RBI ने सभी घरेलू बैंकों से अडाणी समूह की कंपनियों को दिए गए लोन की रिपोर्ट मांगी थी और सीएलएसए ने कहा था कि अडाणी समूह के कुल ऋण में भारतीय बैंक फंडिंग का हिस्सा 40 प्रतिशत से कम है.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.