विशेषज्ञों के मुताबिक, रूसी कच्चा तेल बाल्टिक बंदरगाहों से लेकर गुजरात के तट तक करीब 7,000 नॉटिकल मील का सफर करता है—रास्ते में शिप-टू-शिप ट्रांसफर करके और कई बार कीमत की तय सीमा से बचने के तरीके अपनाकर.
यह सोच कि किसी भी पहाड़ तक पहुंच अच्छी चीज़ है, और कोई भी चोटी पहुंच से बाहर नहीं होनी चाहिए—पहाड़ों को ऐसी चीज़ में बदल देती है जिसका सामना करने के बजाय, उसे बस इस्तेमाल किया जाए.