खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.7% से बढ़कर जनवरी में 6.5% हो गई, जो मुख्य रूप से खाद्य कीमतों से प्रेरित थी, जबकि भारत की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में 2 साल के निचले स्तर 4.73% पर आ गई.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है