यह सामंजस्य स्थापित करना कठिन है कि कैसे गरीबो की आधी आबादी खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं पर 64% टैक्स देती है जबकि इसमें से कुछ चीज़े वे या तो कुछ वर्षों में एक बार खरीदते है, या गरीबों द्वारा खरीदा ही नहीं जाता है.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.