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Saturday, 31 January, 2026
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लॉकडाउन के बीच किसके हित में है यह उलटी दिशा में होने वाला मजदूरों का विस्थापन

अब तक के गांव से शहर और पिछड़े इलाकों से विकसित इलाकों की ओर होने वाले विस्थापन से उलटी दिशा में होने वाले मौजूदा विस्थापन से गांव और शहर दोनों बदल जाएंगे.

रियाज़ नायकू का मारा जाना हंदवाड़ा का बदला नहीं है और भारत सैनिकों की मौत का महिमामंडन रोके

हाल के दिनों में हताहत सुरक्षाकर्मियों की संख्या में वृद्धि मोदी सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए खतरे की घंटी होनी चाहिए.

इज़रायल की लैब आईआईबीआर की नई खोज और कोविड-19 का इलाज

#CutTheClutter के इस एपिसोड में दिप्रिंट के एडिटर इन चीफ शेखर गुप्ता बता रहे हैं कि इज़रायल की लैब आईआईबीआर ने एंटिबॉडी तैयार की है. इसका मनुष्य पर ट्रायल हुआ है कि नहीं इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आयी है.

विदेशी मीडिया को भाजपा-विरोधी और शैंपेन समाजवादी स्तंभकार क्यों पसंद आते हैं

न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, गल्फ़ न्यूज़ और गार्डियन जैसे अखबारों के संपादकीय पेज पर आमतौर पर राणा अयूब और स्वाति चतुर्वेदी जैसे मोदी से नफ़रत करने वाले भारतीयों को जगह दी जाती है.

लॉकडाउन हटने के बाद क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था को हो सकता है फायदा

कोविड-19 वायरस का मुक़ाबले करते हुए सरकार और लोगों के व्यवहारों में तो बदलाव आया ही है, आर्थिक तौरतरीके भी बदलेंगे. अब कृषि और ग्रामोद्योग ही भारत को मजबूती दे सकते हैं.

बेहतर होता कि दिल्ली महिला आयोग ‘ब्यॉयज लॉकर रूम’ ग्रुप के किशोरों की काउंसिलिंग कराता, ना कि सुर्खियां बटोरता

अब इन लड़कों के खिलाफ बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण कानून, भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मामला दर्ज करके उन्हे सख्त सजा देने की मांग उठ रही है.

इमरान खान के ‘नया पाकिस्तान’ में ‘माइनॉरिटी कमीशन’ जब देश में अल्पसंख्यक ही नहीं बचे हैं

बात जब मुसीबतजदा अहमदियों की सुरक्षा की आती है तब ऐसा लगता है कि ‘नया पाकिस्तान’ में उनके लिए नया कुछ नहीं है.

पालघर के साधुओं की हत्या पर जितना गुस्सा भाजपा को आया वैसा हर बार नहीं आता, भगवा के भी 50 रंग हैं

कोरोना काल में साफ हुई नदियों का श्रेय भी भगवा पार्टी आसानी ने लूट रही है और कोई सवाल नहीं पूछ रहा.

सेना फूल बरसाने और बैंड का प्रदर्शन करने के बजाय अब कश्मीर में अपनी गलतियों पर ध्यान दे

कश्मीर में 18 सुरक्षा जवानों के मारे जाने के बाद भारत को अब क्षेत्र में हालात को संभालने के लिए अपनी सैन्य और राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करने की जरूरत है.

कोविड या फाइनेंशियल पैकेज को दोष न दें, राजनीति प्रवासी मजदूरों को बंधक बना रही है

अब टीवी पर शराब की बिक्री और कतार में लगे शराबियों की कहानियां हैं, इन अप्रवासी मजदूरों की कहानियां टीवी के पर्दे से अब गायब है मानो मुनादी कर दी गई हो कि अप्रवासी मजदूरों का कोई वजूद नहीं है.

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गुज़ारा करने के लिए कर्ज़ा: भारतीय परिवार ज़्यादा बचत करते हैं, फिर भी क्यों हैं कर्ज़ में?

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.

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राजनीति

देश

दिल्ली: जनवरी 2026 में औसत एक्यूआई 307 रहा

नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल जनवरी में पिछले वर्ष की तुलना में वायु गुणवत्ता में मामूली गिरावट देखी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.