आरएसएस के नेताओं का कहना है कि प्रथागत कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए और सर्वप्रथम अनुचित प्रथाओं को खत्म किया जाना चाहिए. दरअसल संघ को आदिवासी समुदायों के मामले में दुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके निजी कानूनों को छोड़ना नहीं चाहते हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.