ऐसा लगता है कि सीरीज़ से जुड़े किसी भी व्यक्ति को इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि खुफिया एजेंसियां या भारत सरकार कैसे काम करती हैं. यहां तक कि अखबारों के दफ्तरों भी इस बात को नहीं जानते.
इस आंदोलन का असर भारत के खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों पर पड़ सकता है. यह असर सीमा पार न करे और एक तीसरा मोर्च न खुल जाए, इसके लिए भारत को हालात पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है
हाइड्रेशन का सिर्फ़ यह मतलब नहीं है कि आप अपनी त्वचा पर क्या लगाते हैं - यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप क्या खाते हैं. ओमेगा-3, 6 और 9 फैटी एसिड आपकी त्वचा के सबसे अच्छे दोस्त हैं.
बांग्लादेश ने शेख हसीना और अवामी लीग को खारिज कर दिया तो क्या उसके जवाब में हम बांग्लादेश को ही खारिज कर देंगे? हम अपने पड़ोसी नहीं चुन सकते, लेकिन हम खुद कैसे पड़ोसी बनें यह फैसला तो कर ही सकते हैं.
असंतोष बढ़ने के साथ ही अहम सवाल यह है कि प्रधानमंत्री क्या सोच रहे हैं? वे एक चतुर राजनीतिज्ञ हैं, इसलिए उनके पास दीर्घकालिक रणनीति होनी चाहिए. लेकिन कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि वह क्या है.
मोदी सरकार जबकि जनगणना करवाने की तैयारी कर रही है, हम जाति, गठबंधन, संविधान के मुद्दों से बनी नयी वास्तविकता की जांच कर रहे हैं. एक दशक तक तो ‘मोदी मशीन’ अपनी रौ में इन तीनों की उपेक्षा करती रही लेकिन पिछले चुनाव ने सब बदला डाला.