आमतौर पर 'उच्च आवृत्ति संकेतक' में शामिल नहीं किए जाने वाले इंडस्ट्रियल एंड कंज्यूमर डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि भले ही मांग महामारी से उबरती नजर आ रही हो, लेकिन यह अभी भी कमजोर बनी हुई है.
विशेषज्ञों का कहना है कि वेतन सीमा, निचले स्तर के श्रमिकों का एक से दूसरी जगह बदलते रहना, छोटे प्रतिष्ठानों का जानबूझकर पंजीकरण से बचना, आदि वे कारण हैं जो ईपीएफ डेटा को त्रुटिपूर्ण संकेतक बनाते हैं.
MMRDA ने कहा कि यह घटना मुलुंड फायर स्टेशन के पास हुई. शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. ‘बीजेपी शासन में ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है’.