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Sunday, 29 March, 2026
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भारतीय भाषाओं में अंग्रेजी का सटीक अनुवाद जरूरी, PM मोदी का सवाल वाजिब है

देश में हर भाषा को संरक्षित रखने का पहला दायित्‍व परिवार का है और अंतिम निर्णय लेकर वह अपनी भाषा और संस्‍कृति को सहेज कर रख सकता है.

एमएस धोनी भारतीय क्रिकेट के इंद्रधनुष और महानायक हैं जिन्होंने पूरे देश के युवाओं को प्रेरित किया है

महेंद्र सिंह धोनी का ईमानदारी भरा आत्म-मूल्यांकन हमेशा भारतीय क्रिकेट के हितों को अपने स्वयं के लिए कोई 'विरासत' खड़ी करने की किसी भी इच्छा से आगे रखता है.

मधु लिमये को उनकी जन्मशती पर याद करने का सबसे अच्छा तरीका है कि दलबदल पर पाबंदी हटा दी जाए

मधु लिमये के लिए उनकी जन्मशती के वर्ष में सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि हम संविधान से दसवीं अनुसूची हटा दें और मजाक बन चले इस कानून से ये उम्मीद पालना छोड़ दें कि वह दलबदल को रोक सकता है.

‘सर तन से जुदा’ फिलॉस्फी नहीं छोड़ रहे मुस्लिम नेता—उदयपुर हत्याकांड पर हिंदू दक्षिणपंथी प्रेस ने क्या लिखा

पिछले कुछ हफ्तों में हिंदुत्व समर्थक मीडिया ने विभिन्न खबरों और सामयिक मुद्दों को कैसे कवर किया और उन पर क्या संपादकीय टिप्पणी की, इसी पर दिप्रिंट का राउंड-अप.

बंगाल में बहुत काली देवियां हैं लेकिन TMC में उनके लिए गुंजाइश नहीं; UP, हरियाणा पर पार्टी की निगाह

मोइत्रा और TMC नेतृत्व को आपस में बात करने की ज़रूरत है. और बाक़ी सबको एक मेमो भेज दीजिए: अब पार्टी की लाइन केवल बंगाल की पहचान बचाना नहीं है.

कोबाल्ट, तांबा, चीन ही नहीं भारत को कांगो में बर्बर हिंसा पर भी ध्यान देना चाहिए

सुरक्षा के लिए भाड़े के सैनिकों का इस्तेमाल परोक्ष युद्ध, औपनिवेशिक युग वाली बर्बरता को बुलावा देना है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को आर्थिक दांव के मद्देनजर इसमें महज तमाशबीन बनकर नहीं रहना चाहिए.

अखलाक से कन्हैया लाल तक बहुत हुआ, अब जाग जाइए

हमने यथासमय निर्णायक होकर यह बात तय नहीं की तो आश्चर्य नहीं कि जल्दी ही हमें मिर्जा गालिब की तरह कहना पड़े: कोई उम्मीदवर नहीं आती, कोई सूरत नजर नहीं आती!

चीन-अमेरिका विभाजन के दोनों पलड़ों में भारत को होगा फायदा, शीत युद्ध में छिपे हैं आगे की राह के संकेत

भारत का सामरिक संतुलन पश्चिम पर टिका है और आर्थिक संतुलन चीन की ओर केंद्रित है. लेकिन बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए इसे और भी बहुत कुछ चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा पर जो ‘लेक्चर’ दिया, उसे भारत क्या पूरी तरह समझ पाया

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भारत में जो प्रतिक्रियाएं सामने आईं उनसे तो यही संकेत मिलता है कि यह महज शोरशराबे का देश बन गया है जिसका कोई मतलब नहीं होता.

उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पास कोई भावनात्मक मुद्दा नहीं, शिंदे के पास जा सकती है पार्टी

शिवसेना का शिंदे गुट चूंकि बीजेपी के खेमे में चला गया है. उसके लिए फिर से हिंदू-मुस्लिम द्वैत यानी बायनरी में लौट जाना आसान होगा

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खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.