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Sunday, 25 January, 2026
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मत-विमत

अगर बैंकों को नहीं सुधार सकते तो 8 प्रतिशत की वृद्धि दर को कह दें अलविदा

वित्तीय प्रणाली अभी भी अर्थव्यवस्था पर घसीटी जा रही है जो बैंकिंग के कार्य, विनियमन और निरीक्षण में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती...

न्यायपालिका को न्यायाधीशों से भी बचाएं

अधिकारों को लेकर खींच-तान से लेकर,सुर्ख़ियों में रहने और अपनी ही सभा को संभालने की असमर्थता तक -न्यायापालिका अब अपने ही भीतर से खतरे...

क्या ‘पिंक’ के बाद महिलाओं के लिए लड़-लड़ के थक चुके हैं अमिताभ बच्चन ?

ये बहुत ही अनुचित है। मीडिया यह भूलते हुए दिखाई देती है कि वो पिंक को नहीं 102 नॉट आउट को बढ़ावा दे रहे हैं। ये 2016 में था और क्या अमित जी ने इसके लिए अपनी मध्यम आवाज़ का सर्वोत्तम योगदान दिया था? कमजोर अमिताभ बच्चन।लोग उनसे बहुत ज्यादा अपेक्षा रखते हैं।

मोदी सरकार की आम आदमी पार्टी के ऊपर की गयी कार्यवाही संघवाद की भावना के खिलाफ है

संघवाद की भावना में, मोदी की केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार से उन पदों के लिए वास्तविक रूप से अनुमोदन मांगने के लिए कह सकती...

पावरफुल पुरुष हर समय महिला पत्रकारों का उत्पीड़न करते हैं, बच्चा समझते हैं व दूर कर देते हैं

क्या महिला पत्रकार एक प्रभाशाली वृद्ध व्यक्ति के प्रभाव को तोड़ने में समर्थ हो सकती हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने एक पत्रकार के गाल खींचे या थपकी दी या यूं ही पूछ लिया कि क्या आप शादीशुदा हैं?

अरेंज मैरिज बनी पुरानी तालीम,पाकिस्तान में अब ‘सीपीईसी विवाह’

बहुत अधिक इतराने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की वजह से पाकिस्तान में एक नई सांस्कृतिक लहर दौड़ रही है

जाते जाते अब निकल ही गया: कैसे नरेंद्र मोदी के हाथों से फिसला सियासी अफसाना

सरकार के लिए यह कोई असाधारण बात नहीं है कि वह अपने अंतिम या अंतिम के दो सालों में अलोकप्रिय हो। असाधारण क्या है? हमने कभी नहीं सोचा था कि यह सब,मास्टर कम्युनिकेटर नरेन्द्र मोदी के साथ होगा।

मोदी समर्थकों का अस्तित्व संकट में क्योंकि मसीहा मोदी के गिरने वाले हैं वोट

मसीहा के रूप में मोदी के मंसूबे कामयाब रहे तथा वाजपेई के अधिकतम वोट की तुलना में उन्होंने 5-7 प्रतिशत अधिक वोट जीते। लेकिन वर्तमान स्थिति के हिसाब से संतुलन बिगड़ सकता है।

इंदिरा गांधी के बाद अब मोदी शासन में कमज़ोर दिखाई दे रही हैं भारतीय संस्थाएं

एक सुव्यवस्थित समाज जो आर्थिक रूप से बेहतर करने की उम्मीद करता है और इसके नागरिकों द्वारा वह अपने मूलभूत संस्थानों को मजबूत करता है।

प्रेस की आज़ादी के लिए साथ लड़ो या मरो : भारतीय पत्रकारों के लिए मुश्किलों से भरा बैलेंस

मीडिया एक-दूसरे से असहमत हो सकती है, लड़-झगड़ सकती है और आलोचना कर सकती है। लेकिन यह तभी बची रह सकती है और पनप सकती है जब ये सब मतभेद भुलाकर एक होकर रहे, खासकर तब जब इसके प्रमुख सिद्धांतों पर हमले हो रहे हों|

मत-विमत

विवादित डॉग-लवर IAS संजीव खिरवार दिल्ली लौटे, लेकिन उनकी पत्नी का क्या हुआ?

2022 में, खिलाड़ियों ने कहा था कि उन्हें त्यागराज स्टेडियम में जल्दी ट्रेनिंग खत्म करने को कहा गया ताकि IAS जोड़े अपना कुत्ता घुमा सकें. इसके बाद सामने आया मीम्स और जनता का गुस्सा.

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मेट्रो स्टेशन पर 20 लाख रुपये के कीमती सामान से भरा बैग चुराने के आरोप में बीएससी छात्रा गिरफ्तार

नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर गहनों और अन्य कीमती सामानों से भरा एक बैग चुराने के आरोप में 18 वर्षीय...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.