कौन सी धार्मिक क्रियाएं संविधान द्वारा संरक्षित हैं, और किन को राज्य नियमित कर सकता है, ये तय करने के लिए अदालतें दशकों से उन्हें ‘आवश्यक धार्मिक आचरण’ की कसौटी पर परखती आई हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.