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Tuesday, 3 February, 2026
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येचुरी, नूरानी के निधन से पता चलता है कि मोदी ने राजनीतिक विचारधारा को इंदिरा से अधिक बदला है

नरेंद्र मोदी ने पुराने वामपंथियों और दक्षिणपंथियों को एक साथ ला दिया है. कभी कट्टर वैचारिक विरोधी रहे लोग हाथ मिला चुके हैं और भारत के अपने दृष्टिकोण को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

चुनाव से पहले प्रधानमंत्री के तोहफे से हैरान मत होइए, ईंधन की कीमतों में इसी तरह हेराफेरी होती है

तेल की कीमतें जून 2022 की तुलना में लगभग 40% कम हैं, जब ईंधन की कीमतें प्रभावी रूप से स्थिर थीं; फिर भी, उपभोक्ताओं को इस कमी से कोई लाभ नहीं हुआ है.

अरविंद केजरीवाल की ज़मानत उन्हें निर्दोष नहीं बनाती, नैतिक और राजनीतिक सवाल अब भी बरकरार

यहां असलियत यह है कि केजरीवाल की ज़मानत उतनी ही अस्थायी है, जितना उसके इर्द-गिर्द का जश्न.

बलात्कार सिर्फ बंगाल की समस्या नहीं; सरकार, समाज, पुलिस, कोर्ट सबके लिए खतरे की घंटी

आगे का रास्ता मसले की गंभीरता के एहसास, सार्थक सुधारों को लागू करने और सभी भेदभाव से उठकर सबको सम्मान और न्याय देने की संस्कृति को बढ़ावा देकर ही निकल सकता है.

PM मोदी और अमित शाह को राष्ट्रीय हित में श्रीनगर में BJP के CM की योजना को क्यों टाल देना चाहिए

आठ अक्टूबर को विधानसभा चुनाव में कोई भी जीते या हारे, कश्मीरियों को निराशा ही हाथ लगेगी.

राहुल गांधी पूरी तरह से भ्रमित हैं, सिखों पर उनकी टिप्पणी इसे साबित करती है.

यह राहुल गांधी के अहंकार और अपने देशवासियों के प्रति उनकी अवमानना ​​को दिखाता है कि वे मानते हैं कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल देश को उनके परिवार की सोच के अधीन किया जा सकता है.

नॉर्थ-ईस्ट में अपनी नीतियों से नई आग भड़काने और पुराने जख्मों को कुरेदने के बावजूद BJP बाज आने को तैयार नहीं

मणिपुर मसला उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को लेकर भाजपा की ‘जिउ-जित्सु’ मार्का राजनीति का इस्तेमाल करते हुए शासन चलाने की एक अनूठी मिसाल है. वहां वह जो काम कर रही है उससे हालात सुधरे नहीं बल्कि और बिगड़े ही हैं लेकिन यह पार्टी यह काम जारी रखने पर आमादा है

ऋषि सुनक के उत्तराधिकारी के लिए टोरी नेता की सलाह से राहुल गांधी क्या सीख सकते हैं

गठबंधन सरकार के अस्तित्व में आने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की लोकप्रियता रेटिंग के बीच अंतर कम होने के साथ, कांग्रेस को जल्दबाज़ी में नीतिगत घोषणाएं न करने के बारे में विलियम हेग की बात सुननी चाहिए.

आप इंदिरा गांधी के मुंह से कोई भी शब्द बुलवा लें, लेकिन भिंडरावाले से ये आपकी मुश्किलें बढ़ा सकता है

छोटा-सा सबक यह है कि आप इंदिरा गांधी के मुंह में तो कोई भी शब्द डाल करके बच सकते हैं, लेकिन भिंडरावाले की मौत के 40 साल बाद भी आपने उसके साथ ऐसा कुछ किया तो मुश्किल में पड़ जाएंगे.

गौरक्षक और ब्लासफेमी करने वाले हत्यारे एक जैसे हैं, दोनों ही ‘बड़े मकसद’ के लिए हिंसा को उचित ठहराते हैं

जबकि गौरक्षकों द्वारा हिंसा का मुख्य लक्ष्य मुसलमान हैं, कड़वी सच्चाई यह है कि किसी की भी हत्या की जा सकती है.

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रांची के महापौर पद के लिए कांग्रेस समर्थित रमा खलको ने नामांकन दाखिल किया

रांची, तीन फरवरी (भाषा) कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रमा खलको ने मंगलवार को रांची नगर निगम (आरएमसी) में महापौर पद के लिए अपना नामांकन...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.