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Sunday, 1 February, 2026
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मोदी द्वारा सोशल मोबिलाइजेशन की दूसरी कोशिश है ‘जनता कर्फ्यू’, यह दोधारी तलवार भी साबित हो सकती है

सारा खेल रोकथाम पर निर्भर है, क्योंकि रोग अगर महामारी की तरह फ़ेल गया तो अपने अपर्याप्त मेडिकल संसाधन के चलते उससे निपटना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

कोरोना के दौर में पत्रकारिता, यह हमारे जीवन की सबसे बड़ी कहानी होगी

कोरोनावायरस हम पत्रकारों के जीवन की सबसे बड़ी कहानी है और एक अरब से ज्यादा लोग हमसे उम्मीद कर रहे हैं कि हम इस दौर में उनके लिए हालत पर नज़र रखें, खबरें देते रहें, सम्पादन का दायित्व निभाते रहें और नाइंसाफ़ियों तथा सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करते रहें.

क्या पूर्व सीजेआई गोगोई पर हमला कर अप्रत्यक्ष रूप से अन्य न्यायाधीशों को निशाना बनाया जा रहा है

पूर्व न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली लगभग सभी पीठ में फैसले सर्वसम्मति से हुए या फिर पीठ के अन्य सदस्यों ने उनके निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की है.

अखलाक और अकबर हों या पुलवामा व सुकमा के सैनिक, सरकार की मुआवज़ा नीति एक समान नहीं

कोई कह सकता है कि सैनिकों के परिवार किसानों के मुक़ाबले बेहतर मुआवजे के हकदार हैं क्योंकि किसान अपनी ‘ड्यूटी’ पर अपनी जान नहीं देते, लेकिन सफाई कर्मचारियों का क्या?

क्या भारत में भावनाओं की लहर पर सवार है समूची दलित राजनीति

समूचे बहुजन आंदोलन का ध्यान हंगामा करने के मकसद पर ज्यादा रहा. सूरत बदली कि नहीं इसपर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया.

कोरोनावायरस से जूझती दुनिया में पाकिस्तान इतनी तसल्ली से क्यों बैठा है

पाकिस्तान के एक मंत्री ने कोरोनावायरस को ख़ुदा का दंड बताया है. पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री उलेमाओं को मस्जिदों को बंद नहीं करने का भरोसा दिला रहे हैं. और राष्ट्रपति अल्वी अभी-अभी चीन होकर आए हैं.

क्या कोविड-19 जैविक हथियार है, क्या गर्म पानी, नीम इसका इलाज है- व्हाट्सएप पर वायरल 24 दावों की पड़ताल

कोविड-19 को लेकर गलत जानकारियां हमारे फोन और संचार माध्यमों में बिजली की गति से फैल रही हैं, इतनी तेज़ी से जिससे यह वायरस भी नहीं फैल सकता. इसे हम सूझ-बूझ के साथ कैसे निपट सकते हैं.

एनआरसी मुद्दे पर राज्य मोदी को तीन आसान तरीकों से मात दे सकते हैं: डिलिंक,डिफर और डिफ्यूज

राज्यों को एनपीआर के अपडेट से इंकार करने की आवश्यकता नहीं है. वे जनगणना की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए कुछ सावधानियों पर जोर दे सकते हैं ऐसा कर वह स्वयं के कानूनी दायित्वों का उल्लंघन भी नहीं करेंगे.

तीन सालों में कागजी शेर साबित हुए योगी आदित्यनाथ, किसान-भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा पर रहे आंख चुराते

योगी आदित्यनाथ सरकार के तीन साल तो हो गए लेकिन नौजवानों को रोजगार, भयमुक्त माहौल, महिला सुरक्षा हेतु एंटी रोमियो स्क्वॉयड, सड़कें गड्ढा मुक्त करने की या किसानों के बकाए भुगतान और कर्जमाफी की ये सभी बातें और वादे जमीन पर नहीं उतरते दिखाई नहीं दिए हैं.

स्वास्थ्य से लेकर कानून व्यवस्था तक- कितनी खरी उतरी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार

जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे किये हैं, तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यह सरकार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की दिशा में तेज़ी के साथ काम कर रही है.

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जब तक मैं मुख्यमंत्री रहूंगा, ‘मियां’ समुदाय को परेशानी का सामना करना पड़ेगा: हिमंत

गोलपाड़ा, एक फरवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि जब तक वह सत्ता में रहेंगे, ‘मियां’ समुदाय को...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.