इसे लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं कि क्या सरकार बाधाओं को दूर करेगी और अपना टैक्सेशन सिस्टम बदलेगी. इसके अलावा, उद्योग जगत के हितधारकों का ध्यान बौद्धिक संपदा (आईपी) निर्माण क्षेत्र पर भी केंद्रित है.
न्यायमूर्ति एस. ए. नजीर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सरकारी पदाधिकारियों/अधिकारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?