बीजेपी ने जेएनयू की छवि एक ऐसे संस्थान की बना दी है, जहां राष्ट्रविरोधी-हिंदूविरोधी-नक्सली ताकतों का नियंत्रण है और देश को जेएनयू से मुक्ति सिर्फ बीजेपी दिला सकती है. लेकिन क्या जेएनयू दरअसल ऐसा ही है?
प्रधानमंत्री की राजनीति के आईने में देखें तो, सिंहासन की खातिर भाइयों को मारने की घटनाएं इतिहास का सच हैं, तो आज भी सत्ता की खातिर फूट डालने का कुछ कम काम नहीं हो रहा.
मनोहर लाल खट्टर सरकार ने खास कर ग्रुप-डी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को सुचारू बनाने की पहलकदमी की है. परिणास्वरूप 15 वर्षों से खाली पड़े पदों को भरना संभव हुआ है.
गंगा आंदोलन का गढ़ बने मातृ सदन में इस बार साध्वी पद्मावती अनशन पर बैठी हैं. 15 दिसंबर से प्रारंभ उनके अनशन को एक माह से ज्यादा हो गया लेकिन अब तक जलशक्ति मंत्रालय ने पद्मावती से कोई संवाद नहीं किया.
यह लफ्ज आज़ादी ही भारत की नींव का पत्थर है लेकिन विडंबना यह है कि जब आप जेएनयू या मुंबई में इस लफ्ज का उच्चारण करते हैं तो आपको देशद्रोही बताया जाता है.
संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये 10 फीसदी आरक्षण के दायरे में ऐसे लोग आयेंगे जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण की योजना के दायरे में नहीं हैं.
नवदीप सैनी के करियर में गौतम गंभीर का बड़ा योगदान है. उन्होंने ही सबसे पहले नवदीप सैनी की मदद की थी. इससे पहले वो हरियाणा में छोटी-छोटी रकम के लिए मैच खेला करते थे.