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Tuesday, 3 March, 2026
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मोदी ने बजट को साधारण कवायद बना दी है, बड़ी घोषणाएं राजनीतिक ज़रूरत के हिसाब से कभी भी हो सकती हैं

मोदी बजट को एक साधारण, नियमित किस्म के वार्षिक लेखेजोखे के रूप में देखना चाहते हैं. महाघोषणाएं उनकी राजनीतिक ज़रूरतों के अनुरूप पूरे साल कभी भी की जा सकती है.

क्या रिफ्यूजी कैंप से निकलकर ‘शिकारा’ दर्शकों तक कश्मीरी पंडितों का सच ले जा पायेगा ?

कश्मीरी पंडितों की बात कहने में इतनी झिझक क्यों आखिर? और सबसे महत्वपूर्ण कि 'कश्मीर' और 'कश्मीरी पंडित' की बात कहते वक़्त समस्या के कारण और निवारण की बात करने से गुरेज क्यों?

चीन के कोरोनावायरस संकट में भारत के नीति निर्माताओं के लिए मौजूद है बड़ी सीख

लेकिन यह मान लेना गलत होगा कि मोदी सरकार अपने पक्ष में मिले भारी जनादेश के बाद कुछ गंभीर सुधारों की पहल करेगी. यह निश्चित है कि सरकार की प्राथमिकताएं अलग हैं.

कैसे भारतीय सेना पाकिस्तान को एक हफ्ते के भीतर हरा सकती है

भारत पाकिस्तान को एक सप्ताह से भी कम समय में शिकस्त दे सकता है, मगर उसे पहले यह तय करना होगा कि जीत की उसकी परिभाषा क्या है.

शाहीन बाग: गृह मंत्री अमित शाह बताएं कि वो भारत माता के साथ हैं या खिलाफ

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तो यहां तक दावा किया के शाहीन बाग में औरतें पांच पांच सौ रुपये लेकर बैठ रही हैं. इस बात के बाद इन औरतों को लेकर एक से बढ़कर एक सेक्सिस्ट मीम बने.

दक्षिणी राज्य वालों की पसंद आप है, पर यूपी और बिहार के प्रवासी चुनाव का परिणाम तय कर सकते हैं

दिल्ली की आबादी में यूपी और बिहार के प्रवासियों का वर्चस्व है. दिल्ली के हर तीन में से दो प्रवासी इन दो राज्यों में पैदा हुए थे.

बजट 2020: बहुत हुआ अगर मगर, अब सीधे लोगों की जेब में पैसा डालने की ज़रूरत है

जिस रफ्तार से नौकरियां जा रही हैं, उन्हें देखकर मिडल क्लास डरा हुआ है. सरकार कितने भी आंकड़े दिखा दे अपने आस-पास ऐसे लोग दिखते ही रहते हैं जिन्हें दो साल से इन्क्रीमेंट नहीं मिला.

निर्मला सीतारमण को बजट में विश्वसनीय आंकड़ों के साथ राजकोषीय अनुशासन पर ज़ोर देना चाहिए

राजकोषीय विस्तार वैसे तो अर्थव्यवस्था में सुस्ती के दौरान ही किया जाना चाहिए, पर उन आंकड़ों के आधार पर चर्चा बेमतलब है जिन पर कि लोग यकीन नहीं करते हों.

बीजेपी का दावा सीएए दलितों की मदद करेगा, लेकिन जोगेंद्र नाथ मंडल और आंबेडकर का जीवन कुछ और बयां करता है

हमें जोगेंद्र नाथ मंडल का इस बात के लिए आभारी होना चाहिए कि उनकी वजह से भारत को बाबा साहब जैसा संविधान का रचनाकार मिला.

चंद्रशेखर आज़ाद या सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की पुलिस द्वारा हर गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है

सभी नागरिकों को जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग में शामिल महिलाएं भी है, उन्हें राइट टू प्रोटेस्ट का अधिकार है जिसमें सरकार का विरोध भी शामिल है. पुलिस उन्हें बंद नहीं कर सकती है.

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मुंबई, तीन मार्च (भाषा) महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने कुछ लोगों के एक पाकिस्तानी आतंकी संगठन से संदिग्ध संबंधों के सिलसिले में देर...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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