच्च पद पर नियुक्त करना चाहते हैं. और वो कब क्या बोलेंगे इसका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता.

2024 का चुनाव कई हकीकत बयां कर रहा है, ‘400 पार की पिच’ केवल मोदी का खोखला वादा

‘400 का आंकड़ा कौन पार करेगा’ के बजाय, असली लड़ाई ‘272 का बहुमत कौन पार करेगा’ इसकी है.

भारत ‘फाइव आइज़’ वाले देशों से टकराव न मोल ले, ये आतंकवाद से लड़ने में मददगार हो सकते हैं

रणनीतिक स्वायत्तता और डाटा की गोपनीयता जैसे कई मसलों पर भारत और ‘फाइव आइज़’ नामक गठबंधन के बीच असहमति हो सकती है, लेकिन सहमति के मुद्दों पर ज़ोर देकर वे साझा चुनौतियों से निबट सकते हैं.

विकसित सेना के बिना विकसित भारत की कल्पना बेमानी, भाजपा-कांग्रेस के घोषणापत्र इस पर खामोश

प्रमुख दलों से कम से कम इतनी तो अपेक्षा की जाती है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक दृष्टिकोण, एक रणनीति का खाका पेश करेंगे और सेना को बदलने की एक रक्षा नीति प्रस्तुत करेंगे.

मत-विमत

सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बलात्कारी लड़कों के साथ क्या किया जाए? पूछिए कि उन्हें हमलावर किसने बनाया

जिन छोटे लड़कों को स्कूल के काम की चिंता करनी चाहिए, वे महिलाओं को परेशान करना सीख रहे हैं. क्या अब हमें उन लोगों की लिस्ट में बच्चों को भी शामिल करना होगा जिनसे हमें खुद को बचाना है?

वीडियो

राजनीति

देश

सिग्नेचर ग्लोबल को अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 45 करोड़ रुपये का घाटा

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) रियल एस्टेट कंपनी सिग्नेचर ग्लोबल ने कम आय के कारण अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 45.33 करोड़ रुपये का एकीकृत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.