बेकाबू कोविड पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी अगर वैज्ञानिकों की सलाहों पर ध्यान नहीं देंगे तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री का भारत दौरा रद्द किए जाने की अहमियत उन्हें समझ में नहीं आएगी.
बीतों वर्षों में भारतीय नागरिकों का शासन में भरोसा खत्म हो चुका है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनका भरोसा बना हुआ है. क्या भाजपा के मुकाबले राष्ट्र को अधिक तरजीह देंगे मोदी?
अधिकांश धार्मिक ग्रंथ अतीत में कानून का स्रोत रहे हैं. लेकिन उनसे जुड़े समुदाय अब उन्हें इस रूप में नहीं देखते हैं. मुसलमान भी इस्लाम में आधुनिक मूल्यों को ढूंढ सकते हैं.
19वीं शताब्दी में एम नागलू गुमनामी से उठकर जानी-मानी शख्सियत बन गए. उनके पुत्र द्वारा लिखी उनकी बॉयोग्राफी संभवतः पहली दलित बॉयोग्राफी है जो अंग्रेजी में लिखी गई है.
स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. कई कंपनियां और बिजनेस सेक्टर पहले से ही बीमार हैं और अब नया झटका उन्हें गर्त में ही धकेल देगा.
कोरोना पर समय से पहले जीत जाने के ऐलान के साथ कुंभ मेले और चुनावों को मंजूरी देकर और वैक्सीन की जरूरत की अनदेखी करके मोदी सरकार ने अपने लिए सबसे बड़े संकट को बुलावा दे दिया है, अब हकीकत को पहचानने की विनम्रता, और कोई ‘रामबाण’ ही इस संकट से उबार सकता है.
जनसभाओं पर रोक लगाने और लोगों को अनुशासित करने के काम में अभी भी देर नहीं हुई है. लेकिन लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने से पहले सरकारों को खुद का उदाहरण पेश करने की जरूरत है.
छत्तीसगढ़ में ताजा माओवादी हिंसा ने हमारे सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और उनकी रणनीतियों की खामियां फिर उजागर की. सवाल यह भी है कि हम नागा, मिज़ो और हुर्रियत जैसे अलगाववादियों से बातें कर चुके हैं. तो माओवादियों से क्यों नहीं बात की जा सकती?
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.