चुनाव के समय भाजपा ‘औरंगज़ेब’, ‘पाकिस्तान’ और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों को मशीन की तरह सटीकता से पेश करती है, लेकिन पश्चिम बंगाल की तरह महाराष्ट्र में भी यह कारगर नहीं होगा.
भारत को अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ साफ प्रतिरोध क्षमता हासिल करनी होगी. चीन के मामले में ऐसा उसे हमला करने की बड़ी कीमत चुकाने का डर पैदा करके किया जा सकता है, तो पाकिस्तान को दंड का डर पैदा करके किया जा सकता है.
महायुति बनाम महा विकास अघाड़ी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा है. परत-दर-परत खोलिए आप देखेंगे कि छह की छह पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं.
जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद की वापसी चिंता की बात है, भारत को अमेरिका और इज़रायल जैसे देशों की एक-तरफा कार्रवाइयों से संकेत लेते हुए अपने कदमों के बारे में फैसला करना चाहिए.
2024 के मोदी उन तीन सूत्रों पर सवार नहीं थे जिन्होंने उन्हें दो बार बहुमत दिलाया था और जिसने अभी-अभी ट्रंप को फिर से सत्ता दिलाई है. मोदी सिर्फ उसे बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे जो उन्हें हासिल था.
एक तरफ तानाशाही के खिलाफ लड़ाई है, दूसरी तरफ ‘उदारवादी’ मुस्लिम महिलाएं हैं जिन्हें सहयोगी माना जाता है. दुख की बात है कि बहस को कमज़ोर करने से मूल मुद्दे से ध्यान भटक जाता है.
जो बात मुझे परेशान करती है, वह यह है कि हर चीज़ को बहुत जल्दी वफादारी की कसौटी पर कसा जाने लगता है. जैसे भारतीय मुसलमानों को एक तरह से सोचना चाहिए और भारतीय हिंदुओं को दूसरी तरह से. इसका अंत कहां है?