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Tuesday, 27 January, 2026
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चीन से समझौता कीजिए लेकिन LAC पर तनाव घटाने के लिए सिर्फ ऐसा किया जाता है तो ये भारी भूल होगी

कमज़ोर अर्थव्यवस्था के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. विश्वास के उस स्तर को फिर से हासिल करना जो भारत-चीन रिश्तों को स्थिर कर सके और सैन्य तनावों को रोक सके, असंभव तो नहीं लेकिन मुश्किल ज़रूर है.

आखिर क्यों आज के भारत में कांशीराम के राजनीतिक रणनीति की जरूरत है

कांशीराम ने जनता की ज्वलंत समस्याओं पर प्रकाश डालने के लिए जन संसद की अवधारणा पर बल दिया था और तमाम जन संसद आयोजित भी कराया था.

दलितों के मुद्दों पर अगर रामविलास पासवान, मीरा कुमार और मायावती के बीच संवाद नहीं हुआ तो उसका कारण बिजनौर का चुनाव था

जीवन में बाद के वर्षों में पासवान भले ही आरएसएस-भाजपा के साथ मिलकर सामाजिक न्याय विरोधी तमाम बड़े-बड़े कार्यों में सहभागी रहे हों लेकिन उनकी मूल रूप से छवि सामाजिक न्याय के योद्धा की ही रही.

चीन ने एलएसी की घड़ी 1959 की तरफ घुमा दी है, भारत के लिए अक्साई चिन वापस लेना मुश्किल हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रिय भी हैं और राजनीतिक कौशल भी रखते हैं लेकिन क्या वे देश को अरुचिकर रणनीतिक फैसले के बारे में कायल कर सकते हैं?

पाकिस्तान में ‘मोदी का जो यार है, वो गद्दार है’ के नारे की धूम

यदि ‘गद्दार’ और ‘भारतीय एजेंट’ के सर्टिफिकेट इसी उत्साह से बांटे जाते रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब भारतीयों की आबादी करीब 22 करोड़ बढ़ जाएगी.

पाकिस्तान में इमरान खान और विपक्ष दोनों मौलाना-मौलाना खेल रहे हैं, इनके तार आतंकवाद से जुड़े हैं

मौलाना ताहिर अशरफी और मौलाना फजलुर्रहमान विवादास्पद हैं और आतंकी संगठनों से जुड़े रहने के आरोप हैं पर दोनो की पाकिस्तान की राजनीति में भूमिका अहम हो गई है.इस राजनीतिक घटनाक्रम से साफ पता चल रहा है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही ने धार्मिक नेताओं की आड़ लेकर अपने पासे फेंक दिए हैं.

ऊना और रोहित वेमुला की तरह हाथरस के प्रदर्शनकारियों को भी नहीं छोड़ेगी बीजेपी: जिग्नेश मेवानी

कहना मुश्किल है कि हिंदुत्ववादी सरकार के रहते किसी जाति-विरोधी आंदोलन से सकारात्मक राजनीतिक बदलाव आएगा.

भारत की चीन नीति इतनी नाकाम क्यों रही है? पहले नई दिल्ली की मान्यताओं पर सवाल उठाइए

शक्ति के भारी अंतर को देखते हुए चीन अपना प्रभाव फैला रहा है. लेकिन भारत के व्यवहार को समझाना मुश्किल है.

भारतीय वायु सेना के शांतिकालीन अभियान किसी भी अन्य देश के मुकाबले अधिक व्यापक क्यों हैं

वायुसेना के पायलट जमाने वाली मौसमी दशाओं, अत्यंत निम्न तापमान और ऐसी पर्वतीय हवाओं के बीच काम करते हैं जो कि उड़ान के दौरान भी विमान को तोड़ सकती है.

हाथरस आंदोलन और 2012 के दिल्ली आंदोलन के सामने चुनौतियों में क्या फर्क है

आधी रात को शव का दाह संस्कार, पीड़ित दलित परिवार की घेराबंदी, ठाकुरों को वर्चस्व दिखाने की अनुमति- यह सब हाथरस कांड की निशानियां हैं.

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भारत दावोस जैसी बातचीत के लिए तैयार है, वैश्विक शासन को एक नए मेज़बान की ज़रूरत है

प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.

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दक्षिण 24 परगना जिले में दो सटे हुए गोदामों में आग लगने से आठ लोगों की मौत, कई लोग लापता

कोलकाता, 26 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आपस में अगल-बगल स्थित दो गोदामों में सोमवार को आग लगने से...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.