कोरोनावायरस हम पत्रकारों के जीवन की सबसे बड़ी कहानी है और एक अरब से ज्यादा लोग हमसे उम्मीद कर रहे हैं कि हम इस दौर में उनके लिए हालत पर नज़र रखें, खबरें देते रहें, सम्पादन का दायित्व निभाते रहें और नाइंसाफ़ियों तथा सरकारी तंत्र की खामियों को उजागर करते रहें.
पूर्व न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली लगभग सभी पीठ में फैसले सर्वसम्मति से हुए या फिर पीठ के अन्य सदस्यों ने उनके निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की है.
कोई कह सकता है कि सैनिकों के परिवार किसानों के मुक़ाबले बेहतर मुआवजे के हकदार हैं क्योंकि किसान अपनी ‘ड्यूटी’ पर अपनी जान नहीं देते, लेकिन सफाई कर्मचारियों का क्या?
पाकिस्तान के एक मंत्री ने कोरोनावायरस को ख़ुदा का दंड बताया है. पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री उलेमाओं को मस्जिदों को बंद नहीं करने का भरोसा दिला रहे हैं. और राष्ट्रपति अल्वी अभी-अभी चीन होकर आए हैं.
कोविड-19 को लेकर गलत जानकारियां हमारे फोन और संचार माध्यमों में बिजली की गति से फैल रही हैं, इतनी तेज़ी से जिससे यह वायरस भी नहीं फैल सकता. इसे हम सूझ-बूझ के साथ कैसे निपट सकते हैं.
राज्यों को एनपीआर के अपडेट से इंकार करने की आवश्यकता नहीं है. वे जनगणना की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए कुछ सावधानियों पर जोर दे सकते हैं ऐसा कर वह स्वयं के कानूनी दायित्वों का उल्लंघन भी नहीं करेंगे.
योगी आदित्यनाथ सरकार के तीन साल तो हो गए लेकिन नौजवानों को रोजगार, भयमुक्त माहौल, महिला सुरक्षा हेतु एंटी रोमियो स्क्वॉयड, सड़कें गड्ढा मुक्त करने की या किसानों के बकाए भुगतान और कर्जमाफी की ये सभी बातें और वादे जमीन पर नहीं उतरते दिखाई नहीं दिए हैं.
जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे किये हैं, तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यह सरकार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की दिशा में तेज़ी के साथ काम कर रही है.