विपक्षी सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव में CEC पर ‘पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार’, ‘चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा’ और ‘बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अधिकार से वंचित करने’ जैसे आरोप लगाए गए हैं.
क्या किसी ने सच में यह जांचा कि चर्च जाने के बावजूद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज़ बनाए रखे थे या नहीं? यह पता नहीं है, क्योंकि इसके लिए किसी व्यक्ति की निजी ज़िंदगी में और गहरी जांच करनी पड़ती, और कोई भी राज्य इतने लोगों की निजी ज़िंदगी में इतना अंदर तक नहीं जा सकता.