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Tuesday, 3 February, 2026
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क्या लोकतंत्र सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान करने की इजाज़त देता है

नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ ही छात्र संगठनों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके आन्दोलन में कहीं अराजक तत्व अपनी पैठ बनाकर हिंसा और तोड़फोड़ या आगजनी नहीं कर रहे हैं.

नागरिकता कानून पर पूर्वोत्तर के विरोध प्रदर्शनों से जाहिर है कि इस लड़ाई में मुसलमान अकेले हैं

नागरिकता कानून पर पूर्वोत्तर में जारी अशांति शायद ही धर्मनिरपेक्षता को लेकर है. लोग बस अपनी विशिष्ट जनजातीय संस्कृति को बाहर से आए बंगालियों से सुरक्षित रखना चाहते हैं.

नागरिकता कानून के सहारे संविधान और लोकतंत्र को सूली पर लटकाने पर आमादा हैं मौजूदा सत्ताधीश

वर्तमान हालात में इन सत्ताधीशों को एक चीज याद दिलाई जा सकती है, अदम गोंडवी के शब्दों में- 'हैं कहां हिटलर, हलाकू, जार और चंगेज खां, मिट गये सब कौम की औकात को मत छेड़िये.'

अर्थव्यवस्था पर संकट के बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा दर्शाती है कि भाजपा की प्राथमिकताएं सही नहीं है

भाजपा सोचती है कि अगले आम चुनावों से पहले अर्थव्यवस्था में सुधार आने लगेगा. लेकिन इस तरह की सतही अटकलें तब तक पूरी नहीं हो सकतीं जब तक आज की दिशा को जल्दी उलटा नहीं जाता.

पीएम मोदी की नजरों में झारखंड 19 वर्ष का युवा है, पर उसके पास फोन और इंटरनेट नहीं है

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन की रिपोर्ट ‘इंडिया इंटरनेट 2019’ के मुताबिक झारखंड में इंटरनेट का पेनेट्रेशन मात्र 26% है. झारखंड से नीचे सिर्फ बिहार है जहां 25% है. जबकि केरल और दिल्ली में क्रमशः 54% और 69% है.

समझिए कैसे मोदी-शाह के कदमों ने एक बार फिर भारत को पाकिस्तान से जोड़ दिया है

भारत ने शीतयुद्ध के बाद के 25 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों में खुद को पाकिस्तान से अलग कर लिया था मगर मोदी सरकार ने इस स्थिति को नाटकीय रूप से उलट दिया है.

मोदी का सीएबी यही साबित करता है कि भारतीय राजनीति में पूर्वोत्तर की आशंकाओं और चिंताओं के लिए जगह नहीं

पूर्वोत्तर जल रहा है क्योंकि लोगों को पता है कि स्थानीय मूल आबादी की पहचान को सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं है.

अब मोदी सरकार ने सिद्ध कर दिया है कि वो न केवल पाकिस्तान की तरह बोलती है, सोचती और काम भी करती है

हमारे संविधान में भारत के विचार का प्रतिबिंब है जिसके साथ मोदी सरकार धोखा कर रही है. जैसा कि मैंने अपने संसदीय भाषण में कहा था, नागरिकता संशोधन विधेयक का पारित होना महात्मा गांधी के विचार पर जिन्ना की सोच की जीत है.

भारत के उदारवादी और हिंदुत्ववादी नागरिकता विधेयक पर बहस में जिन्ना को घसीटना बंद करें

जिन्ना ने हमेशा ही पाकिस्तान में सभी को नागरिकता के समान अधिकार देने की वकालत की थी. वह किसी से भी वफादारी का सबूत मांगे जाने के खिलाफ थे.

भारत के मुसलमानों पर मगरमच्छी आंसू बहाने के बजाए इमरान को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए

अगर पाकिस्तान यह चाहता है कि हिन्दुस्तान का नागरिकता बिल नाकामयाब हो जाए तो उसे अपने देश के मज़हबी अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव का तौर-तरीका बदलना होगा.

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