दिसंबर लगातार 10वां महीना है जब जीएसटी राजस्व 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है. इससे पहले नवंबर में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये था.
शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.