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Monday, 2 February, 2026
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सवाल पूछना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी क्योंकि जो इसे टालते हैं वो नए सवालों को जन्म देते हैं

जो समाज सवालों को मारता है, उस समाज को मरने या बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता. सवाल ही विकास है, सवाल ही शांति है, सवाल ही क्रांति है.

क्या वास्तव में निर्भया कांड के दोषियों के मामले में शीर्ष अदालत के 2014 निर्देशों का पालन नहीं हुआ?

मौत की सजा पाने वाले दोषियों की दया याचिकओं के संबंध में क्या कहता है कि शीर्ष अदालत का जनवरी, 2014 का फैसला?

अर्थव्यवस्था से उम्मीद रखने का यह समय नहीं है, बजट में ज्यादा कुछ करने की कोशिश न करें

इस साल केंद्र सरकार ने ‘स्कीमों’ और परियोजनाओं पर दो साल पहले किए गए खर्च से 48 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना तय किया है. सवाल यह है कि इसके लिए पैसा उपलब्ध हो तो भी क्या सरकार के तमाम विभाग इतने बड़े पैमाने पर खर्च कर पाएंगे?

ये तो ‘द इकॉनोमिस्ट’ की करतूत है, वरना मोदी के नेतृत्व में भारतीय लोकतंत्र किसी त्रुटिपूर्ण सूचकांक के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत है

‘द इकॉनोमिस्ट’ ने एक सर्वे के आधार पर भारत की स्थिति का आकलन किया है. संभवत: मोदी सरकार एनपीआर के लिए उसकी टीम का उपयोग करना चाहे.

दुनिया का नरेंद्र मोदी को संदेश— ब्रांड इंडिया को बुरी तरह नुकसान पहुंच रहा है

पहचानवादी राजनीति और आर्थिक गिरावट ने मिलकर ब्रांड इंडिया और इसके साथ ही ब्रांड मोदी की छवि तो कमजोर की है मगर अभी वह हालत नहीं बनी है कि दुनिया हमें खारिज कर दे.

दिल्लीवालों अगर आप यमुना की चिंता करते हैं तो बहुरूपिए कालिया को वोट मत दीजिए

सरकार बनने के बाद यमुना सफाई को लेकर सशक्त एक्शन प्लान तैयार हुआ लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने एक बैठक भी नहीं की नतीजा सारा बजट लैप्स हो गया.

पाकिस्तान का इस्लामी संगठन अब दाढ़ी वाले किरदार की फिल्म के पीछे पड़ा और इमरान ख़ान ने घुटने टेक दिए

‘ज़िंदगी तमाशा’ के निर्माता सरमद खूसट को फिल्म की रिलीज टालने की सलाह देकर इमरान ख़ान सरकार ने एक तरह से तहरीके लब्बैक पाकिस्तान के आगे घुटने टेक दिए हैं.

बजट 2020 में एमएसएमई को कर्ज देने को बैंकों की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल किया जाना चाहिए

केंद्रीय बजट 2020 में एमएसएमई उद्यमों को ऋण उपलब्ध कराने को लेकर एक सुसंगत और व्यावहारिक नीतिगत ढांचा तैयार करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के सामान्य नज़रिये से लगता है, भारतीयों को वापस सड़क पर उतरने की जरूरत है

भारतीय गणतंत्र को बचाने की लड़ाई अब अदालत और संसद के किले या फिर ऐसी ही किसी प्रतिष्ठानी जगह से नहीं लड़ी जा सकेगी. लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक तरीका अपनाते हुए लड़ाई को अब सड़कों तक खींच लाना होगा.

नागरिकता आंदोलन का नेता कन्हैया नहीं, चंद्रशेखर को होना चाहिए

कन्हैया कुमार की आवाज उन लोगों के बीच ही गूंज रही है, जो पहले से मोदी और बीजेपी के विरोधी हैं, जबकि चंद्रशेखर आजाद नागरिकता कानून को दलित-आदिवासी विरोधी बताकर बीजेपी के हिंदू-मुसलमान खेल को तोड़ते हैं.

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मणिपुर के राजग विधायक दिल्ली में : लोकप्रिय सरकार बनाने पर बातचीत की संभावना

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तलब किये जाने के बाद मणिपुर के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.