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Tuesday, 24 February, 2026
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पीएम मोदी का विज्ञान के आगे आस्था को तरजीह देना क्यों दुनिया में भारत की छवि खराब कर रहा है

बेकाबू कोविड पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी अगर वैज्ञानिकों की सलाहों पर ध्यान नहीं देंगे तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री का भारत दौरा रद्द किए जाने की अहमियत उन्हें समझ में नहीं आएगी.

भारतीय पुलिस को राजनीति से अलग करने का वक्त है, यह मोदी का ‘सुदर्शन चक्र’ साबित हो सकता है

बीतों वर्षों में भारतीय नागरिकों का शासन में भरोसा खत्म हो चुका है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनका भरोसा बना हुआ है. क्या भाजपा के मुकाबले राष्ट्र को अधिक तरजीह देंगे मोदी?

कुरान की आयतों की समीक्षा की ज़रूरत लेकिन SC नहीं, बल्कि इस्लामी विद्वानों के जरिए हो

अधिकांश धार्मिक ग्रंथ अतीत में कानून का स्रोत रहे हैं. लेकिन उनसे जुड़े समुदाय अब उन्हें इस रूप में नहीं देखते हैं. मुसलमान भी इस्लाम में आधुनिक मूल्यों को ढूंढ सकते हैं.

मोदी सरकार पहली लहर की सफलता के मुगालते में रही, जबकि कोविड की दूसरी घातक लहर दस्तक दे रही थी

दुनिया जब कयामत की भविष्यवाणियों को झूठा साबित करने की भारत की कामयाबी से हैरत में थी, तब जाहिर है कि मोदी गर्व से फूले नहीं समा रहे थे.

भारत के पहले दलित होटल के मालिक एम नागलू, जो ब्रिटिश और अमेरिकी यात्रियों के बीच मशहूर थे

19वीं शताब्दी में एम नागलू गुमनामी से उठकर जानी-मानी शख्सियत बन गए. उनके पुत्र द्वारा लिखी उनकी बॉयोग्राफी संभवतः पहली दलित बॉयोग्राफी है जो अंग्रेजी में लिखी गई है.

मोदी सरकार ने कोविड संकट को मज़ाक बना दिया है, सही उपायों को अपनाने के लिए गंभीर होने का वक्त है

स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. कई कंपनियां और बिजनेस सेक्टर पहले से ही बीमार हैं और अब नया झटका उन्हें गर्त में ही धकेल देगा.

कोविड की ‘खतरनाक’ तस्वीर साफ है, कोई मोदी सरकार को आइना तो दिखाए

कोरोना पर समय से पहले जीत जाने के ऐलान के साथ कुंभ मेले और चुनावों को मंजूरी देकर और वैक्सीन की जरूरत की अनदेखी करके मोदी सरकार ने अपने लिए सबसे बड़े संकट को बुलावा दे दिया है, अब हकीकत को पहचानने की विनम्रता, और कोई ‘रामबाण’ ही इस संकट से उबार सकता है.

भारत की दिक्कत ‘वैक्सीन मैत्री’ नहीं बल्कि कोविड के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र-राज्य के बीच तकरार है

जनसभाओं पर रोक लगाने और लोगों को अनुशासित करने के काम में अभी भी देर नहीं हुई है. लेकिन लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने से पहले सरकारों को खुद का उदाहरण पेश करने की जरूरत है.

खामी भरी सुरक्षा रणनीति के कारण कैसे असफल हो रही है माओवादी विद्रोह पर लगाम लगाने की कोशिश

छत्तीसगढ़ में ताजा माओवादी हिंसा ने हमारे सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और उनकी रणनीतियों की खामियां फिर उजागर की. सवाल यह भी है कि हम नागा, मिज़ो और हुर्रियत जैसे अलगाववादियों से बातें कर चुके हैं. तो माओवादियों से क्यों नहीं बात की जा सकती?

कोरोना पर अपनी ‘नाकामियां छुपाने’ के लिए तब मरकज़ का सहारा लिया था, अब कुंभ पर क्या कहेगी मोदी सरकार

तीन करोड़ लोग अप्रैल में इस महाकुम्भ में हिस्सा लेंगे, उनमें कितने लोग पॉजिटिव होंगे और इतनी भीड़ वाले इलाके में वे कितने और लोगों को कोरोना फैलाएंगे.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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राजनीति

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सेवा तीर्थ शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि सशक्तीकरण का केंद्र होगा : मंत्रिमंडल का प्रस्ताव

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नये प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.