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Monday, 6 April, 2026
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विवादित बल्लारी भाइयों की वापसी से मालूम होता है कर्नाटक के लिए कितनी बेक़रार है भाजपा

भाजपा को उम्मीद है कि जनार्दन रेड्डी अपने क्षेत्र की 23 सीटों में से अधिकतम सीटों पर जीत दिलवाएंगे जो कि राज्य विधानसभा की 10 प्रतिशत ताकत हैं। जनार्दन रेड्डी पर अधिकतर राजनेताओं की तुलना में सबसे ज्यादा आरोप हैं।

खट्टर की नमाज़ टिप्पणी और हिन्दू गुटों के अयोध्या मामले में दिए तर्क मेल नहीं करते

अयोध्या मामले में 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया था कि मुसलमान व्यावहारिक रूप से कहीं भी प्रार्थना कर सकते हैं जबकि हिन्दू एक बार जहाँ पत्थर स्थापित करते हैं उसे ही मंदिर मानते हैं।

खट्टर की टिप्पणी के बाद याद करें क्या कह गए प्रेमचंद और सरोजिनी नायडू 

प्रेमचंद के उत्तर प्रदेश और सरोजिनी के भारत ने इन सत्तर सालों में कितना लंबा सफ़र तय कर कर लिया है! हमारा भावनात्मक पतन कितना अधिक हो चुका है!

एक दिगंबर जैन मुनि हरियाणा विधानसभा में बोल सकते हैं पर मुस्लमान खुले में नमाज़ नहीं पढ़ सकते ?

मुख्यमंत्री खट्टर की टिप्पणियों ने संयुक्त हिन्दू संघ समिति के विचारों को दोहराया है, जिसके उग्र लोग हालिया हफ़्तों में नमाज में बाधा डालते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का संकट दिखाता है राजनीतिक और न्यायिक अराजकता की कड़वी सच्चाई

कांग्रेस उतावली है, सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश पारदर्शी नहीं हैं और नैतिक आवाजें स्पष्ट रूप से अनुपस्थित हैं।

राहुल गाँधी से 15 मिनट की डिबेट में साबित हो जाएगा कि मोदी के बल्ले में नहीं विराट कोहली वाला दम

मोदी आत्मभाषण में तो अच्छे वक्ता हो सकते हैं लेकिन वे बिना लिखे हुए किसी भी भाषण में काफी खराब हैं

असंवैधानिक या मुस्लिम विरोधी नहीं है नमाज़ पर खट्टर की टिप्पणी

खट्टर कमेटी की टिप्पणी का विरोध न करने पर विपक्ष को राजनीतिक आवाज बुलंद करने का मौका मिल गया है लेकिन तुष्टीकरण की राजनीति अन्य मौकों की तलाश में है.

महिलाओं को छोटे बाल कटवाने के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक शुल्क क्यों चुकाना पड़ता है

'मूल्य की समानता' शताब्दी के एक अंतिम नारीवादी नारा के रूप में है। क्या हमें 'मूल्य की समानता' के लिए पूछना चाहिए। ऐसा लगता है कि पूरा खुदरा जगत हमसे ही कमाई कर रहा है।

क्या आया पहले – आर्थिक सुधार या हम आपके हैं कौन ?

हिन्दी फिल्मों में समृद्ध लोगों को कितने बुरे तरीके से प्रस्तुत किया गया था और इसके लिए नेहरूवाद को दोषी ठहराया जाता है।

वीरे दी वेडिंग : बॉलीवुड को अब समाजशास्त्र का पाठ पढ़ ही लेना चाहिए

फिल्म के ट्रेलर और गानों में महिलाओं को पुरूषों की तरह दिखाया गया है जैसे कि बॉलीवुड में दशको से पुरुषो को महिलाओ के प्रति

मत-विमत

जातिवाद भारतीय शहरों से खत्म नहीं हुआ है, बस उसने अंग्रेज़ी सीख ली है

शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.

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अपनी ही प्रक्रियागत लापरवाही से लाभ नहीं कमा सकता है बैंकः महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग

मुंबई, छह अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को फटकार लगाते हुए कहा है कि बैंक अपनी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.