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Thursday, 22 January, 2026
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साल 2018 का सरताज तो आम आदमी ही रहा

समस्या यह है कि गरीबों के लिए चाहे जितनी योजनाएं शुरू की जाएं, व्यवस्था का चरित्र ऐसा है कि वह आम आदमी के लिए कम, अमीर तबके के लिए ज्यादा काम करती है.

सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस का क्या काम?

कांग्रेस से हाथ मिलाना सपा और बसपा के लिए गलत रणनीति है क्योंकि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में अपना कोई वोट बैंक नहीं है.

भारतीय संविधान मुसलमानों को अल्पसंख्यक नहीं कहता, तो फिर किसने उन्हें अल्पसंख्यक बनाया?

संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ समूह की परिकल्पना धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट विभिन्न वर्गों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है.

मुश्किल घड़ी में मोदी-शाह का नेतृत्व

मोदी-शाह नेतृत्व रामविलास पासवान के आगे नतमस्तक क्यों हो गया? सहयोगी दल बीजेपी की बांह मरोड़ रहे हैं और खुद बीजेपी नेताओं की भी जुबान खुल गई है.

क्या किसान तय करेंगे 2019 के लोकसभा चुनाव का रुख?

तीन राज्यों में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की जीत और कांग्रेस सरकारों द्वारा किसानों की कर्ज माफी ने किसानों के मुद्दों को बहस में ला दिया है.

मोदी ने काबू नहीं किया तो बड़बोले नेता ही भाजपा की नाव डुबोएंगे: ज़फ़र सरेशवाला

स्थिति भाजपा के नियंत्रण में नहीं रही, चीज़ें मोदी की पकड़ से छूट रही हैं. मोदी की पहले की कार्यशैली और भाजपा के मौजूदा तौर-तरीकों में भारी अंतर है.

दलितों ने क्यों बना लिया बहुजन कलेंडर?

भारत में कलेंडर का मतलब आम तौर पर देवी-देवता, सिने स्टार या जंगल पहाड़ की सुंदर तस्वीरें होता है. अब नए चलन के तहत कई दलित प्रकाशक अपना बहुजन कलेंडर लेकर आ रहे हैं.

साल 2018 ने देश को दिखाया कि राम मंदिर पर असुरक्षा की शिकार है भाजपा

भावनाओं का खेल खेलते-खेलते पूरी तरह दुर्भावनाओं के खेल में बदल जाये तो वही होता है, जो अयोध्या में 2018 में हुआ.

स्वजातीय शादियां बना रहीं हैं भारत को बीमार, बढ़ा रही हैं असमानता

भारत के लोग 70 पीढ़ियों से अपनी ही जातियों में शादी कर रहे हैं. अगर ये जारी रहा, तो देश को किन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा?

हर कटेगरी के लिए सिविल सर्विस में हो एक एज लिमिट

आज से पांच साल बाद सभी जाति और वर्ग के लिए उम्र और अटैंप्ट की अलग-अलग सीमा समान कर दी जाए, वरना उच्च पदों पर एससी-एसटी-ओबीसी के अफसरों का अकाल बना रहेगा.

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मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

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पिता को जिला परिषद का टिकट न मिलने से नाराज व्यक्ति ने राकांपा विधायक के कार्यालय के बाहर पेशाब किया

लातूर (महाराष्ट्र), 21 जनवरी (भाषा) लातूर जिले में बुधवार को एक व्यक्ति ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद (जेडपी) चुनावों के लिए अपने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.