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Thursday, 22 January, 2026
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मत-विमत

नरेंद्र मोदी 2019 में प्रधानमंत्री नहीं बने तो क्या करेंगे?

हारने पर क्या मोदी विपक्ष में बैठेंगे या संन्यास की घोषणा करेंगे? अगले 100 दिन वास्तव में महत्वपूर्ण हैं तथा चिंता का, शायद उम्मीद का भी, सबब हैं.

ब्राह्मण ओनली: नौकरी देने का ये कैसा चलन

चेन्नई की कंपनी ने जाति संबंधी जो विज्ञापन दिया, उसे मासूम गलती मानिए. असली खेल वहां हो रहा है, जहां विज्ञापनों में जाति का जिक्र नहीं है.

भीमा कोरेगांव: कब्र फोड़कर निकल आई एक गौरवगाथा

भीमा कारेगांव का युद्ध भारतीय समाज को लोकतांत्रिक बनाने की लड़ाई का गौरवशाली अध्याय है. अंग्रेजों की जीत नहीं, जातिवाद की हार का जश्न है भीमा कोरेगांव.

राजनारायण ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कोर्ट से भी हराया था और वोट से भी

पुण्यतिथि विशेष: राजनारायण के नाम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हराने का रिकॉर्ड ही नहीं और भी बहुत कुछ दर्ज है जिसकी कभी चर्चा नहीं हुई.

न्यायपालिका में क्यों होना चाहिए आरक्षण?

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया है कि सरकार न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने की पक्षधर है. लेकिन ये बात बहुत देर से कही गई.

शिक्षा माफिया की अपेक्षा कोयला माफिया से निपटना ज़्यादा आसान है

शिक्षा क्षेत्र में अनैतिक कार्य करने के बाद भी बच निकलने में सक्षम कई अत्यंत प्रभावशाली लोग मौजूद हैं. वे कानूनी और नैतिक मानदंडों का बैखौफ़ उल्लंघन करते हैं.

मीडिया को क्यों पता नहीं चला कि दो अप्रैल को भारत बंद होने वाला है?

दो अप्रैल का भारत बंद, लाखों लोग सड़क पर, बड़े पैमाने पर हिंसा, 12 मौतें, लेकिन मीडिया को कुछ पता नहीं? मीडिया और जनता के बीच यह कैसा फासला है?

आग में तपे तेजस्वी और पिता की छाया में चिराग

बिहार के दो प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों की अगली पीढ़ी अब तैयार है. दोनों परिवारों की विरासत जिनके पास है, उनकी पर्सनाल्टी में क्या खास है?

दलित-बहुजन प्रतिवाद, प्रतिरोध और दावेदारी का वर्ष 2018

आइए मुड़कर देखते हैं कि देश की इस विशाल आबादी के लिए ये साल कैसा रहा, उनके लिए कौन सी चुनौतियां और कैसी संभावनाएं हैं.

‘पसंदीदा’ ना होने के बावज़ूद 1965 में सफलता दिलाने वाला जनरल

मेजर जनरल एच. एस. कलेर ने एक विलक्षण सैनिक के रूप में नाम कमाया था जो कि बला की हद तक स्पष्टवादी था.

मत-विमत

मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

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पिता को जिला परिषद का टिकट न मिलने से नाराज व्यक्ति ने राकांपा विधायक के कार्यालय के बाहर पेशाब किया

लातूर (महाराष्ट्र), 21 जनवरी (भाषा) लातूर जिले में बुधवार को एक व्यक्ति ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद (जेडपी) चुनावों के लिए अपने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.