राजपूतों की शौर्य गाथाएं उनकी हार को भी स्वीकार्य दिखाती हैं और जब उनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाए जाते हैं तो लगता है कि उनके जीवन के सबसे सुनहरे दिन बीते चुके हैं।
कनाडाई PM कार्नी के दावोस भाषण में बड़ी ताकतों की प्रतिद्वंद्विता पर भारत के यथार्थवाद की झलक मिलती है और उन्होंने मध्यम शक्तियों से एक साथ आने का आग्रह किया.